
मध्य प्रदेश में किसानों को बैंकिंग सुविधा से जोड़ने के लिए ATM कार्ड तैयार तो बड़ी संख्या में कराए गए, लेकिन बैंक इन कार्डों को किसानों तक पहुंचा नहीं पाए. प्रदेश में करीब 23 लाख किसान ऋण लेते हैं, जबकि सहकारी बैंकों ने जरूरत के मुकाबले 20 लाख से ज्यादा ATM कार्ड तैयार करा लिए. इनमें से महज करीब 2.5 लाख कार्ड ही किसानों को बांटे जा सके.
यानी बड़ी संख्या में ATM कार्ड तैयार कराने के बावजूद करीब 17 लाख कार्ड का इस्तेमाल ही नहीं हो पाया. ये कार्ड बैंकों के स्टोर में पड़े हैं और समय के साथ इनकी वैधता भी खत्म होती जा रही है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब किसानों की संख्या और कार्ड वितरण की वास्तविक जरूरत सामने थी, तो जरूरत से कई गुना ज्यादा कार्ड क्यों तैयार कराए गए?
23 करोड़ से ज्यादा का खर्च, उपयोग सिर्फ 2.5 लाख कार्ड का
ABP न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अपेक्स बैंक और 38 जिला सहकारी बैंकों में ATM कार्ड की खरीद पर करीब 23 करोड़ रुपये खर्च किए गए. करीब 19.5 लाख ATM कार्ड खरीदे गए, जबकि इनकी जरूरत लगभग 2.5 लाख बताई गई. बैंक रिकॉर्ड के मुताबिक करीब 2.5 लाख कार्ड ही एक्टिवेट हुए हैं.
लाखों कार्ड स्टोर में, अब वैधता खत्म होने का खतरा
सबसे बड़ा सवाल उन लाखों कार्डों को लेकर है जो किसानों को बांटे ही नहीं जा सके. वर्ष 2022_2023 में खरीदे गए कई कार्ड अब उपयोग में आने से पहले ही अपनी वैधता की अवधि की तरफ बढ़ रहे हैं. यानी जिस योजना के जरिए किसानों को बैंकिंग सुविधा आसान बनाने का लक्ष्य था, उसमें बड़ी संख्या में कार्ड बैंक के स्टोर में ही पड़े रह गए.
सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने दिए जांच के आदेश
मामले की शिकायत के बाद सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने जांच के निर्देश दिए हैं. जांच में यह देखा जाएगा कि 23 लाख किसान ऋण लेते हैं तो ATM कार्ड की वास्तविक जरूरत कितनी थी, 20 लाख से ज्यादा कार्ड तैयार कराने का निर्णय किस आधार पर लिया गया और सिर्फ 2.5 लाख कार्ड ही किसानों तक क्यों पहुंच पाए. जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी.
कांग्रेस ने बताया घोटाला’
इस मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि मध्य प्रदेश में हर विभाग में भ्रष्टाचार फैला हुआ है . ये भी एक घोटाला है . सरकार सिर्फ जांच की बात कर रही है , देखना होगा इस मामले पर किस पर कार्रवाई होती है.
दरअसल मध्य प्रदेश में 38 बैंकों की 825 शाखाओं की जिम्मेदारी थी कि ये ATM कार्ड लोगों तक पहुंचे लेकिन लापरवाही के चलते कुछ समय बाद ये कार्ड किसी काम के नहीं रहेंगे, फिर से नए कार्ड तैयार करने होंगे. फिर से नया टेंडर और पैसा खर्च होगा. फिलहाल देखना होगा इस मामले में कितनी बड़ी कार्रवाई होती है.