
आजकल मार्केट में सेहतमंद रहने का ऐसा क्रेज चल पड़ा है कि हर इंसान सुपरमार्केट की अलमारियों से उठाकर शुगर फ्री या नो एडेड शुगर (No Added Sugar) लिखे पैकेट धड़ल्ले से खरीद लेते हैं. क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर पैकेट पर साफ-साफ लिख दिया गया है कि इसमें चीनी नहीं मिलाई गई है, तो मतलब वो चीज बिल्कुल सेफ और हमारे दिल-दिमाग के लिए एकदम बढ़िया है. लेकिन रुकिए! अगर आप भी बिना सोचे-समझे ऐसी चीजें सिर्फ इसलिए खरीद लेते हैं क्योंकि उन पर ‘नो एडेड शुगर’ का ठप्पा लगा है, तो अब संभल जाने की सख्त जरूरत है. देश की सबसे बड़ी फूड सेफ्टी अथॉरिटी यानी FSSAI ने इसको लेकर एक बहुत ही जरूरी और आंखें खोल देने वाली चेतावनी जारी की है. आइए जानते हैं कि आखिर माजरा क्या है और कंपनियां कैसे आपकी सेहत के साथ एक बड़ा खेल खेल रही हैं.
पैकेटबंद खाने का सच-
अगर आप किसी भी खाने के पैकेट पर सिर्फ ‘नो एडेड शुगर’ लिखा देखकर उसे खरीद रहे हैं, तो सावधान हो जाइगे. FSSAI के मुताबिक, इन पैकेटबंद चीजों में एक ऐसी चीज होती है, जो आपको लगेगा कि आप तो बिना चीनी वाली हेल्दी चीज खा रहे हैं, लेकिन अंदर ही अंदर आपका ब्लड शुगर लेवल तेजी से ऊपर नीचे हो सकता है. दरअसल इनके बारे में आम आदमी को ज्यादा कुछ पता नहीं होता, और उसका नाम है- माल्टोडेक्सट्रिन.

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क्या है ये माल्टोडेक्सट्रिन?
बहुत सीधी भाषा में समझें तो यह एक तरह का कार्बोहाइड्रेट ही है. इसे मक्का (कॉर्न), चावल, आलू और टैपिओका जैसी चीजों से निकाला जाता है. इन सभी नेचुरल चीजों के स्टार्च को तोड़कर और प्रोसेस करके इस पाउडर या लिक्विड नुमा चीज को तैयार किया जाता है. कंपनियां इसका इस्तेमाल खाने-पीने की चीजों में टेक्सचर सुधारने, उन्हें गाढ़ा करने, उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने और उनका वजन या मात्रा बढ़ाने के लिए धड़ल्ले से करती हैं.
सबसे बड़ा झोल यहीं पर है. इस माल्टोडेक्सट्रिन की सबसे बड़ी खासियत या कहें कि चालाकी यह है कि इसे खाने से जरूरी नहीं कि आपको वो चीज बहुत ज्यादा मीठी लगे. यानी स्वाद में भले ही चीनी जैसी मिठास न महसूस हो, लेकिन अंदर ही अंदर आपके शरीर में कार्बोहाइड्रेट की भारी मात्रा जा रही होती है.
क्यों सेहत के लिए खतरनाक है ये छुपा हुआ कार्बोहाइड्रेट?
FSSAI ने अपनी चेतावनी में बहुत साफ शब्दों में बताया है कि माल्टोडेक्सट्रिन का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) बहुत ज्यादा हो सकता है. अब आप पूछेंगे कि ग्लाइसेमिक इंडेक्स क्या होता है? तो यह वो पैमाना है जिससे पता चलता है कि कोई भी खाने की चीज आपके खून में कितनी तेजी से शुगर का लेवल बढ़ाती है.
चूंकि माल्टोडेक्सट्रिन का ग्लाइसेमिक इंडेक्स हाई होता है, इसलिए यह आपके खून में ग्लूकोज यानी ब्लड शुगर को बढ़ा सकता है. अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं या फिर वजन कंट्रोल करने की सोच रहे हैं, तो यह छुपा हुआ कार्बोहाइड्रेट आपकी सारी मेहनत पर पानी फेर सकता है.
बेशक, FSSAI यह भी कहता है कि इसका असर इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप इसे कितनी मात्रा में और कितनी बार खा रहे हैं, साथ ही वह पूरा खाना किस चीज से मिलकर बना है. लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप इस खतरे को नजरअंदाज कर दें.
FSSAI की सीधी सलाह-
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सभी पैकेटबंद और रेडी-टू-ईट फूड्स पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गए हैं. बिस्कुट, नमकीन, एनर्जी ड्रिंक्स, सॉस, सूप और यहां तक कि बच्चों के कई हेल्थ ड्रिंक्स में भी कंपनियों ने इसका इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है.
FSSAI ने साफ सलाह दी है कि कस्टूमर यानी हम और आप जैसे कस्टूमर को सिर्फ और सिर्फ डिब्बे के बाहर लिखे बड़े-बड़े विज्ञापनों और दावों पर भरोसा नहीं करना चाहिए. अगली बार जब भी आप ग्रोसरी स्टोर जाएं और किसी पैकेट पर मोटे अक्षरों में ‘नो एडेड शुगर’ या ‘शुगर फ्री’ लिखा देखें, तो तुरंत उसका पिछला हिस्सा पलट लें.
पैकेट के पीछे दी गई सामग्री की सूची यानी इन्ग्रिडिएंट्स लिस्ट-
इस लिस्ट को ध्यान से पढ़ें. हो सकता है कि उस प्रोडक्ट में ऊपर से कोई चीनी या शुगर न मिलाई गई हो, लेकिन चुपके से उसमें माल्टोडेक्सट्रिन या ऐसे ही दूसरे स्टार्च प्रोडक्ट्स भर दिए गए हों.
तो अब से जब भी आप बाजार जाएं, तो विज्ञापनों के झांसे में न आएं. अपनी सेहत के खुद चौकीदार बनें, पैकेट की पूरी कहानी पढ़ें और तभी अपने घर उन चीजों को लाएं.
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