धर्म

सावन खत्म होते ही पूजा घर से तुरंत निकालें ये 4 चीजें, वरना भाद्रपद में पड़ सकता है वास्तु दोष!


Bhadrapada Vastu Rules: सावन पूर्णिमा के साथ ही भोलेनाथ का प्रिय महीना सावन समाप्त हो जाता है और भाद्रपद यानी भादों माह की शुरुआत हो जाती है. सनातन धर्म में भाद्रपद का महीना भक्ति, उल्लास और उत्सवों का काल माना जाता है. इस महीने में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव ‘जन्माष्टमी’ और विघ्नहर्ता गणेश जी के स्वागत ‘गणेश चतुर्थी’ जैसे बड़े पर्व मनाए जाते हैं.

शास्त्रों और वास्तु नियमों के अनुसार, जब भी पूजा का काल बदलता है, तो पूजा घर की ऊर्जा को भी नए सिरे से संतुलित करना जरूरी होता है. सावन के समापन पर घर के मंदिर की विशेष सफाई करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहता है.

मंदिर से तुरंत बाहर निकालें ये 4 चीजें

सावन बीतने के बाद पूजा घर में रखी कुछ चीजें वास्तु दोष का कारण बन सकती हैं. इन्हें तुरंत हटा देना चाहिए:

सूखे बेलपत्र, धतूरा और बासी फूल: सावन के महीने में शिवलिंग पर रोज बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और शमी पत्र चढ़ाए जाते हैं. यदि मंदिर में ये सूखे या मुरझाए हुए पड़े हैं, तो इन्हें तुरंत हटा दें. सूखे पत्ते घर में नकारात्मकता लाते हैं. इन्हें कचरे में फेंकने के बजाय किसी गमले की मिट्टी में दबा दें या बहते पानी में प्रवाहित करें.

अभिषेक का बासी जल और पुराने बर्तन: शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए इस्तेमाल होने वाले लोटे, शंख या पंचामृत के बर्तनों में पुराना जल न रहने दें. तांबे और पीतल के पात्रों को अच्छी तरह धोकर चमका लें.

दीपक की जली हुई बत्तियां और भस्म: सावन में की गई आरती की जली हुई बत्तियां, धूप की राख और कपूर के अवशेष मंदिर के कोने में जमा न होने दें. यह दरिद्रता का कारण बन सकते हैं.

पुराने व मैले पूजा वस्त्र: भगवान की चौकी पर बिछा पुराना कपड़ा और सावन के दौरान उतारे गए पुराने रक्षासूत्र मंदिर से हटाकर विसर्जित कर दें.

भाद्रपद के पहले दिन ऐसे सजाएं अपना पूजा घर

भादों माह भगवान विष्णु और श्री गणेश को समर्पित होता है. पहले दिन से ही मंदिर में ये खास बदलाव करें:

गंगाजल से शुद्धिकरण: पूरे मंदिर और विग्रहों को साफ कपड़े से पोंछकर गंगाजल का छिड़काव करें. इससे वातावरण शुद्ध और शांत बनता है.

पीले और चमकीले वस्त्रों का प्रयोग: सावन में भगवान शिव के लिए सादे वस्त्रों का प्रयोग अधिक होता है, लेकिन भाद्रपद में लड्डू गोपाल और मंदिर की चौकी के लिए पीला, केसरिया या लाल रंग चुनें. पीला रंग भगवान विष्णु को अति प्रिय है.

लड्डू गोपाल और गणपति बप्पा का प्रमुख स्थान: मंदिर में बाल गोपाल के झूले को साफ करके सजाएं. उनके पास मोरपंख और बांसुरी जरूर रखें. साथ ही गणेश जी के पूजन स्थल की तैयारी शुरू करें.

तुलसी दल का नियमित प्रबंध: सावन में शिवलिंग पर तुलसी नहीं चढ़ाई जाती, लेकिन भाद्रपद में श्रीकृष्ण के हर भोग में तुलसी दल अनिवार्य होता है. मंदिर में ताजे तुलसी के पत्तों की व्यवस्था रखें.

घर के मंदिर में किया गया यह छोटा सा बदलाव परिवार में सुख, शांति और समृद्धि के नए द्वार खोलता है.

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