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बारिश में डूबी सड़कें, ट्रैफिक जाम… गुरुग्राम के मेट्रो और सीवरेज प्रोजेक्ट्स की केंद्र ने की समीक्षा | Gurugram Rain submerged roads traffic jams Centre reviews metro and sewerage projects 



गुरुग्राम में तेज बारिश के बाद एक बार फिर सड़कों पर जलभराव और लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिला. कई इलाकों में वाहन घंटों फंसे रहे जबकि कुछ जगहों पर स्कूली बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा. हर बारिश के साथ सामने आने वाली इन समस्याओं ने शहर की ड्रेनेज व्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

इसी बीच केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने गुरुग्राम मेट्रो परियोजना, AMRUT 2.0 और CITIIS 2.0 समेत कई महत्वपूर्ण शहरी विकास योजनाओं की समीक्षा की.

71 हजार करोड़ रुपये के सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर 

AMRUT 2.0 की समीक्षा बैठक में बताया गया कि देशभर में सीवरेज और सैप्टेज इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 71,133 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं. यह AMRUT 2.0 की कुल 1,97,191 करोड़ रुपये की परियोजना लागत का लगभग 36 प्रतिशत हिस्सा है.

वर्तमान में 394 सीवरेज परियोजनाओं पर काम चल रहा है जिनकी लागत करीब 47,230 करोड़ रुपये है. इन योजनाओं के पूरा होने के बाद लगभग 48.76 लाख घरों को नए सीवरेज कनेक्शन मिलने की उम्मीद है जबकि 60.59 लाख परिवारों को उन्नत सेवाओं का लाभ मिलेगा.

गुरुग्राम मेट्रो परियोजना की भी हुई समीक्षा

तोखन साहू ने मिलेनियम सिटी सेंटर से साइबर सिटी तक प्रस्तावित गुरुग्राम मेट्रो कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट की भी समीक्षा की. इस परियोजना में द्वारका एक्सप्रेसवे तक एक स्पर लाइन भी शामिल है. बैठक में परियोजना की प्रगति, निर्माण योजना और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय पर विस्तार से चर्चा हुई. सरकार का मकसद परियोजना से जुड़ी बाधाओं को जल्द दूर कर काम की रफ्तार बढ़ाना है.

जमीन और मंजूरियां बनी बड़ी चुनौती

मंत्रालय ने माना कि बड़े शहरी विकास प्रोजेक्ट्स में भूमि अधिग्रहण, स्थानीय आपत्तियां, विभिन्न विभागों से मंजूरी और एनओसी मिलने में देरी जैसी समस्याएं सामने आती हैं. केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकारों और शहरी निकायों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर रुकी हुई परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया.

CITIIS 2.0 और कचरा प्रबंधन पर भी चर्चा

समीक्षा बैठक में CITIIS 2.0 के तहत जलवायु अनुकूल शहरी विकास, स्टेट क्लाइमेट सेल्स की प्रगति और शहरों में चल रहे विकास कार्यों का भी आकलन किया गया. इसके अलावा बिलासपुर के लिए प्रस्तावित ठोस कचरा प्रबंधन योजना की समीक्षा की गई. इसमें वैज्ञानिक और टिकाऊ तरीके से कचरे के निस्तारण के उपायों पर चर्चा हुई.

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