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फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी…दिल्ली में जन्म, अब सुप्रीम कोर्ट ऑफ जाम्बिया की जज, कहानी जस्टिस आभा नायर पटेल की | NDTV Exclusive Interview Who is Justice Abha Nayar Patel Supreme Court of Zambia Indian Origin Judge Success Story constitution judiciary


नई दिल्ली:

सात साल की उम्र में दिल्ली छोड़कर विदेश चली गई एक बच्ची आज जाम्बिया के सुप्रीम कोर्ट की जज है. लेकिन दशकों बाद भी उसकी आवाज में हिंदी की मिठास, भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान और अपने देश के लिए वही अपनापन बना हुआ है. जाम्बिया सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस आभा नायर पटेल इन दिनों भारत दौरे पर हैं. NDTV से विशेष बातचीत में उन्होंने भारतीय संविधान, न्यायपालिका और अपने निजी जीवन से जुड़े कई अनुभव साझा किए. उन्होंने कहा कि भले ही उन्होंने बचपन में भारत छोड़ दिया हो, लेकिन भारत आज भी उनके दिल में बसता है. भारतीय संविधान और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों को उन्होंने पूरी दुनिया के लिए सीख का स्रोत बताया.

दिल्ली से जाम्बिया तक का सफर, लेकिन भारत से कभी नहीं टूटा रिश्ता

जस्टिस आभा नायर पटेल जब सात साल की थीं तब उनका परिवार भारत छोड़कर विदेश चला गया था. आज कई दशक बीत जाने के बाद भी हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति से उनका जुड़ाव कायम है. NDTV से बातचीत में उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि विदेशों में रहने वाले अधिकांश भारतीय हिंदी बोलते हैं. कोई अच्छी हिंदी बोलता है, कोई कम अच्छी, लेकिन भाषा और संस्कृति से रिश्ता बना रहता है. उन्होंने कहा, “मैं दिल्ली से सात साल की उम्र में गई थी. बहुत साल हो गए हैं, लेकिन हिंदी आज भी बोलती हूं. बाद में मेरी शादी गुजराती परिवार में हुई तो गुजराती भी सीख ली. इसलिए लोग अक्सर पूछते हैं कि ‘नायर पटेल’ नाम के पीछे आखिर कौन-सा बैकग्राउंड है.” जस्टिस आभा नायर पटेल ने कहा,  भारत छोड़ने के कई वर्ष बाद भी उनका भावनात्मक जुड़ाव देश से बना हुआ है.

Justice Abha Nayar Patel: जस्टिस आभा नायर पटेल

Justice Abha Nayar Patel: जस्टिस आभा नायर पटेल

भारत में मिला सम्मान मेरे जीवन का स्वर्णिम क्षण : जस्टिस पटेल

भारत दौरे के दौरान जस्टिस पटेल को सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ऑडिटोरियम में आयोजित “फ्यूचर ऑफ जस्टिस डिलीवरी: इनोवेशन, इंक्लूजन एंड इंटीग्रिटी” विषयक व्याख्यान में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस वी. मोहना और जस्टिस पी.बी. वराले भी मौजूद थे.

इस सम्मान को याद करते हुए जस्टिस पटेल भावुक हो गईं. उन्होंने कहा कि भारत में जिस आत्मीयता और सम्मान के साथ उनका स्वागत हुआ, वह उनकी कल्पना से भी अधिक था.

उन्होंने कहा, “किसी दूसरे देश के जज को भारत में जिस सम्मान के साथ स्वीकार किया गया, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जिस प्रकार मुझे सुप्रीम कोर्ट के मंच और पीठ पर स्थान दिया, यह मेरे जीवन का एक ऐसा स्वर्णिम क्षण है. इसे मैं कभी भूल नहीं सकती. यह अनुभूति मेरे हृदय की गहराइयों को छू गई है. भले ही हमें भारत छोड़े कई दशक बीत चुके हैं, परंतु भारत हमारे दिलों से कभी अलग नहीं हो सकता. भाषा, खान-पान, संस्कृति और धार्मिक परंपराएं, दुनिया के किसी भी कोने में बसे भारतीय अपनी सांस्कृतिक जड़ों और विरासत को सदैव जीवंत रखते हैं.” 

