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कैश कांड: जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लोकसभा में पेश होगी जांच रिपोर्ट | Cash scandal Probe report against Justice Yashwant Varma to be tabled in Lok Sabha



दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच रिपोर्ट बुधवार को लोक सभा में पेश होगी. जांच समिति ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे आरोपों की जांच की है.पिछले साल मार्च में उनके सरकारी घर से जले हुए नोट मिले थे. इसके बाद उनका तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया था.

हालांकि उन्होंने अपने पद से इस साल नौ अप्रैल को इस्तीफ़ा दिया था, लेकिन राष्ट्रपति ने स्वीकार नहीं किया. उनका नाम इलाहाबाद हाई कोर्ट में लिस्टेड है.यह अलग बात है कि 200 से अधिक सांसदों ने उन्हें हटाने की याचिका स्पीकर को दी थी.स्पीकर ने भी तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था.

इसी समिति की रिपोर्ट बुधवार को पेश होगी. जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्हें हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है. हालाँकि यह बहस चल रही है कि इस्तीफ़ा देने के बावजूद भी क्या देश की संसद उन्हें हटा सकती है? यह अपनी तरह का पहला मामला है.

कौन हैं जस्टिस यशवंत वर्मा? 

जस्टिस वर्मा का जन्म 6 जनवरी 1969 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुआ था. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से बीकॉम (ऑनर्स) और मध्य प्रदेश के रीवा विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की. 8 अगस्त 1992 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में उन्होंने वकालत की शुरुआत की. 2006 से लेकर जज बनने तक वह इलाहाबाद हाई कोर्ट में वकालत करते रहे. बाद में उनकी नियुक्ति इलाहाबाद हाई कोर्ट में अतिरिक्त जज के रूप में अक्टूबर 2014 में हुई और फरवरी 2016 में वह स्थायी जज बने. अक्टूबर 2021 में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट में स्थानांतरित किया गया.

गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट के जज रहते वक्त जस्टिस वर्मा घर से बड़ी मात्रा में कैश मिला था. कैश का कुछ हिस्सा तो जला हुआ था. इसके बाद इस मामले में काफी तूल पकड़ा था. संसद में जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव चल रहा था. 

15 मार्च को शुरू हुआ था विवाद 

यह विवाद तब शुरू हुआ था जब 15 मार्च को जस्टिस यशवंत वर्मा के उनके दिल्ली स्थित आवास पर बड़ी संख्या में जले हुए नोट मिले थे. इसके बाद उनका ट्रांसफर इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया.





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