

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बीते पांच महीनों से छिड़ी भीषण जंग के बीच मिडिल ईस्ट से होर्मुज को लेकर नई खबर आई है. ओमान ने हॉर्मुज को लेकर एक नया फॉर्मूला पेश किया है. इसे खाड़ी देशों का समर्थन मिल गया है. इस योजना के तहत ईरान को हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से ‘ऐच्छिक शुल्क’ वसूलने की अनुमति देने का प्रस्ताव है. माना जा रहा है कि इस फॉर्मूले से वैश्विक तेल व्यापार पर मंडरा रहा बड़ा संकट टल सकता है.
क्या है ओमान का यह ‘मलक्का मॉडल’?
रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया, ओमान का यह नया प्रस्ताव एशिया के ‘मलक्का स्ट्रेट’ के मॉडल पर आधारित है. जिस तरह इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर मलक्का में जहाजों से नेविगेशन, पर्यावरण सुरक्षा और सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए स्वैच्छिक योगदान लेते हैं, ठीक वैसा ही ढांचा हॉर्मुज में भी लागू करने की योजना है.
इस व्यवस्था में ईरान का हॉर्मुज जलमार्ग पर एकतरफा या एकाधिकार नियंत्रण नहीं रहेगा, बल्कि यह एक साझा और स्वैच्छिक प्रक्रिया होगी. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को ओमान और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों के साथ बातचीत के दौरान हॉर्मुज को लेकर क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है.
हॉर्मुज की नाकाबंदी से क्यों थमी दुनिया?
28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे, उसके बाद ईरान ने हॉर्मुज को अपने जहाजों को छोड़कर बाकी सभी के लिए बंद कर दिया था.
ईरान का कहना है कि वह ओमान (जो हॉर्मुज के दूसरे छोर पर है) के साथ मिलकर इस जलमार्ग का प्रबंधन करना चाहता है और सर्विस फीस लेना चाहता है. वहीं, अमेरिका चाहता है कि युद्ध से पहले वाली स्थिति बहाल हो, जहां जहाज बिना कोई टैक्स दिए स्वतंत्र रूप से आवाजाही कर सकें. अमेरिका का तर्क है कि अनिवार्य फीस वसूलना गैर-कानूनी है.
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