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शोरूम से घर ले जाते ही चकनाचूर हुई Mahindra SUV, कोर्ट ने कार डीलर पर लगाया 3 लाख का जुर्माना | Consumer Commission Orders Mahindra Dealer to Pay Rs 3 Lakh After Unregistered SUV Crashes



हनुमानगढ़ (राजस्थान) के रहने वाले श्रवण राम ने जयपुर के एक डीलर से करीब 7 लाख रुपये में एक महिंद्रा एसयूवी खरीदी. डिलीवरी की सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद जब वह गाड़ी लेकर अपने घर जा रहे थे, तभी रास्ते में गाड़ी का एक भयानक एक्सीडेंट हो गया. इस हादसे में गाड़ी बुरी तरह चकनाचूर हो गई. अच्छी बात यह रही कि किसी को गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन असली मुसीबत तो इसके बाद शुरू हुई.

एक्सीडेंट के बाद जब ग्राहक ने गाड़ी के नुकसान की भरपाई के लिए बीमा कंपनी से संपर्क किया, तो कंपनी ने क्लेम देने से साफ इनकार कर दिया. बीमा कंपनी का कहना था कि एक्सीडेंट के समय गाड़ी के पास न तो कोई परमानेंट रजिस्ट्रेशन नंबर था और न ही कोई टेंपरेरी नंबर था. बिना रजिस्ट्रेशन के गाड़ी को सड़क पर चलाना कानूनन जुर्म है और यह इंश्योरेंस पॉलिसी के नियमों का सीधा उल्लंघन है. गाड़ी को ठीक करने का खर्च 8.38 लाख रुपये बैठ रहा था, जबकि बीमा राशि 6.15 लाख रुपये थी.

कोर्ट ने डीलर को माना लापरवाही का दोषी

जब यह मामला कंज्यूमर कोर्ट पहुंचा, तो राजस्थान राज्य उपभोक्ता आयोग की सर्किट बेंच ने डीलर की खिंचाई की. कोर्ट ने पाया कि ग्राहक से रजिस्ट्रेशन के पूरे पैसे लेने के बावजूद डीलर ने बिना कागजी कार्रवाई पूरी किए गाड़ी को शोरूम से बाहर जाने दिया. कोर्ट ने कहा कि यह सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 के नियम 42 का खुला उल्लंघन है. डीलर अपनी इस कानूनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता कि गाड़ी को बिना नंबर के सड़क पर क्यों उतारा गया.

दोनों पक्षों पर तय हुई जिम्मेदारी

अदालत ने अपने फैसले में यह भी साफ किया कि इस मामले में जितनी गलती डीलर की थी, उतनी ही लापरवाही खरीदार की भी थी. ग्राहक को भी बिना रजिस्ट्रेशन स्टेटस चेक किए गाड़ी को सड़क पर नहीं दौड़ाना चाहिए था. इसी वजह से जिला आयोग ने पहले डीलर को बीमा राशि का 50 प्रतिशत यानी 3.07 लाख रुपये देने का आदेश दिया था. इसके साथ ही एक्सीडेंट की तारीख से भुगतान तक 9 फीसदी सालाना ब्याज और मानसिक प्रताड़ना के लिए अलग से जुर्माना लगाया गया था.

डीलर की याचिका खारिज

डीलर ने इस फैसले के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने डीलर की सभी दलीलों को खारिज कर दिया. 22 जून 2026 को आए इस अंतिम फैसले ने जिला कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा. इस फैसले से देश भर के कार खरीदारों को यह सीख मिलती है कि जब तक गाड़ी का पक्का या अस्थायी रजिस्ट्रेशन नंबर न मिल जाए, तब तक शोरूम से गाड़ी बाहर न निकालें क्योंकि हादसे की स्थिति में डीलर और ग्राहक दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
 




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