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65 साल पुराना गाना, कश्मीर की कली बनीं सायरा बानो, रूठे बाबू बने शम्मी, कश्मीर की वादियों में गूंजी लता मंगेशकर की आवाज ने बनाया कल्ट | 65 year old romantic song saira banu became kashmiri kali shammi kapoor lata mangeshkar voice echoed in kashmir made it evergreen



नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा के 60 के दशक की बात करें तो उस दौर में ऐसे गाने बने जो अपनी प्यारी धुन और खूबसूरत लोकेशन से दर्शकों के दिलों मे घर कर गए. आज हम एक ऐसे ही गाने की बात करेंगे जिसमें गाने को कश्मीर में शूट किया गया. सायरा बानो ने कश्मीर की कली में अपने अंदाज से दर्शकों का दिल चुरा लिया. 65 साल पुराने गाने की खासियत सिर्फ इसकी धुन नहीं, बल्कि कश्मीर की खूबसूरत वादियां, डल झील और शालीमार गार्डन था. लता मंगेशकर की सुरीली आवाज ने इस गाने को यादगार बना दिया और आज भी पुराने हिंदी गानों को पसंद करने वालों की फेवरेट लिस्ट में ये गाना शामिल रहता है. 

65 साल पुरानी फिल्म में खिली कश्मीर की कली

हम बात कर रहे हैं साल 1961 में आई फिल्म ‘जंगली’ की, जिसमें सायरा बानो और शम्मी कपूर ने लीड रोल प्ले किया था. फिल्म का निर्देशन सुबोध मुखर्जी ने किया था. इसममें शशिकला और अनूप कुमार और ललिता पवार ने भी अभिनय किया था. फिल्म का गाना ‘काश्मिर की कली हूं मैं’ एक ऐसा ही गाना था जिसमें सायरा बानो ने गाने में कश्मीरी गेटअप लिया था. सायरा बानो की अदाएं और शम्मी कपूर के अंदाज ने इस गाने को यादगार बना दिया था. फिल्म का गाना याहू…चाहे कोई मुझे जंगली कहे आज भी इसके यादगार गीतों में शामिल है. 

लता मंगेशकर ने दी थी सायरा बानो को आवाज

जंगली फिल्म के गाने ‘काश्मिर की कली हूं मैं’ गाने को लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी. इसका संगीत शंकर-जयकिशन ने तैयार किया था, जबकि इसके बोल हसरत जयपुरी ने लिखे थे. गाने में सायरा बानो और शम्मी कपूर नजर आए थे. इस गाने को खास बनाया इसकी धुन, बोल और रोमांस के साथ शरारत भी जो महसूस होती है. गाने में सायरा बानो का अंदाज उस दौर की हिंदी फिल्मों की नायिकाओं की खूबसूरती और चंचलता को दिखाता है. गाने के बोल इस तरह हैं-

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काश्मिर की कली हूँ मैं, मुझ से ना रुठो बाबूजी
मुरझा गई तो फिर ना खिलूँगी कभी नहीं, कभी नहीं, कभी नहीं
अरे काश्मिर की कली हूँ मैं, मुझ से ना रुठो बाबूजी
मुरझा गई तो फिर ना खिलूँगी कभी नहीं, कभी नहीं, कभी नहीं
रंगत मेरी बहारों में, दिल की आग चनारों में
कुछ तो हम से बात करो इन बहके गुलजारों में
प्यार पे गुस्सा करते हो, तेरा गुस्सा हमको प्यारा है
यही अदा तो कातिल है, जिसने हमको मारा है
छोडो जी नाराजी को, तोड़ो इस ख़ामोशी को
आप अजब है शेख जी समझे ना…

श्रीनगर की इन खूबसूरत जगहों पर हुई थी शूटिंग

इस गाने की खूबसूरती में चार चांद लगाए लगाए इसकी लोकेशन ने. गाने को कश्मीर की डल झील और शालीमार गार्डन में फिल्माया गया. इस गाने की खूबसूरती बढ़ाने में कश्मीर की लोकेशन का भी बड़ा योगदान था. उपलब्ध फिल्म संबंधी जानकारी के मुताबिक, इसकी शूटिंग श्रीनगर के शालीमार गार्डन और डल झील जैसी खूबसूरत जगहों पर हुई थी. गाने में बगीचे, पानी और पहाड़ इस गाने को एक अलग ही खूबसूरती देते हैं. ‘कश्मीर की कली हूं मैं’ गाने को वहां के खूबसूरत माहौल ने भी यादगार बना दिया.

जंगली के साउंडट्रैक की बात करें तो फिल्म में 8 गाने थे. इसका संगीत शंकर-जयकिशन ने तैयार किया था और गानों के बोल हसरत जयपुरी, शैलेंद्र ने तैयार किए थे. फिल्म के गानों में लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, आशा भोंसले और मुकेश की आवाज का जादू चला था. 

फिल्म की कहानी 

फिल्म में शम्मी कपूर ने चंद्रशेखर और सायरा बानो ने राजकुमारी का किरदार निभाया था. चंद्रशेखर एक ऐसे परिवार में पला-बढ़ा होता है जहां हंसने की इजाजत नहीं होती है. लेकिन चंद्रशेखर जब कश्मीर जाता है तो वहां पर उसको राजकुमारी से प्यार हो जाता है. जो उसे हंसना सिखाती है. लेकिन दोनों के प्यार के बीच आती है उनकी मां को राजकुमारी और उनके रिश्ते के लिए कभी नहीं मानने वाली थी. 

 




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