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1971 में आई वो फिल्म, जिसके 5 के 5 गाने हैं सदाबहार, मुकेश, मन्ना डे, लता मंगेशकर और अमिताभ बच्चन की आवाज ने बनाया एवरग्रीन | 1971 film featuring 5 timeless songs made evergreen by voices of Mukesh Manna Dey Lata Mangeshkar and Amitabh Bachchan



नई दिल्ली:

70 का दौर वो दौर था जब राजेश खन्ना हिट पर हिट फिल्में दे रहे थे. वहीं इसमें अमिताभ बच्चन की एंट्री हुई. लेकिन कुछ ही फिल्में हैं, जिसमें ये दो सुपरस्टार नजर आए. वहीं गाने इतने पॉपुलर हुए कि आज जिंदगी का फलसफा बताते हैं और खूब सुने जाते हैं. हम बात कर रहे हैं 1971 में रिलीज हुई फिल्म आनंद की, जिसे ऋषिकेश मुखर्जी ने डायरेक्ट किया था. वहीं डायलॉग गुलजार ने लिखे थे. फिल्म में राजेश खन्ना लीड रोल में थे. जबकि अमिताभ बच्चन, सुमिता सान्याल, रमेश देओ और सीमा देओ सपोर्टिंग रोल में थे. 

आनंद फिल्म के गाने 

आनंद फिल्म में 5 गाने थे, जिन्हें सलिल चौधरी ने कंपोज किया था. जबकि गुलजार और योगेश ने गानों के लिरिक्स दिए थे. पहला गाना कहीं दूर जब दिन ढल जाए था, जो मुकेश ने गाया था. दूसरा गाना मैंने तेरे लिए था, जिसे भी मुकेश ने गाया था. वहीं तीसरा गाना जिंदगी कैसी है पहेली है, जिसे मन्ना डे ने गाया था. चौथा गाना ना जिया लागे ना है, जिसे लता मंगेशकर ने गाया. वहीं पांचवा गाना मौत तू एक कविता है है, जिसे अमिताभ बच्चन ने आवाज दी. 

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आनंद फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी डॉक्टर भास्कर बनर्जी (अमिताभ बच्चन) एक ईमानदार लेकिन निराश डॉक्टर हैं, जो गरीब मरीजों का मुफ्त इलाज करते हैं. एक दिन वह आनंद (राजेश खन्ना) से मिलते हैं, जिसे आंत का कैंसर (लिम्फोसारकोमा) है. उसकी जिंदगी सिर्फ 3-6 महीने की है. लेकिन इसके बावजूद वह बेहद खुशमिजाज, हंसमुख और जीवन से प्यार करने वाला इंसान है. वह जानता है कि वह मरने वाला है, फिर भी सबको खुश रखने की कोशिश करता है. अंत में भास्कर आनंद की याद में किताब लिखते हैं. 

गाना खूब हुआ पॉपुलर

IMdb के अनुसार, “जिंदगी कैसी है पहेली” गाना आनंद फिल्म के टाइटल के लिए बैकग्राउंड सॉन्ग के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए सोचा गया था. लेकिन गाना सुनने के बाद राजेश खन्ना को लगा कि इतने अच्छे गाने को टाइटल के लिए बैकग्राउंड सॉन्ग के तौर पर इस्तेमाल करना बेकार होगा. उन्होंने डायरेक्टर ऋषिकेश मुखर्जी को गाने के लिए कोई सिचुएशन बनाने का सुझाव दिया. उन दिनों टाइटल के लिए बैकग्राउंड में बजने वाले गाने रेडियो पर कम ही बजाए जाते थे. इसलिए बाद में गाने को फिल्म में लिया गया. 

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