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आकाश एक बार फिर जमीन पर, यूपी चुनाव से पहले मायावती का बड़ा फैसला | Akash Anand back on ground Mayawati major decision ahead of UP elections



मायावती ने उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव को लेकर अपने नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि 2027 का उत्तरप्रदेश का विधानसभा चुनाव बीएसपी अकेले लड़ेगी और किसी से कोई गठबंधन नहीं होगा. लेकिन इस बैठक की सबसे बड़ी खबर ये है कि मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को कोई जिम्मेदारी नहीं सौंपी है.उन्होंने कहा कि आकाश आनंद अभी अपरिपक्व हैं.

आकाश बैठक में भी नहीं थे मौजूद

आकाश आनंद इस बैठक में मौजूद नहीं थे मगर दिलचस्प बात है कि उनका छोटा भाई ईशान आनंद बैठक में शामिल हुए थे. आकाश के साथ पहली बार नहीं हुआ है कि मायावती ने उन्हें अर्श से लाकर फर्श पर ला दिया हो. ऐसे कई उदाहरण हैं जब आकाश को अपना करीब उत्तराधिकारी घोषित करके पीछे हट गईं हो.

2024 के लोकसभा चुनाव में भी हुआ था विवाद

मायावती ने पिछले मई में आकाश को नेशनल कोर्डिनेटर और बाद में नेशनल कन्वेनर भी बनाया था. पिछले ही महीने आकाश ने हाथरस और जेवर में सभाएं भी की थी और दो उम्मीदवारों के नाम की घोषणा भी कर दी थी. 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले आकाश को एक तरह से उत्तराधिकारी घोषित करने के बाद जब सीतापुर की रैली में आकाश के भाषण पर विवाद हुआ तो मायावती ने उन्हें नेशनल कोर्डिनेटर से हटा दिया था.

अकेले चुनाव कैसे लड़ेगी बसपा?

अब सबसे बड़ा सवाल है कि उत्तरप्रदेश का विधानसभा चुनाव अकेले लड़ कर मायावती क्या करेंगी. क्योंकि अभी 403 की विधानसभा में बीजेपी के पास 258, सपा के पास 107,अपना दल के 13 और कांग्रेस के 2 विधायक हैं. जबकि बीएसपी के पास 1 विधायक था और उसे 12.88 फीसदी वोट मिले थे, जो 2024 के लोकसभा चुनाव में घट कर 9.39 फीसदी रह गया. अब जो हालात है कि आने वाले विधानसभा में भी बीएसपी का वोट 10 फीसदी से कम हो जाएगा.

दलित वोटों की लड़ाई बीजेपी और सपा गठबंधन के बीच

उत्तरप्रदेश में दलित वोटों की लड़ाई अब सीधे सीधे बीजेपी और सपा गठबंधन के बीच होने वाली है. यही वजह है कि हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के शुद्धिकरण का मामला राहुल गांधी जोरदार ढंग से उठा रहे हैं. उत्तराखंड में राहुल गांधी पर एफआईआर दर्ज होना. कांग्रेस ने 123 थानों में एफआईआर दर्ज कराई. सब जानते हैं कि इस विवाद के बहाने कांग्रेस उत्तरप्रदेश और पंजाब में दलितों को साधना चाहती है. कांग्रेस ने उत्तरप्रदेश का प्रभारी भी दलित को ही बनाया हुआ है. उत्तरप्रदेश के जानकारों का मानना है कि अब मायावती के पास केवल जाटव वोट ही रह गया है बाकी दलित वोटों में बाकी पार्टियों ने सेंध लगा दी है.

उत्तरप्रदेश का अगला विधानसभा तय करेगा कि बीएसपी और मायावती का भविष्य क्या होगा साथ ही आने वाले दिनों में मायावती किसे अपना उत्तराधिकारी बनाती है साथ ही आकाश आनंद कब तक परिपक्व हो जाएंगे.

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