

बैंकों से हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने दीपक केबल (इंडिया) लिमिटेड (DCIL) और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की है. इस मामले में कंपनियों और उनके पदाधिकारियों समेत कुल 11 आरोपियों को नामजद किया गया है.
31 जुलाई को कोर्ट में दाखिल की गई शिकायत
ईडी के बेंगलुरु जोनल कार्यालय ने 31 जुलाई 2026 को बेंगलुरु की प्रधान सिटी सिविल एवं सेशन कोर्ट में अभियोजन शिकायत दाखिल की. एजेंसी का आरोप है कि कंपनी के पूर्व प्रबंध निदेशक के. वेंकटेश्वरा राव और अन्य संबंधित लोगों ने बैंकों से कर्ज हासिल करने के लिए कंपनी की वित्तीय स्थिति को वास्तविकता से बेहतर दिखाया.
SBI और PNB को हुआ भारी नुकसान
ईडी की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी. एसबीआई की शिकायत के अनुसार कंपनी और उसके तत्कालीन अधिकारियों की गतिविधियों से बैंक को लगभग 899.35 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. इसमें ब्याज और कानूनी खर्च भी शामिल हैं.
वहीं पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने भी अलग शिकायत दर्ज कराई थी. बैंक का आरोप है कि इस मामले में करीब 147.93 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन का नुकसान हुआ. इसके बाद ईडी ने इस मामले को भी अपनी जांच में शामिल कर लिया.
कागजों पर दिखाए गए कारोबार के आरोप
जांच के दौरान ईडी को जानकारी मिली कि डीसीआईएल एल्युमिनियम कंडक्टर और बिजली ट्रांसमिशन से जुड़े कारोबार में सक्रिय थी. आरोप है कि कंपनी ने बैंकों के समूह से अधिक कर्ज और क्रेडिट सुविधाएं हासिल करने के लिए अपने कारोबार और वित्तीय रिकॉर्ड को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया.
एजेंसी के मुताबिक कंपनी ने कुछ संबंधित और अन्य कंपनियों के साथ कथित तौर पर फर्जी खरीद और बिक्री के सौदे भी किए. इन लेन-देन में वास्तव में किसी सामान की आवाजाही नहीं हुई लेकिन दस्तावेजों में कारोबार दिखाया गया.
पैसों के दुरुपयोग का आरोप
ईडी का दावा है कि फर्जी लेन-देन के जरिए जुटाई गई रकम को विभिन्न खातों में स्थानांतरित किया गया. जांच में सामने आया कि धनराशि का इस्तेमाल प्रमोटरों और निदेशकों के निजी खातों में पैसे भेजने के लिए किया गया.
इसके अलावा संबंधित कंपनियों के खातों में भी रकम ट्रांसफर की गई. एजेंसी के अनुसार इसी धन से कई अचल संपत्तियां खरीदी गईं और निजी इक्विटी निवेशकों के शेयर वापस खरीदने में भी पैसा लगाया गया.
51.28 करोड़ की संपत्तियां अटैच
मामले में ईडी ने 30 जुलाई 2026 को प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी करते हुए करीब 51.28 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं. इनमें आरोपियों के नाम पर दर्ज कई अचल संपत्तियां शामिल हैं. हालांकि इस कार्रवाई की अंतिम पुष्टि अभी नई दिल्ली स्थित पीएमएलए की निर्णायक प्राधिकरण के समक्ष लंबित है.
पूर्व एमडी न्यायिक हिरासत में
ईडी ने कंपनी के पूर्व प्रबंध निदेशक के. वेंकटेश्वरा राव को 2 जून 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया था. फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं. एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे भी नए तथ्य सामने आने पर कार्रवाई की जा सकती है.
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