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शेख हसीना का 2024 में स्वागत करने के अलावा भारत के पास शायद ही कोई विकल्प था: दिनेश त्रिवेदी | Dinesh Trivedi said today India hardly had any option other than welcoming Sheikh Hasina in 2024



बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने आज कहा कि अगस्त 2024 में शेख हसीना को ले जा रहे विमान को देश में उतरने देने के अलावा भारत के पास शायद ही कोई विकल्प था. साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि उनके बांग्लादेश लौटने से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया चल रही है. हसीना की वापसी के बारे में पूछे जाने पर त्रिवेदी ने कहा कि इसके लिए एक प्रक्रिया है और इस प्रक्रिया में कानूनी पहलू शामिल हैं और यह बहुत व्यवस्थित है.

दिनेश त्रिवेदी ने आग कहा, “जहां तक ​​इसकी बात है, तो प्रक्रिया चल रही है और अदालतें इसमें शामिल हैं. इसलिए कोई भी आपको समय-सीमा नहीं बता सकता. उस समय हसीना जी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थीं. हमारे पास इस मामले में कोई खास विकल्प नहीं था. एक पड़ोसी के तौर पर हकीकत को स्वीकार करना हमारा कर्तव्य था.”

भारत के हाई कमिश्नर ढाका के पैन पैसिफिक सोनारगांव में आयोजित ‘बे ऑफ बंगाल कन्वर्सेशन 2026′ में ‘पावर एंड प्रूडेंस’ (शक्ति और विवेक) विषय पर एक पैनल चर्चा में बोल रहे थे. सेंटर फॉर गवर्नेंस स्टडीज़ द्वारा आयोजित यह तीन दिवसीय सम्मेलन आज शुरू हुआ. बांग्लादेश ने औपचारिक रूप से भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है. नई दिल्ली ने पहले कहा है कि इस अनुरोध की जांच तय कानूनी और न्यायिक प्रक्रियाओं के तहत की जा रही है और अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है.

भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर कही खास बात

त्रिवेदी ने दोनों देशों के बीच व्यापक रिश्तों पर भी जोर दिया और कहा कि ये रिश्ते सिर्फ लेन-देन के हितों से कहीं आगे हैं. उन्होंने कहा, “बांग्लादेश-भारत के रिश्ते सिर्फ लेन-देन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये सांस्कृतिक हैं. एक अच्छा पड़ोसी हमेशा मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ देता है.” क्षेत्रीय सुरक्षा के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि बांग्लादेश एक आजाद और संप्रभु देश है, जो अपनी सुरक्षा से जुड़े हितों को समझने और उन पर फैसला लेने में सक्षम है. उन्होंने कहा कि भारत को बांग्लादेश के लोगों और दोनों देशों के रिश्तों की बुनियाद बने भरोसे पर पूरा भरोसा है. उन्होंने कहा, “यही भरोसा और विश्वास, और यही बंधन भारत और बांग्लादेश के रिश्तों को बहुत-बहुत खास बनाता है.”

बांग्लादेश के एक्सपर्ट्स ने भी रखी अपनी बात

इसी सेशन में बोलते हुए, बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ पीस एंड सिक्योरिटी स्टडीज़ के प्रेसिडेंट, रिटायर्ड मेजर जनरल एएनएम मुनिरुज़्ज़मान ने बढ़ती जियोपॉलिटिकल प्रतिस्पर्धा के बीच बांग्लादेश को एक “उभरती हुई मध्यम शक्ति” बताया. उन्होंने कहा, “जियोपॉलिटिकल खींचतान से भरी और तेजी से बंटती जा रही दुनिया में, एक उभरती हुई मध्यम शक्ति के तौर पर बांग्लादेश स्थिरता लाने वाली भूमिका निभाता है. बांग्लादेश एक ऐसा देश है, जो दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच एक अहम कड़ी का काम करता है.” इस्तांबुल मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका के मेयर के विदेश संबंध सलाहकार, मुस्तफा ओस्मान तुरान ने कहा कि रणनीतिक स्वायत्तता का मतलब है रणनीतिक हितों को पूरा करने के लिए अपने फैसले खुद लेने की क्षमता होना. इस चर्चा में रणनीतिक स्वायत्तता, क्षेत्रीय सुरक्षा और इस क्षेत्र में उभरती भू-राजनीतिक जटिलताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया.

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