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सोन पापड़ी में पिस्ता नहीं, हरे रंग से रंगी हुई मूंगफली; फैक्ट्री में चल रहा गजब का खेल | Food Safety Department Raid on a Soan Papdi factory in Ajmer ahead of festive season


त्योहार के समय सोन पापड़ी (Soan Papdi) की मार्केट में भारी डिमांड होती है. दीपावली पर तो खास करके. लोग इसे बड़े चाव से खाते भी हैं. पर जो सोन पापड़ी (सोहन पापड़ी) भारतीय लोगों में इतनी लोकप्रिय है. दीपावली के समय ऑफिस से लेकर रिश्तेदारों में सोहन पापड़ी का डिब्बा बांटा जाता है. वह बनती कैसे है और उसमें कितनी शुद्धता होती है. राजस्थान के अजमेर में जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने सोन पापड़ी बनाने वाली एक फैक्ट्री में छापा मारा. जिसके बाद जो सच्चाई सामने आई है, वह हैरान कर देने वाली है.

पिस्ता की जगह मूंगफली

सोन पापड़ी में पिस्ता कटिंग के नाम पर हरे रंग से रंगी हुई मूंगफली मिलाई जा रही थी. साथ ही सोन पपड़ी में भारी मात्रा में खाद्य रंगों का उपयोग किया जा रहा था. यह खुलासा सोमवार को खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की छापेमारी में हुआ है. अधिकारियों ने बताया कि सोमलपुर-ब्यावर रोड स्थित मैसर्स मुस्कान सोन पापड़ी निर्माण फैक्ट्री में काफी गंदगी मिली.

फैक्ट्री परिसर में भिनभिना रही थीं मक्खियां

फैक्ट्री परिसर में चारों ओर मक्खियां भिनभिना रही थीं और खाद्य पदार्थ खुले में रखे हुए थे. जांच में यह भी सामने आया कि फैक्ट्री बिना आवश्यक निर्माण श्रेणी के फूड लाइसेंस के संचालित की जा रही थी. अधिकारियों ने मौके से सोन पपड़ी के दो नमूने लेकर जांच के लिए भेजे और लगभग 2000 किलो तैयार सोन पापड़ी को सीज कर दिया.

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कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने पाया कि सोन पापड़ी में भारी मात्रा में खाद्य रंगों का उपयोग किया जा रहा था. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पिस्ता कटिंग के नाम पर हरे रंग से रंगी हुई मूंगफली मिलाई जा रही थी, जिसे खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मौके पर ही नष्ट करवा दिया. खाद्य कारोबारी शाहबाज पुत्र यासीन ने बताया कि सोन पापड़ी रिफाइंड पामोलिन तेल और वनस्पति मिलाकर तैयार की जा रही थी.

अधिकारियों ने बंद करवाया फैक्ट्री में काम

जांच में यह भी सामने आया कि उसके पास केवल होलसेल श्रेणी का लाइसेंस था, जबकि निर्माण इकाई के संचालन के लिए अलग खाद्य अनुज्ञा पत्र आवश्यक है. अधिकारियों ने फैक्ट्री में सोन पापड़ी बनाने का काम तुरंत प्रभाव से बंद कराने के निर्देश दिए. विभाग ने स्पष्ट किया कि खाद्य नमूनों की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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