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कंप्यूटर, पटवारी और कियोस्क संचालक: MP में एक झटके में छिन गई 50 एकड़ जमीन; PM किसान की किस्त से खुला राज | sagar kesli patwari kiosk scam 50 acre land fraud pm kisan 


कंप्यूटर, पटवारी और कियोस्क संचालक: MP में एक झटके में छिन गई 50 एकड़ जमीन; PM किसान की किस्त से खुला राज

sagar kesli patwari kiosk scam 50 acre land fraud pm kisan.

मध्‍य प्रदेश के सागर जिले की केसली तहसील से भूमि रिकॉर्ड में कथित फर्जीवाड़े का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. पटवारी को कंप्यूटर यूज करना नहीं आता था, ऐसे में काम के सिलसिले में उसने अपनी शासकीय आईडी और पासवर्ड एक कियोस्क संचालक को दे दिए. इसी आईडी का दुरुपयोग कर संचालक नेइ पटनाखुर्द और बम्हनी गांव के दर्जनों किसानों की करीब 50 एकड़ जमीन पठा गांव के रहने वाले एक व्यक्ति के नाम ऑनलाइन दर्ज कर दी.

मामला संबंधित हल्का पटवारी धीरज सिंह से जुड़ा है. इसका खुलासा उस समय हुआ, जब किसानों के खातों में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किस्त नहीं पहुंची. किसानों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर अपने रिकॉर्ड की जांच कराई तो उन्हें पता चला कि उनकी पुश्तैनी जमीन के ऑनलाइन रिकॉर्ड में नाम बदल गए हैं. इससे गुस्‍साए किसानों ने सामूहिक रूप से तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर जमीन का रिकॉर्ड सुधारने की मांग की. 

पटवारी की आईडी-पासवर्ड से हुई कथित गड़बड़ी

जानकारी के अनुसार, पटवारी को कंप्यूटर पर काम करने में परेशानी होती थी. आरोप है कि इसी कारण उन्होंने अपनी शासकीय लॉगिन आईडी और पासवर्ड निजी कियोस्क संचालक मोनू को दे रखे थे. बताया जाता है कि मोनू पहले तहसील के आईटी सेल में भी काम कर चुका था, जिसके चलते पटवारी ने उस पर भरोसा किया. आरोप है कि इसी लॉगिन का उपयोग कर मोनू ने पटनाखुर्द और बम्हनी गांव के किसानों की करीब 50 एकड़ भूमि पठा गांव निवासी ब्रजेन्द्र यादव, पिता भगवान सिंह यादव के नाम ऑनलाइन दर्ज कर दी गई. इस गड़बड़ी की जानकारी लंबे समय तक किसी को नहीं लगी. 

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सवा करोड़ रुपये के केसीसी लोन की साजिश का अंदेशा

प्रारंभिक जांच में इस पूरे मामले के पीछे बड़े आर्थिक फर्जीवाड़े की आशंका जताई जा रही है. बताया जा रहा है कि जमीन का रिकॉर्ड दूसरे व्यक्ति के नाम दर्ज कराने के बाद उसके आधार पर करीब सवा करोड़ रुपये का किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) लोन लेने की योजना बनाई गई थी. लोन मिलने के बाद जमीन को दोबारा मूल किसानों के नाम पर भी दर्ज किया जा सकता था. हालांकि, इस संबंध में जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

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पटवारी ने कियोस्क संचालक पर FIR की मांग की

पटवारी धीरज सिंह ने कियोस्क संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है. उनका कहना है कि उनकी आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग किया गया. मामला सामने आने के बाद तहसीलदार देवीप्रसाद चक्रवर्ती ने पटवारी की आईडी बंद कर दी है. प्रभावित किसानों की जमीन जल्‍द ही उनके नाम पर दर्ज करने का भरोसा दिया गया है. एसडीएम केसली द्वारा मामले की जांच की जा रही है. जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि जमीन के ऑनलाइन रिकॉर्ड में बदलाव कैसे हुआ और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही.

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