

Nandan Nilekani Education Qualification: केंद्र सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शाम तक नए शिक्षा मंत्री प्रह्वाद जोशी (Pralhad Joshi) होंगे, इसका एलान कर दिया. और आज टास्क फोर्स की अध्यक्षता टेक की दुनिया के दिग्गज नंदन नीलेकणी करेंगे इसकी भी घोषणा कर दी. बता दें कि मोदी सरकार के हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की कमान संभालने वाले नंदन नीलेकणी सिर्फ एक सक्सेसफुल इंडस्ट्रियलिस्ट ही नहीं, बल्कि भारत के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक IIT बॉम्बे के अलुमनाई (Alumni) भी हैं. जी हां. ऐसे में इन्फोसिस के को-फाउंडर और आधार परियोजना के प्रमुख चेहरों में शामिल नीलेकणी की एजुकेशनल जर्नी कैसी रही, आइए एक नजर उस पर डालते हैं…
धारवाड़ के स्कूल से IIT बॉम्बे तक का सफर
1955 में बेंगलुरु में जन्मे नंदन नीलेकणी की शुरुआती शिक्षा कर्नाटक के धारवाड़ से हुई. इसके बाद वे देश के सबसे प्रतिष्ठित टेक्निकल इंस्टीट्यूट आईआईटी (IIT) बॉम्बे पहुंचे, जहां से उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की.
2002 से 2007 तक इंफोसिस के CEO
पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत पटनी कंप्यूटर सिस्टम्स (Patni Computer Systems) से की, जहां उनकी मुलाकात एन. आर. नारायण मूर्ति (N. R. Narayana Murthy) से हुई. 1981 में, नीलेकणी ने नारायण मूर्ति और 5 अन्य साथियों के साथ मिलकर इंफोसिस (Infosys) की नींव रखी, जो आज दुनिया की दिग्गज IT कंपनियों में शुमार है. इन्होंने 2002 से 2007 तक चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफसर (CEO) के तौर पर काम किया. बता दें कि 2002 में CEO का पद संभालने से पहले, उन्होंने मैनेजिंग डायरेक्टर, प्रेसिडेंट और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर जैसे अलग-अलग पदों पर काम किया था.
UIDAI के पहले अध्यक्ष
वहीं, साल 2009 में, तत्कालीन UPA सरकार ने उन्हें UIDAI (Unique Identification Authority of India) का पहला अध्यक्ष बनाया. इस दौरान उन्होंने भारत में बायोमेट्रिक पहचान कार्यक्रम आधार को पूरे देश में लागू कराने का नेतृत्व किया. फिर वे 2017 में नॉन एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में दोबारा इंफोसिस में लौटे.
और अब धारवाड़ और IIT बॉम्बे से निकला यह टेक-दिग्गज देश की एजुकेशन सिस्टम को लीक-प्रूफ और मजबूत बनाने की कमान संभालेगा.
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