
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रहण जहां दिखाई देता है वहां रहने वाले लोगों पर इसका असर देखने को मिलता है. 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या पर सूर्य ग्रहण यूरोप के अधिकतर देशों, उत्तर-पश्चिम अफ्रीका के देशों, कनाडा, रूस के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में दिखेगा, भारत में द्श्यमान नहीं होगा.

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण में प्रेग्नेंट महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने को कहा जाता है, ताकि बच्चे और मां पर बुरा असर न पड़े लेकिन इस दौरान अगर किसी बच्चे का जन्म हो तो क्या उस पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है, ज्योतिष और वैज्ञानिक तर्क क्या है जान लें.

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र की परंपरा के अनुसार ग्रहणकाल में जन्म को चुनौतीपूर्ण माना गया है. इस ग्रंथ के अध्याय 91 में बताए श्लोक में लिखा है – सूर्येन्दुग्रहणे काले येषां जन्म भवेद् द्विज। व्याधिः कष्टं च दारिद्र्यं तेषां मृत्युभयं भवेत्॥ अर्थात ग्रहणकालीन जन्म को स्वास्थ्य संबंधी कष्ट, जीवन में संघर्ष और आर्थिक कठिनाइयों की आशंका से जोड़ा गया है.

वैदिक ज्योतिष में सूर्य को आत्मा, तेज, आत्मविश्वास, पिता, प्रतिष्ठा और जीवन-शक्ति का कारक माना जाता है.ग्रहण के समय सूर्य की स्थिति राहु से प्रभावित मानी जाती है. इसलिए ज्योतिषीय दृष्टि से ऐसे जन्म में सूर्य की स्थिति, राहु की स्थिति और दोनों के बीच की डिग्री दूरी को विशेष रूप से देखा जाता है.

सूर्य ग्रहण में जन्म होने पर सूर्य की प्रतिमा और राहु की प्रतिमा, शांति पूजा आदि का उल्लेख मिलता है. इसके जरिए ग्रहण-सम्बंधी दोष निवारण किया जा सकता है.

वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है इसका जन्म और मृत्यु पर असर नहीं होता.ज्योतिषीय ग्रंथ में भी ग्रहणकालीन जन्म को विशेष मानकर शांति-विधान बताए हैं, लेकिन बच्चे का पूरा भविष्य सिर्फ ग्रहण के समय जन्म नहीं बल्कि उसकी पूरी कुंडली पर आधारित होता है.
Published at : 12 Aug 2026 07:26 AM (IST)