भारतीय संविधान के बिना विधिशास्त्र अधूरा, न्यायपालिका दुनिया के लिए उदाहरण

जस्टिस आभा नायर पटेल ने भारतीय संविधान और न्यायिक व्यवस्था की खुलकर सराहना की. उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में कानून की पढ़ाई करने वाले छात्र भारतीय संवैधानिक कानून का अध्ययन करते हैं. उनके अनुसार भारतीय संविधान केवल भारत का नहीं, बल्कि वैश्विक विधिक समुदाय के लिए भी एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है.

उन्होंने कहा, “भारतीय संवैधानिक कानून का अध्ययन किए बिना विधिशास्त्र (Law) की पढ़ाई पूरी नहीं मानी जा सकती. भारतीय संविधान और सुप्रीम कोर्ट के फैसले दुनिया भर के कानून के छात्रों और न्यायिक अधिकारियों के लिए अध्ययन का विषय हैं.” 

उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास और उसकी कानूनी परंपरा विश्वभर में प्रतिष्ठित है. उन्होंने बताया कि विदेश में रहने के बावजूद उन्होंने भी भारतीय संवैधानिक कानून का अध्ययन किया है और यह कानूनी शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार है. भारतीय न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर बात करते हुए जस्टिस पटेल ने कहा कि विभिन्न देशों के बीच न्यायिक अनुभवों का आदान-प्रदान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि सभी न्याय प्रणालियों का साझा उद्देश्य त्वरित, प्रभावी और निष्पक्ष न्याय उपलब्ध कराना है. जस्टिस पटेल ने आगे कहा कि इतनी विशाल जनसंख्या वाले देश में भारतीय न्यायपालिका की प्रगति और कार्यक्षमता सराहनीय है तथा इसे देखकर अन्य देशों को भी सीखने की प्रेरणा मिलती है.

AI के दौर में बढ़ गई न्यायपालिका की जिम्मेदारी

बदलती तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव पर भी जस्टिस पटेल ने अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि तकनीक न्याय व्यवस्था को बेहतर बना सकती है, लेकिन इसके साथ न्यायपालिका, वकीलों और अन्य हितधारकों की जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं. जस्टिस पटेल का मानना है कि जजों और वकीलों का सबसे बड़ा दायित्व संविधान की रक्षा करना और न्याय व्यवस्था में लोगों का विश्वास बनाए रखना है. न्याय का वास्तविक उद्देश्य हर व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के समान न्याय उपलब्ध कराना है.

Justice Abha Nayar Patel: सुप्रीम कोर्ट जाम्बिया की जज आभा नायर पटेल

Justice Abha Nayar Patel: सुप्रीम कोर्ट जाम्बिया की जज आभा नायर पटेल

कानून के क्षेत्र में शानदार हैं जस्टिस आभा नायर पटेल की उपलब्धियां

जस्टिस आभा नायर पटेल का कानूनी सफर भी बेहद प्रेरणादायक रहा है. उन्होंने 1987 में यूनिवर्सिटी ऑफ जाम्बिया से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की और विश्वविद्यालय में विशिष्ट श्रेणी के साथ स्नातक करने वाली पहली महिला छात्रा बनीं. इसके बाद उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से एलएलएम की डिग्री हासिल की. वर्ष 1989 में जाम्बिया बार में नामांकित होने के बाद उन्होंने वकालत शुरू की.

साल 2008 में उन्हें इंग्लैंड और वेल्स के सुप्रीम कोर्ट के रोल ऑफ सॉलिसिटर्स में भी शामिल किया गया, जिसके बाद उन्हें वहां सॉलिसिटर के रूप में मान्यता मिली.

न्यायिक सेवाओं के अलावा जस्टिस पटेल ने वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR), मध्यस्थता और आर्बिट्रेशन के क्षेत्र में भी विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है. वह एक प्रशिक्षित मध्यस्थ, मध्यस्थों की प्रशिक्षक और चार्टर्ड इंस्टीट्यूट ऑफ आर्बिट्रेटर्स की फेलो भी हैं.

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