
2030 तक अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पानी खत्म होने वाला दुनिया का पहला आधुनिक शहर बन सकता है. गैर-लाभकारी संस्था ‘प्रोस्पर ग्लोबल’ की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा नहीं है कि फिलहाल काबुल में लोगों के लिए पानी मयस्सर होना आसान है. और ऐसा भी नहीं है कि ये सिर्फ काबुल तक ही सीमित है. दुनिया भर के शहर, जिनमें अमेरिका के टेक्सास के कॉर्पस क्रिस्टी से लेकर ईरान की राजधानी तेहरान तक पानी की इतनी गंभीर कमी का सामना कर रहे हैं कि निवासी मान कर चल रहे हैं कि एक दिन ऐसा भी आएगा कि एक बूंद पानी मिलना मुश्किल होगा.
ऐसा क्यों हुआ
- भारत सहित दुनिया भर के देशों में पानी की किल्लत आम बात हो गई है. अफगानिस्तान में स्थिति ज्यादा भयावह हो गई है, मगर कारण सब जगह एक ही है. तेजी से बढ़ती आबादी और पानी का अपर्याप्त और कम फंडिंग वाले इंफ़्रास्ट्रक्चर के साथ ही जलवायु संकट भी महत्वपूर्ण कारण हैं. जलवायु संकट के कारण मौसम ज्यादा गर्म और सूखा हो रहा है और जल-चक्र का संतुलन बिगड़ रहा है. मगर, अफगानिस्तान के सभी शहरी इलाकों में काबुल की स्थिति शायद सबसे गंभीर है. यह सबसे तेजी से बढ़ने वाले शहरों में से एक है और ऐसे देश में स्थित है, जो जलवायु परिवर्तन के लिहाज से बहुत संवेदनशील है. अफगानिस्तान दशकों से संघर्ष झेल रहा है और 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से वैश्विक मदद भी लगभग बंद हो गई है.
- यह घरों, ग्रीनहाउस और व्यवसायों से बढ़ती मांग का नतीजा है. लेकिन इंसानों की वजह से पैदा हुआ जलवायु संकट भी इसमें एक भूमिका निभाता है. देश ने लगातार छह साल तक सूखे का सामना किया है, जिसमें पिछला साल सबसे गंभीर वर्षों में से एक था. UN के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल के अंत में अफगानिस्तान में बर्फबारी 25 वर्षों के निचले स्तर पर पहुंच गई थी, और यह एक लंबे समय से चल रहे उस ट्रेंड का हिस्सा है, जिसमें 2014 और 2020 के बीच बर्फ के स्तर में लगभग 20% की गिरावट देखी गई है.

अफगानिस्तान में सूखे के कारण मिट्टी भी सख्त हो चुकी है.
1990 तक ऐसी स्थिति नहीं थी
शहर के तैमानी इलाके में रहने वाले मिर्जा जान बताते हैं कि काबुल की सड़कों पर पानी एक बड़ा चर्चा का विषय है. हर कोई इससे प्रभावित है. मगर ऐसा हमेशा नहीं था. जब 1990 में मिर्जा के परिवार ने अपना घर खरीदा था, तो वे एक उथले कुएं से बाल्टी से हाथ से पानी निकाल सकते थे. समय के साथ, कुआं सूखता गया और उन्हें उसे और गहरा खोदना पड़ा. अब यह 700 फीट से ज्यादा गहरा है. इसे खोदना एक महंगा काम था, मगर ये सिर्फ इसलिए हो पाया क्योंकि उनके अमेरिका में रहने वाले दो बेटों ने इसके लिए पैसे भेज दिए थे.

क्या तालिबान सरकार कुछ नहीं कर रही?
ऐसा नहीं है कि सरकार को इस संकट का पता नहीं है. उसकी प्लानिंग में काबुल नदी की एक सहायक नदी शाहतूत बांध बनाने की है. इससे काबूल के 20 लाख से ज्यादा लोगों को पानी मिल सकता है. भारत ने इसके लिए फंड देने पर सहमति जताई थी, लेकिन 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद यह प्रोजेक्ट रुक गया. तालिबान का कहना है कि इस पर जल्द ही काम शुरू होगा, लेकिन निर्माण अभी तक शुरू नहीं हुआ है. मगर, पाकिस्तान इसका कड़ा विरोध कर रहा है. उसका दावा है कि इस बांध की वजह से काबुल नदी से उसे मिलने वाले पानी में भारी कमी आएगी. एक और योजना 124 मील लंबी पाइपलाइन की है, जो पंजशीर नदी से काबुल तक पानी पहुंचाएगी ताकि शहर के 20 लाख निवासियों को पानी मिल सके. लेकिन यह अभी भी सर्वे और डिजाइन के चरण में ही है. अगर इस पर काम शुरू भी हुआ तो इसे बनने में कई साल लगेंगे.
यह भी पढ़ें-





