

70 के दशक में कई गाने ऐसे बने, जो आज तक भी पुराने नहीं हुए. इसका श्रेय ना केवल सिंगर्स को बल्कि लिखने वाले गीतकारों को भी जाता है. 55 साल पहले एक गाना आया था, जिसे आज भी कुछ लोगों से मुंह से सुन सकते हैं. इस गाने को लता मंगेशकर ने अमर कर दिया.यह गाना है- ‘मार दिया जाए कि छोड़ दिया जाए’. यह गाना 1971 में आई फिल्म मेरा गांव मेरा देश का है. इस फिल्म के निर्देशक राज खोसला थे.
आनंद बख्शी के बोल
फिल्म मेरा गांव मेरा देश हिंदी सिनेमा की कल्ट फिल्मों में से एक रही है. फिल्मी कहानी ही नहीं बल्कि गाने भी सुपरहिट रहे थे. उनमें से एक गाना ‘मार दिया जाए कि छोड़ दिया जाए’ भी था. इस गाने को आशा पारेख, धर्मेंद्र, विनोद खन्ना, लक्ष्मी छाया और जयंत पर फिल्माया गया है. जबकि आवाज लता मंगेशकर ने दी है. यह गाना फिल्मी का कहानी के बयां करता है. ‘मार दिया जाए कि छोड़ दिया जाए’ में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने संगीत दिया, जबकि गाने के लेखक आनंद बख्शी हैं.
गाने के पीछे की कहानी
‘मार दिया जाए कि छोड़ दिया जाए’ के पीछे एक दिलचस्प कहानी है. दरअसल आनंद बख्शी को गाना लिखते समय स्कूल के दिनों की एक कहानी याद आ गई. कहानी सिकंदर की थी. जब सिकंदर ने भारत पर हमला किया तो राजा पोरस को कैद कर लिया गया. तब सवाल उठा अब पोरस को मार दिया जाए या छोड़ दिया जाए? इसी एक लाइन ने आनंद बख्शी को गाना लिखने की प्रेरणा दी. उन्होंने उसी भाव को फिल्म के सीन में ढाल दिया और गाना तैयार हो गया. आज भी यह गाना अमर है. गीतकार आनंद बख्शी की खासियत यही थी कि वे रोजमर्रा की बातों और पुरानी यादों से ऐसे गीत निकाल लेते थे जो दिल को छू जाते हैं.
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