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700 साल पुरानी अमीर खुसरो की गजल से बना लता मंगेशकर का कालजयी गीत, गाने का मतलब नहीं जानते होंगे आप, मिथुन-अनीता ने बनाया सदाबहार | Lata Mangeshkar this song based on 700 year old ghazal by Amir Khusrow you might not know its meaning Mithun Anita made it evergreen



नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा के जाने-माने गीतकार गुलजार साहब ने फिल्म इंडस्ट्री में एक से बढ़कर एक सदाबहार गाने दिए हैं. जो सालों बाद भी लोगों की जुबान पर उसी तरह से बने हुए हैं जितने रिलीज के समय पर थे. लेकिन आज हम उनके एक ऐसे गाने के बारे में बताएंगे जो अपने संगीत और बोल के साथ अपने पीछे छिपी कहानी के लिए भी जाना जाता था. इस गाने को बनाने में 700 साल पुरानी शायरी का इस्तेमाल किया गया और इसे उस समय के दौर के संगीत के साथ इस तरह से पिरोया गया कि ये एक अमर गीत बन गया. इस गाने के बोल में जिस शायरी का इस्तेमाल किया गया है वो 14वीं सदी के मशहूर कवि, शायर और गायक अमीर खुसरो की गजल से बनी है, जिसे लता मंगेशकर और शब्बीर कुमार ने अपनी आवाज से कालजयी बना दिया. इस गाने की लाइन जो लोगों के जहन में आज भी तरोताजा है उसकी खास बात ये है कि आपने भी इसे गुनगुनाया जरूर होगा, लेकिन इसका मतलब आप भी नहीं जानते होंगे. तो चलिए जानते हैं कौन सा है वो गाना.

अमीर खुसरो की एक लाइन से गुलजार ने लिखा पूरा गीत

साल 1985 में आई फिल्म गुलामी के गाने में इस लाइन से प्रेरित होकर पूरा गीत रचा गया था. अमीर खुसरो की प्रसिद्ध रचना की लाइन ‘जिहाल-ए-मिस्कीं मकुन तगाफुल, दुराए नैना बनाए बतियां’ लाइन जिसने इस गाने को एक अलग पहचान दिलाई.  गजल की ये लाइन, फिल्म की कहानी और भाव को ध्यान में रखते हुए गुलजार ने इस गाने को लिखकर गुलजार ने अपने अंदाज में फिल्मी गीत का रूप दिया और ये गाना समय के साथ यादगार बन गया. लता मंगेशकर और शब्बीर कुमार की आवाज में सजा ‘जिहाल-ए-मिस्कीं’ आज चार दशक बाद भी अपनी मिठास और दर्द की वजह से संगीत प्रेमियों के बीच खास जगह रखता है. गाने के बोल कुछ ऐसे हैं-

ज़िहाल-ए-मिस्कीं मकुन ब-रंजिश,
बहाल-ए-हिज्रा बेचारा दिल है.
सुनाई देती है जिसकी धड़कन,
तुम्हारा दिल या हमारा दिल है.
टूटे दिल को जोड़ें कैसे,
ये बताते जाओ.
जिंदा रहने की बस हमको,
एक वजह दे जाओ.

क्या है ‘जिहाल-ए-मिस्कीं’ का मतलब?

इस गाने को आपने भी सुना होगा और गुनगुनाया होगा, लेकिन क्या आप इस बोल का मतलब जानते हैं. इस गाने के शब्दों में प्रेम और जुदाई का दर्द छिपा है. ‘जिहाल’ का अर्थ हालत और ‘मिस्कीं’ का अर्थ गरीब या लाचार होता है. ‘जिहाल-ए-मिस्कीं मकुन बरंजिश’ का मतलब है  मेरी लाचारी और खराब हालत देखकर मुझसे नाराज मत हो.

वहीं, ‘बहाल-ए-हिज्रां बेचारा दिल है’ में प्रेमी अपनी जुदाई से परेशान होने पर अपनी हालत को बयां करता है. यानी अपने प्रेमी से दूर होने पर दुख और उसकी तड़प से दिल का हाल बेहाल है. पूरे गाने में एक प्रेमी अपनी लाचारी और जुदाई का दर्द बयां करते हुए अपनी प्रेमिका से बेरुखी न दिखाने की गुजारिश करता है.

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‘गुलामी’ में नजर आए थे ये सितारे

साल 1985 में रिलीज हुई फिल्म’गुलामी’ एक एक्शन-ड्रामा फिल्म थी, जिसका निर्देशन जे. पी. दत्ता ने किया था. फिल्म में धर्मेंद्र, मिथुन चक्रवर्ती, नसीरुद्दीन शाह, कुलभूषण खरबंदा, स्मिता पाटिल, रीना रॉय, अनीता राज, रजा मुराद और ओम शिवपुरी ने अभिनय किया था. फिल्म की कहानी, संगीत और अभिनय ने दर्शकों का दिल जीता था. लेकिन फिल्म के गाने’जिहाल-ए-मिस्कीं’ चार दशक से ज्यादा समय बाद भी अपनी अलग पहचान बनाए हुए है.
 




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