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भारत-चीन सीमा विवाद सुलझाने की दिशा में बड़ी पहल, डोभाल-वांग यी वार्ता में LAC सीमांकन तेज करने पर सहमति | India And China Advance Border Talks To Strengthen Peace And Cooperation Along LAC



भारत और चीन के बीच दशकों पुराने सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में नया अपडेट है. मंगलवार (25 अगस्त 2026) को बीजिंग में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच विशेष प्रतिनिधियों (SR) के स्तर की 25वें दौर की उच्चस्तरीय वार्ता हुई. 

घंटों चली इस बैठक में दोनों देशों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े विवादित हिस्सों के सीमांकन को आगे बढ़ाने, सीमा पर शांति बनाए रखने और आपसी सहयोग का दायरा बढ़ाने पर अपनी सहमति जताई है.

यह बैठक इसलिए भी बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच तय हुए दिशा-निर्देशों के बाद यह बातचीत हुई है. इसके साथ ही, 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में होने जा रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले यह मुलाकात दोनों देशों के सुधरते रिश्तों की बड़ी तस्वीर पेश करती है. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात साल में पहली बार भारत दौरे पर आ सकते हैं.

कई घंटों तक चली रणनीतिक वार्ता

बीजिंग में हुई इस वार्ता में डोभाल और वांग यी ने काफी समय एक साथ बिताया. बातचीत की शुरुआत 90 मिनट से अधिक समय तक चली ‘स्मॉल ग्रुप’ बैठक से हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने बेहद विस्तृत चर्चा की. इसके बाद शाम को प्रतिनिधिमंडल स्तर की बड़ी बैठकें हुईं. इसी दिन एनएसए डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी शिष्टाचार मुलाकात की.

क्या-क्या बड़े फैसले और बातचीत हुई?

चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने सीमा का दायरा तय करने के लिए बातचीत को तेज करने, सीमा प्रबंधन और नियंत्रण को मजबूत करने तथा तंत्र निर्माण पर गहराई से चर्चा की. इसके अलावा, दोनों देशों ने साल 2005 में तय हुए ‘राजनीतिक मार्गदर्शक सिद्धांतों’ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. दोनों पक्ष आपसी सम्मान और समझ के साथ एक ऐसा समाधान निकालने पर सहमत हुए जो दोनों को स्वीकार्य हो.

हालांकि, दोनों देशों ने यह सार्वजनिक नहीं किया है कि LAC के किन विशेष हिस्सों पर सीमांकन की बात हो रही है, लेकिन पिछले साल की बैठक में कुछ तय इलाकों में ‘अर्ली हार्वेस्ट’ सीमांकन तलाशने के लिए एक वर्किंग ग्रुप बनाने पर सहमति बनी थी.

बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने अपने बयान में कहा कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने, सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिरता और शांति बनाए रखने तथा जल-संसाधनों जैसे अंतर-सीमा सहयोग को जारी रखने पर बल दिया.

रिश्ते सामान्य होने की दिशा में बड़ा कदम

डोभाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत-चीन संबंधों को एक स्पष्ट और सकारात्मक दिशा दी है, जिसके चलते रिश्ते लगातार सामान्य हो रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि आगामी ब्रिक्स सम्मेलन के मद्देनजर यह वार्ता काफी महत्वपूर्ण है.

वहीं, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि पिछले साल विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत फिर से शुरू होने के बाद से दोनों देशों के बीच संस्थागत तंत्र दोबारा बहाल हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए दोनों तरफ से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और पिछले एक साल में जो आम सहमति बनी थी, उसे जमीन पर लागू करने में अच्छी प्रगति हुई है.

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