
सर्दी-बुखार के इलाज के लिए इंजेक्शन लगवाने गई 14 साल की छात्रा की कुछ ही समय बाद मौत हो जाए, तो क्या इसकी वजह इंजेक्शन हो सकता है? तेलंगाना के खम्मम जिले में सामने आए एक मामले के बाद यही सवाल उठ रहा है. हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि बिना मेडिकल जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के केवल समय के आधार पर इंजेक्शन को मौत का सीधा कारण नहीं माना जा सकता.
क्या है पूरा मामला
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खम्मम जिले के कोनिजेरला मंडल के बसवापुरम गांव की रहने वाली 14 वर्षीय छात्रा को सर्दी और बुखार की शिकायत थी. परिवार उसे इलाज के लिए एक स्थानीय आरएमपी (Rural Medical Practitioner) क्लिनिक लेकर गया. परिजनों का आरोप है कि इंजेक्शन दिए जाने के कुछ ही समय बाद लड़की की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसे गंभीर रूप से सांस लेने में परेशानी होने लगी.
स्थिति गंभीर होने पर परिवार उसे खम्मम के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचा. यहां डॉक्टरों ने जांच की और ईसीजी (ECG) भी किया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद छात्रा को बचाया नहीं जा सका. घटना के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है और पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. फिलहाल मौत की वास्तविक वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

एक्सपर्ट की राय
इस बारे में अधिक जानकारी के लिए एनडीटीवी ने बात की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एन. के. सोनी से. डॉक्टर सोनी ने बताया कि अगर किसी मरीज को इंजेक्शन देने के कुछ मिनटों के भीतर सांस लेने में परेशानी, बेचैनी, शरीर पर सूजन या लाल चकत्ते, सीने में जकड़न, ब्लड प्रेशर गिरना या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो Anaphylaxis (गंभीर एलर्जिक रिएक्शन) की संभावना पर तुरंत विचार किया जाता है. यह एक मेडिकल इमरजेंसी होती है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकती है.
क्या गलत इंजेक्शन से जान जा सकती है?
डॉक्टर बताते हैं कि इंजेक्शन के बाद अचानक सांस फूलने की वजह Severe Bronchospasm भी हो सकती है, जिसमें सांस की नलियां अचानक सिकुड़ जाती हैं. इसके अलावा दवा का गंभीर साइड इफेक्ट, गलत दवा, गलत डोज, दवा देने का तरीका या मरीज की पहले से मौजूद कोई बीमारी भी अचानक हालत बिगड़ने का कारण बन सकती है.
हालांकि, विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि इस मामले में वास्तविक कारण का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड, अस्पताल के दस्तावेज और इस्तेमाल की गई दवा की जांच के बाद ही चल सकेगा. केवल इस आधार पर कि इंजेक्शन देने के बाद तबीयत बिगड़ी, इंजेक्शन और मौत के बीच सीधा संबंध स्थापित करना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा.
डॉ. सोनी के अनुसार, जांच के दौरान यह जानना बेहद जरूरी होगा कि छात्रा को कौन-सा इंजेक्शन दिया गया था, उसकी कितनी डोज दी गई थी, इंजेक्शन देने से पहले एलर्जी और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में पूछा गया था या नहीं, और लक्षण किस क्रम में सामने आए.
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है. जांच में इंजेक्शन की वायल, प्रिस्क्रिप्शन, ट्रीटमेंट रिकॉर्ड, अस्पताल की रिपोर्ट और पोस्टमार्टम निष्कर्ष महत्वपूर्ण साक्ष्य होंगे. इन्हीं के आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि छात्रा की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था और उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं.
एक्सपर्ट के बारे में :डॉ. एन. के. सोनी, वरिष्ठ परामर्शदाता एवं विभागाध्यक्ष, इंटरनल मेडिसिन, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, ओमेगा-1, ग्रेटर नोएडा





