

नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रदर्शन के दौरान पुलिस एक्शन पर सुनवाई के दौरान कहा कि हमें छात्रों के प्रोटेस्ट के अधिकार को भूलना नहीं चाहिए. कोर्ट ने कहा कि जो छात्र हैं उनके खिलाफ हम अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर एफआईआर रद्द कर सकते हैं. चीफ जस्टिस ने कहा कि पीड़ितों की शिकायतों और मामले की निगरानी के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा. CJI सूर्यकांत ने कहा कि पूर्व SC जज, पूर्व हाईकोर्ट CJ और DG स्तर के अधिकारी वाली हाई पार्वर्ड कमेटी गठित होगी. उन्होंने कहा कि इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश, हाईकोर्ट के एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश और महानिदेशक स्तर से सेवानिवृत्त एक अधिकारी शामिल होंगे. अदालत समिति को सभी जरूरी बुनियादी ढांचा और सुविधाएं उपलब्ध कराएगी. CJI ने कहा कि हमने दो पूर्व अफसरों के नाम चुने हैं. कोर्ट ने कहा कि फिलहाल हम नाम नहीं बताना चाहते हैं. CJI सूर्यकांत ने कहा कि कुछ मुद्दे ऐसे हैं जिन पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है. कुछ और मुद्दे हैं, जैसे गाइडलाइन और प्रोटोकॉल बनाना, जिन पर ज्यादा डिटेल में विचार करने की जरूरत है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो कल कमेटी के लिए आदेश जारी करेंगे.
‘छात्रों को प्रोटेस्ट का अधिकार’
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहन की पीठ में हुई सुनवाई. चीफ जस्टिस ने कहा कि जो छात्र हैं उनके खिलाफ हम अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर FIR रद्द कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि हमें छात्रों के प्रोटेस्ट के अधिकार को नहीं भूलना चाहिए. इसपर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कि हम भी चाहते हैं कि छात्रों के खिलाफ छात्रों के खिलाफ FIR रद्द हों. लेकिन कुछ गंभीर अपराधों मे शामिल रहे तत्व हैं उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रहनी चाहिए. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जिन प्रदर्शनकारियों के आपराधिक रिकॉर्ड में गंभीर अपराध के मुकदमे हों उनको छोड़कर बाकी के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर कोई दंडात्मक कार्रवाई ना की जाए. सॉलिसिटर जनरल ने भी सहमति जताते हुए कहा कि हत्या, रेप, पॉक्सो जैसे अपराध छोड़ कर.
अपराधिक रिकॉर्ड वाले की हो जांच
तुषार मेहता ने कहा कि 2,870 लोगों पर हत्या, रेप और डकैती जैसे केस हैं. इसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी के खिलाफ नहीं बल्कि आदतन अपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की जांच की जाए. जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल और याचिकाकर्ता की वकील वृंदा ग्रोवर दोनों ने अपनी बातें स्पष्टता से कह दी हैं. अब आगे की कार्यवाही तय कर ली जाए.
प्रदर्शनकारियों में निर्दोष छात्र भी थे- CJI
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पुलिस ने 2873 लोगों की पहचान की है जिनके आपराधिक रिकॉर्ड हैं. चीफ जस्टिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों में निर्दोष छात्र भी थे. उन्होंने अपना भविष्य बनाने के लिए जीतोड़ मेहनत की है. उनके अभिभावकों ने अपनी जीतोड़ मेहनत और खून पसीने की कमाई उनकी पढ़ाई में लगाई है. याचिकाकर्ताओं के वकील रिजवान अहमद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट परिसर में उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. घायल पुलिस वालों की वकील ने भी अपनी बात कही कि पुलिस पर पथराव किया गया. सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि तीन सौ के करीब पुलिस वाले घायल हुए. SG तुषार मेहता ने कहा कि 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए है.
हाईपावर कमिटी बना रहे हैं- CJI
सुप्रीम कोर्ट ने जहां कि हमने इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए पूर्व जजों और डीजीपी स्तर के पूर्व पुलिस अधिकारियों की देखरेख में हाईपावर कमेटी बना रहे हैं. इस पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्णायक जांच करेगी. एक याचिकाकर्ता ने कहा कि पूर्व सैनिक की पत्नी सुदेश को भी प्रताड़ित किया गया. CJI सूर्यकांत ने कहा कि छात्र शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल थे. उन्होंने कहा कि छात्रों की प्रतिबद्धता यह थी कि वे कुछ मुद्दों को लेकर कानून के दायरे में और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना चाहते थे. छात्रों के प्रदर्शन को उनके उद्देश्य और तरीके के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. छात्रों का इरादा कुछ मुद्दों के खिलाफ कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाना था.





