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Ground Report: तुकाराम मुंढे की सख्ती का असर! मुंबई के वड़ा पाव स्टॉल बदले, अब खाने के तेल पर FDA की नजर | Tukaram Mundhe strict measures Impact Mumbai Vada Pav stalls transformed 



मुंबई की पहचान सिर्फ उसकी लोकल ट्रेन और तेज रफ्तार जिंदगी से नहीं बल्कि वड़ा पाव से भी जुड़ी है. हर दिन लाखों लोग इस लोकप्रिय स्ट्रीट फूड का स्वाद लेते हैं. लेकिन अब स्वाद के साथ-साथ साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा भी चर्चा का विषय बन गई है. महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) की लगातार कार्रवाई का असर अब छोटे फूड स्टॉल्स और स्थानीय दुकानों तक पहुंचने लगा है.

वड़ा पाव दुकानों में दिखा हाइजीन का नया मॉडल

NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट में मुंबई के प्रसिद्ध सुरभि स्वीट्स में फूड हाइजीन को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिला. यहां काम करने वाले कर्मचारी ग्लव्स और हेड कैप पहनकर खाद्य पदार्थ तैयार कर रहे हैं. ग्राहकों को वड़ा पाव टिश्यू और पेपर प्लेट में परोसा जा रहा है.

सबसे बड़ा बदलाव किचन और स्टोरेज व्यवस्था में दिखाई दे रहा है. खाद्य सामग्री को व्यवस्थित तरीके से रखा जा रहा है और कोल्ड स्टोरेज पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. दुकान पर FSSAI लाइसेंस साफ तौर पर प्रदर्शित किया गया है. ग्राहकों को यह जानकारी भी दी जा रही है कि भोजन तैयार करने में ग्राउंडनट ऑयल का इस्तेमाल होता है.

दुकानदार बोले, नियमों का हो रहा पालन

सुरभि स्वीट्स के मैनेजर ललित शर्मा के अनुसार दुकान में फूड सेफ्टी के सभी जरूरी मानकों का पालन किया जा रहा है. उनका कहना है कि तलने में इस्तेमाल होने वाला तेल दिन में दो बार बदला जाता है. कर्मचारियों के लिए ग्लव्स और हेड कैप अनिवार्य कर दिए गए हैं ताकि भोजन की गुणवत्ता बनी रहे.

ग्राहकों ने की FDA की कार्रवाई की सराहना

मुंबई के कई ग्राहकों ने साफ-सफाई में आए बदलाव का स्वागत किया है. लोगों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है. कुछ ग्राहकों ने FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि बीमारी फैलने के बाद कदम उठाने के बजाय पहले से निगरानी रखना अधिक प्रभावी है.

FDA की कार्रवाई का असर यह भी दिखा है कि विभाग हर छोटे स्टॉल की रोजाना निगरानी भले न कर सके, लेकिन सख्ती का संदेश कारोबारियों तक पहुंच चुका है. इसी वजह से कई दुकानदार खुद ही अपनी व्यवस्था सुधार रहे हैं.

अब खाने के तेल पर FDA की विशेष नजर

रेस्टोरेंट्स, होटल्स और फूड आउटलेट्स पर कार्रवाई के बाद FDA ने अब खाने के तेल को अपने “सेफ फूड, सेफ महाराष्ट्र” अभियान का अगला बड़ा केंद्र बनाया है. FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने कहा है कि तेल के उत्पादन, पैकेजिंग, लाइसेंसिंग, वितरण, बिक्री और फूड बिजनेस में उसके उपयोग तक पूरी सप्लाई चेन की जांच की जाएगी.

खुले तेल से बचने की सलाह

FDA ने लोगों से खुले या बिना सील वाले खाद्य तेल खरीदने से बचने की अपील की है. विभाग का कहना है कि ऐसे तेल की गुणवत्ता और स्रोत का पता लगाना मुश्किल होता है. लोगों को बैच नंबर, निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट जांचकर ही तेल खरीदने की सलाह दी गई है.

बार-बार गर्म किए गए तेल पर कार्रवाई

FDA उन प्रतिष्ठानों पर भी विशेष नजर रख रहा है जहां तलने के लिए एक ही तेल को बार-बार गर्म किया जाता है. FSSAI नियमों के अनुसार तेल में Total Polar Compounds (TPC) की सीमा 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए. इससे अधिक होने पर उस तेल का उपयोग खाद्य पदार्थ बनाने में नहीं किया जा सकता.

कड़ी सजा की चेतावनी

FDA ने साफ किया है कि खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. गंभीर मामलों में सात साल से लेकर आजीवन कारावास और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है. विभाग के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में खाद्य तेल के 1,247 नमूने लिए गए, जिनमें 77 नमूने मानक से कम गुणवत्ता वाले पाए गए जबकि 15 मामलों में मिसब्रांडिंग सामने आई.

फूड सेफ्टी को आदत बनाना होगी असली चुनौती

मुंबई के वड़ा पाव स्टॉलों में दिख रहा बदलाव सकारात्मक संकेत है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि हाइजीन केवल कार्रवाई के डर से नहीं बल्कि रोजमर्रा की कार्य संस्कृति का हिस्सा बननी चाहिए. संदेश साफ है कि वड़ा पाव हो या खाना पकाने का तेल, स्वाद के साथ सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है.

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