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हौज रानी होटल अग्निकांड: आग से एक दिन पहले मिला लाइसेंस, जांच में MCD, पुलिस और BSES की बड़ी लापरवाही उजागर | Hauz Rani Hotel Fire License obtained day before blaze investigation reveals major negligence MCD Police and BSES 



दिल्ली के हौज रानी स्थित होटल फ्लोरिश स्टेज में 3 जून को लगी भीषण आग में 23 लोगों की मौत हुई थी. अब इस मामले की 110 से अधिक पन्नों की मजिस्ट्रेट जांच रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं. रिपोर्ट के अनुसार जिस इमारत में होटल चल रहा था, वह पहले ही अवैध निर्माण के मामलों में दो बार बुक हो चुकी थी. इसके बावजूद न तो निर्माण प्रभावी रूप से रोका गया और न ही अवैध हिस्सों पर सख्त कार्रवाई हुई.

आग से एक दिन पहले मिला लाइसेंस 

जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि होटल का हेल्थ ट्रेड लाइसेंस आग लगने से सिर्फ एक दिन पहले यानी 2 जून को मंजूर किया गया था. आवेदन जनवरी 2026 में किया गया था और मई में निरीक्षण भी हो चुका था. इसके बावजूद निरीक्षण रिपोर्ट करीब 19 दिन तक लंबित रही और फिर अचानक लाइसेंस मंजूर कर दिया गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि देरी का कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया. साथ ही निरीक्षण अधिकारी पर यह आरोप भी लगाया गया कि उन्होंने परिसर में पूरे रेस्तरां के संचालन की जानकारी रिपोर्ट में दर्ज नहीं की.

अवैध निर्माण पर कार्रवाई कागजों तक सीमित रही

होटल की इमारत को 2019 और 2020 में अवैध निर्माण के मामले में चिन्हित किया गया था. ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई भी प्रस्तावित हुई थी, लेकिन जांच के अनुसार अधिकांश कार्रवाई सरकारी रिकॉर्ड तक ही सीमित रही. मौके पर अवैध हिस्सों को न तो पूरी तरह सील किया गया और न ही हटाया गया.

रिपोर्ट में कुछ अधिकारियों पर रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर छिपाने के आरोप भी लगाए गए हैं. जांच में मालिक और कुछ कर्मचारियों के बीच संभावित मिलीभगत की आशंका भी जताई गई है.

पुलिस और बिजली कंपनी की भूमिका पर भी सवाल

मजिस्ट्रेट जांच रिपोर्ट के अनुसार MCD ने पुलिस को निर्माण कार्य रुकवाने और संबंधित एजेंसियों को कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे. इसके बावजूद निर्माण जारी रहा. रिपोर्ट में मालवीय नगर पुलिस पर आदेशों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं करने का आरोप लगाया गया है. वहीं BSES को अवैध हिस्सों की बिजली काटने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन बिजली आपूर्ति जारी रही. जांच में कहा गया कि बिजली काटने के लिए अतिरिक्त कार्रवाई का इंतजार जरूरी नहीं था.

फायर NOC के बिना चल रहा था होटल

होटल को अप्रैल 2026 में बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना के तहत पंजीकरण मिला था. जांच में सामने आया कि नियमों के अनुसार कमरों की संख्या और अन्य मानकों का पालन नहीं किया गया. रिपोर्ट के अनुसार होटल के पास फायर एनओसी भी नहीं थी.

कुछ कमरों में पर्याप्त वेंटिलेशन और आपात निकास की व्यवस्था नहीं थी. इसके बावजूद निरीक्षण रिपोर्ट में भवन को नियमों के अनुरूप बताया गया था. जांच रिपोर्ट ने इस निरीक्षण को लापरवाहीपूर्ण और विरोधाभासी करार दिया है.

आग कैसे फैली?

रिपोर्ट के अनुसार 3 जून की सुबह होटल के किचन में इलेक्ट्रिक ऑयल फ्रायर और अन्य उपकरण चालू किए गए थे. कुछ ही मिनट बाद फ्रायर के पास आग दिखाई दी. इसके बाद LPG पाइप प्रभावित हुई और आग तेजी से फैल गई. घने धुएं ने मुख्य निकास मार्ग बंद कर दिया, जिससे कई लोग अंदर फंस गए.

होटल कर्मचारियों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन स्थिति तेजी से बिगड़ती गई. फंसे लोगों को निकालने के लिए खिड़कियां तोड़नी पड़ीं. हालांकि आग की वास्तविक वजह पर अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है. फोरेंसिक, फायर और तकनीकी जांच की रिपोर्टों का इंतजार है.

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