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PM मोदी ने 7 शक्तियों को क्यों कहा ‘सप्तधारा’? सनातन परंपरा में छिपा है इस शब्द का गहरा अर्थ


PM Modi Sapt Dhara: लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात क्षेत्रों का नाम लेकर अपनी बात खत्म कर सकते थे. लेकिन उन्होंने इनके लिए एक खास शब्द चुना, ‘शक्ति की सप्तधारा’. यह शब्द सुनते ही सप्तऋषि, सप्तपदी, सप्तलोक और सूर्य के सात अश्व जैसी भारतीय मान्यताएं याद आती हैं. ऐसे में सवाल है कि पीएम मोदी ने सात शक्तियों को ‘सप्तधारा’ क्यों कहा? क्या इसका संबंध भारतीय धर्म और दर्शन से भी है?

सप्तधारा का आसान अर्थ है, सात धाराओं का एक साथ प्रवाहित होना. जैसे अलग-अलग दिशाओं से आने वाली नदियां मिलकर विशाल प्रवाह बनाती हैं, उसी तरह सात क्षेत्रों की शक्ति मिलकर किसी राष्ट्र को आगे बढ़ाती है. प्रधानमंत्री के भाषण में इस शब्द का इस्तेमाल भारत की सामूहिक ताकत को दिखाने वाले प्रतीक के रूप में सामने आया.

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पीएम मोदी की ‘सप्तधारा’ में कौन-सी 7 शक्तियां?

पीएम मोदी ने भारत के विकास के लिए सात प्रमुख शक्तियों का उल्लेख किया. इनमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और खाद्य उत्पादन, टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन, गति शक्ति, रक्षा शक्ति, ग्रीन एवं ब्लू इकोनॉमी और भारत की सॉफ्ट पावर शामिल हैं.

मैन्युफैक्चरिंग भारत को दुनिया का बड़ा निर्माण केंद्र बना सकती है. कृषि और खाद्य उत्पादन देश की मूल ताकत है. टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन भविष्य की जरूरत हैं. गति शक्ति देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करती है. रक्षा शक्ति सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से जुड़ी है. ग्रीन एवं ब्लू इकोनॉमी प्रकृति और समुद्री संसाधनों के संतुलित इस्तेमाल की ओर संकेत करती है. वहीं सॉफ्ट पावर योग, संस्कृति, अध्यात्म और भारतीय जीवन मूल्यों को दुनिया से जोड़ती है.

केवल ‘सात शक्तियां’ नहीं, ‘सप्तधारा’ क्यों?

‘सात शक्तियां’ कहना केवल उनकी संख्या बताता. लेकिन ‘सप्तधारा’ शब्द संख्या के साथ उनकी गति और आपसी संबंध को भी दिखाता है. धारा कभी स्थिर नहीं रहती. वह लगातार आगे बढ़ती है और अपने आसपास जीवन पैदा करती है.

यही बात इन सात क्षेत्रों पर भी लागू होती है. खेती मजबूत होगी तो खाद्य प्रसंस्करण और उद्योग को सहारा मिलेगा. टेक्नोलॉजी बढ़ेगी तो खेती, रक्षा और मैन्युफैक्चरिंग आधुनिक होंगे. बेहतर बुनियादी ढांचा इन सभी को गति देगा. इस तरह कोई भी धारा अकेली नहीं चलती. सभी एक-दूसरे को शक्ति देती हैं.

भारतीय धर्म-दर्शन में ‘सात’ क्यों है खास?

‘शक्ति की सप्तधारा’ किसी धर्मग्रंथ में लिखी कोई तय अवधारणा नहीं है. इसे प्रधानमंत्री द्वारा सात विकास क्षेत्रों के लिए इस्तेमाल किया गया आधुनिक रूपक समझना चाहिए. फिर भी, इस शब्द की जड़ें भारतीय सांस्कृतिक भाषा और प्रतीकों में दिखाई देती हैं.

भारतीय परंपरा में सात का अंक पूर्णता और संतुलन से जुड़ा है. सप्तऋषि ज्ञान की निरंतर परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं. विवाह में सप्तपदी के सात कदम दो लोगों के पूरे जीवन के सात संकल्प माने जाते हैं. संगीत के सात स्वर मिलकर असंख्य राग बनाते हैं. योग परंपरा में सात प्रमुख चक्र चेतना के अलग-अलग स्तरों से जुड़े माने गए हैं.

इसी तरह सूर्यदेव के रथ के सात अश्व गति, ऊर्जा और प्रकाश के प्रतीक माने जाते हैं. पौराणिक साहित्य में सप्तलोक, सप्तद्वीप और सप्तसिंधु का उल्लेख भी मिलता है. इन सभी में एक साझा भाव दिखाई देता है, अलग-अलग शक्तियों के मेल से संपूर्णता का निर्माण.

सप्तधारा में नदी जैसा संदेश

भारतीय संस्कृति में नदी केवल पानी की धारा नहीं है. वह जीवन, निरंतरता और सभ्यता की प्रतीक भी है. धारा का रुकना ठहराव माना जाता है, जबकि उसका बहते रहना प्रगति और जीवन का संकेत है.

पीएम मोदी की सप्तधारा को भी इसी अर्थ में समझा जा सकता है. भारत का विकास केवल फैक्ट्रियों, खेती या रक्षा के बल पर पूरा नहीं होगा. तकनीक, पर्यावरण, आधारभूत ढांचे और संस्कृति को भी उसी गति से आगे बढ़ना होगा.

हालांकि, प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में इसे सीधे किसी धार्मिक मान्यता से नहीं जोड़ा. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि ‘सप्तधारा’ किसी धर्मग्रंथ से ली गई योजना है. लेकिन शब्द का चुनाव भारतीय सांस्कृतिक चेतना के बहुत करीब जरूर दिखाई देता है.

सप्तऋषि ज्ञान की सात दिशाओं को जोड़ते हैं, सप्तपदी जीवन के सात संकल्पों को और सप्तस्वर संगीत की सात आवाजों को. उसी तरह प्रधानमंत्री की ‘शक्ति की सप्तधारा’ भारत की सात क्षमताओं को एक राष्ट्रीय संकल्प में जोड़ती है. इसका सीधा संदेश है, जब विकास की सातों धाराएं एक साथ और एक दिशा में बहेंगी, तभी विकसित भारत का विशाल प्रवाह बनेगा.

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