
नई दिल्ली:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के आंदोलन के बीच मामले की जांच के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और कानून में सजा बढ़ाने का वादा किया था. इसके बाद केंद्रीय कैबिनेट ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के लिए बहुत ज्यादा सख्त सजा का प्रस्ताव करने वाले एक ड्राफ्ट बिल, ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन को मंजूरी दी. नए प्रावधानों का मकसद उन गलत तौर-तरीकों के खिलाफ सख्त रोक लगाना है, जिनकी वजह से बार-बार राष्ट्रीय परीक्षाओं में दिक्कतें आई हैं और लाखों छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा है.
मंजूर किए गए ड्राफ्ट के अनुसार, पेपर लीक में शामिल लोगों को पांच से दस साल की जेल और 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. ये जुर्माना मौजूदा कानून की तुलना में काफी ज्यादा है.

‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ का पूरा विवरण
संशोधन विधेयक की मुख्य बातें –
1. सख्त सज़ा और ज़्यादा जुर्माना: ये विधेयक 2024 के कानून की मुख्य धाराओं के तहत जेल की सज़ा और आर्थिक जुर्माने को काफी बढ़ाता है.
व्यक्तिगत स्तर पर गड़बड़ी (धारा 10(1)): जेल की सज़ा 3-5 साल से बढ़ाकर 5-10 साल कर दी गई है. जुर्माना ₹10 लाख तक से बढ़ाकर ₹50 लाख तक कर दिया गया है.
सर्विस प्रोवाइडर के लिए सज़ा (धारा 10(2)): अधिकतम जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दिया गया है. ब्लैकलिस्ट/डीबार करने की अवधि 4 साल से बढ़ाकर 8 साल कर दी गई है.
डायरेक्टर/मैनेजमेंट की भागीदारी (धारा 10(3)): जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दिया गया है (कम से कम 5 साल की जेल की सज़ा बनी रहेगी).
संगठित अपराध (धारा 11(1)): जेल की सज़ा कम से कम 5 साल से बढ़ाकर कम से कम 7 साल कर दी गई है. जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दिया गया है.

2. जांच की समय-सीमा और स्पेशल टास्क फोर्स (STF): केंद्र सरकार अब अपराधों की जांच के लिए खास तौर पर एक STF बना सकती है. जब मामला STF को सौंपा जाता है, तो जांच पूरी तरह से उन्हीं के द्वारा की जानी चाहिए.
जांच की दो महीने की समय-सीमा: सामान्य अधिकारियों, केंद्रीय एजेंसियों या STF द्वारा जांच, मामला दर्ज होने या रेफर किए जाने की तारीख से 2 महीने के भीतर पूरी होनी चाहिए.
3. स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट: राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश (हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों के साथ सलाह-मशविरा करके) सेशन कोर्ट को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के तौर पर नामित करेंगे.
सख्त समय-सीमा: सुनवाई रोज़ाना के आधार पर होगी. चार्जशीट दाखिल होने की तारीख से 3 महीने के भीतर सुनवाई पूरी होनी चाहिए.
स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर: इन मामलों को आगे बढ़ाने के लिए खास स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किए जाएंगे.
केस ट्रांसफर: 2024 के कानून के तहत सभी लंबित मामले अपने आप इन फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रांसफर हो जाएंगे और ट्रांसफर के 3 महीने के भीतर पूरे होने चाहिए.

4. अपील और कानूनी कार्यवाही: हाई कोर्ट बेंच- फैसले, सज़ा या ज़मानत के आदेशों के खिलाफ अपील हाई कोर्ट की 2-जजों की बेंच के पास जानी चाहिए.
अपील की समय-सीमा: अपील 30 दिनों के भीतर (पर्याप्त कारण होने पर अधिकतम 90 दिनों में) दायर की जानी चाहिए और हाई कोर्ट को इसे स्वीकार किए जाने के 3 महीने के भीतर निपटाना होगा.
इन संशोधनों का मकसद आर्थिक जुर्माने को काफी बढ़ाना और बार-बार अपराध करने वालों या बड़े पैमाने पर अपराध करने वालों के लिए सख्त सजा सुनिश्चित करना है. प्रस्तावित बिल से परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता मजबूत होने और छात्रों व अभिभावकों का भरोसा बहाल होने की उम्मीद है. संसद में अगले सप्ताह ये कानून पेश किया जाएगा.
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