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कांपते हाथ… आंखों में आंसू; सद्गुरु ने कहा- ईशा फाउंडेशन के 80 लोगों से टूटा संपर्क, जारी की भावुक अपील | Tears in the eyes Sadhguru Jaggi Vasudev emotional appeal nepal flash flood Gyirong missing isha foundation group pilgrims untraceable


नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद सभी दूरसंचार सेवाएं बंद हो गई हैं और सड़क मार्ग भी बाधित है, जिससे राहत और खोज अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है. ईशा फाउंडेशन के 80 लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है. सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने भावुक होकर कहा कि प्रभावित क्षेत्र में आई तबाही का पैमाना बेहद गंभीर दिखाई देता है और अब तक किसी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि नहीं मिल सकी है. ईशा फाउंडेशन के समूह में अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, जर्मनी और भारत समेत 19 देशों के श्रद्धालु शामिल हैं. इस बीच सद्गुरु ने प्रशासन से ग्यिरोंग जाने की अनुमति भी मांगी है ताकि लापता लोगों के परिवारों की मदद की जा सके.

हम वहां तक पहुंच पाने में असमर्थ : सद्गुरु

सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने कहा, ‘गहरे दुख और पीड़ा के साथ मैं आपका ध्यान इस ओर दिलाना चाहता हूं कि तिब्बत और नेपाल की सीमा के बीच एक भयंकर फ्लैश फ्लड आई है. भारतीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार नेपाल की ओर करीब 484 लोग लापता हो गए हैं. वहीं इस ओर हमारे पास कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है.’

‘आज सुबह मैं स्वयं वहां जाने के लिए निकला था, लेकिन सभी फोन बंद हैं, दूरसंचार सेवाएं ठप हैं और सड़कें अवरुद्ध हैं. हम वहां तक पहुंच पाने में असमर्थ हैं.’

‘हमारे समूहों में से एक, एस-3 समूह, जिससे हम सागा में मिले थे और ट्रेकिंग के दौरान भी मुलाकात हुई थी, जब वे नीचे लौट रहे थे, उसमें 22 लोग अमेरिका से, 12 कनाडा से, 11 ऑस्ट्रेलिया से, 9 यूनाइटेड किंगडम से, 4 जर्मनी से, 3 फ्रांस से, 3 नेपाल से, 2 नीदरलैंड्स से, 2 न्यूजीलैंड से, 2 सिंगापुर से, 2 स्पेन से तथा फिनलैंड, हंगरी, इजराइल, लिथुआनिया, फिलीपींस, पुर्तगाल, रूस और दक्षिण अफ्रीका से एक-एक व्यक्ति शामिल थे.’

Nepal Flood Sadhguru Jaggi Vasudev: सद्गुरु की अपील

Nepal Flood Sadhguru Jaggi Vasudev: सद्गुरु की अपील

‘कुल मिलाकर यह संख्या 80 लोगों की है. इनमें 34 पुरुष और 46 महिलाएं शामिल हैं. इसके अलावा कुछ अन्य वॉलेंटियर्स भी थे, जो पास के होटलों में ठहरे हुए थे. इनमें तीन वॉलेंटियर और एक डॉक्टर शामिल थे. हालांकि, हमें अब तक किसी भी प्रकार की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है. लेकिन तबाही के पैमाने को देखकर स्थिति अच्छी नहीं लग रही है.’

सद्गुरु ने प्रशासन से लगाई गुहार

27 अगस्त को जारी अपने संदेश में सद्गुरु ने कहा कि ग्यिरोंग में आई बाढ़ में उनके समूह के 80 लोगों के संपर्क टूट गए हैं और बाढ़ के बाद से उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है. उन्होंने लिखा, ‘हम अपने समूह के 80 लोगों के बारे में कोई जानकारी न मिलने की पीड़ा में यह पत्र लिख रहे हैं. हम और उनके परिवार आपसे विनम्र अनुरोध करते हैं कि कृपया मुझे और कुछ स्वयंसेवकों को ग्यिरोंग जाने की अनुमति दें.’ सद्गुरु ने कहा कि उनका उद्देश्य बचाव कार्यों में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा होना और अपने लोगों के बारे में कोई सुराग तलाशने के प्रयासों में सहयोग करना है. उन्होंने बताया कि वह फिलहाल सागा में मौजूद हैं और ग्यिरोंग जाने की अनुमति चाहते हैं.
 

इमिग्रेशन सेंटर पहुंचने के बाद टूटा संपर्क

ईशा सेक्रेड वॉक्स की समन्वयक मां गम्भीरी ने बताया कि लापता समूह में दुनिया के 19 देशों के लोग शामिल हैं. उन्होंने कहा, “समूह में 50 से अधिक महिलाएं थीं और बाकी पुरुष थे. इसमें अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, ब्रिटेन और एशियाई देशों के लोग शामिल थे. इस समूह में भारतीय मूल के 53 लोग थे.” मां गम्भीरी के अनुसार यह समूह कैलाश मानसरोवर यात्रा पूरी कर चुका था और काठमांडू लौट रहा था. फाउंडेशन के अनुसार 77 तीर्थयात्री तिब्बती इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी कर वापसी यात्रा शुरू करने से पहले एक इमिग्रेशन सेंटर पहुंचे थे. मां गम्भीरी ने बताया, ‘इस विशेष समूह ने अपनी यात्रा पूरी कर ली थी और बुधवार सुबह काठमांडू लौट रहा था. 77 यात्री इमिग्रेशन सेंटर पहुंच चुके थे. समूह के नेता का नाम प्रवीण था.’ उन्होंने कहा कि ईशा की टीम ने सुबह करीब 9:05 बजे समूह प्रमुख से बात की थी. ‘हमारी टीम के एक सदस्य ने उनसे सुबह 9:05 बजे बात की थी. लेकिन करीब 10 मिनट बाद दोबारा संपर्क करने की कोशिश की गई तो किसी से बात नहीं हो सकी. ऐसा लगता है कि घटना इन्हीं कुछ मिनटों के दौरान हुई.’

‘ऐसा पहले कभी नहीं देखा’

मां गम्भीरी ने कहा कि ईशा के यात्री पहले भी पहाड़ी क्षेत्रों में छोटे-मोटे भूस्खलन जैसी घटनाएं देखते रहे हैं, लेकिन इस बार जो हुआ वह अभूतपूर्व था. उन्होंने कहा, ‘हमने छोटे भूस्खलन जैसी घटनाएं देखी हैं जो 12 से 24 घंटे में सामान्य हो जाती थीं, लेकिन इस बार जो हमने देखा वह पहले कभी नहीं देखा. जो हुआ वह कल्पना से परे है.’ उन्होंने बताया कि हादसे से पहले किसी भी प्रकार की चेतावनी नहीं मिली थी और सब कुछ सामान्य लग रहा था. ‘कोई संकेत नहीं था, कोई चेतावनी नहीं थी. सब कुछ सामान्य था और यह दुर्घटना अचानक हुई.’

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