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विपक्ष चाहे बयान, सरकार चाहे चर्चा, इन दो शब्दों के बीच फंसकर रह गई है संसद, 19वें दिन भी ठप | parliament session students protest police action amit shah opposition rahul gandhi battle


नई दिल्ली:

20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन के बाद से ही इस मुद्दे पर विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह को लगातार निशाना बनाता रहा है. विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस मामले में कई बार गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग चुके हैं. राहुल गांधी ने कई बार सवाल किया है कि छात्रों की पिटाई और प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था. ऐसे में अमित शाह ने इस मुद्दे पर मीडिया से बात करते हुए पहली बार बयान दिया है. उनका कहना है कि आइए सदन में बहस शुरू करते हैं और इसके बाद मैं सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हूं. दूसरी तरफ, विपक्ष की तरफ से कहा गया कि हम नहीं सुनेंगे. यानी सत्ता पक्ष जहां हर मुद्दे पर सदन में चर्चा की बात कर रहा है वहीं, विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह से बयान की मांग पर अड़ा हुआ है. इन्हीं दो शब्दों पर सदन की कार्यवाही अटकी हुई है.

अमित शाह ने क्या कहा?

खुद के खिलाफ विपक्ष के विरोध पर पहली बार बयान देते हुए अमित शाह ने कहा, “आइए आज दोपहर 3 बजे से बहस शुरू करते हैं. मैं सदन में मौजूद रहूंगा और गुरुवार को दोपहर 3 बजे विस्तार से जवाब दूंगा.”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को विपक्ष पर छात्रों से जुड़े मुद्दे पर बहस से भागने और संसद का कामकाज रोकने का आरोप लगाया. अमित शाह ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि वे छात्रों के मुद्दे पर संसद में चर्चा होने दें. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि बहस के बाद मैं इस मुद्दे पर विस्तार से बयान दूंगा. मैं डिबेट के लिए तैयार हूं.

अमित शाह ने कहा, “संसद में चर्चा के नियम हैं. मैं इतने अहम मुद्दे पर यूं ही बयान नहीं दे सकता. बहस होने दीजिए और मैं विस्तार से जवाब दूंगा.”

राहुल ने कर दी इस्तीफे की मांग…

बहस के लिए अमित शाह के प्रस्ताव के कुछ ही मिनटों बाद, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि युवा गृह मंत्री की बात नहीं सुनना चाहते और उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए.

अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने कहा, “छात्रों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया? दिल्ली पुलिस और RAF गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं. क्या अमित शाह ने आदेश दिया था? अगर उन्होंने दिया, तो वे दोषी हैं. अगर नहीं दिया, तो वे अक्षम हैं. दोनों ही मामलों में, उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए.”

राहुल गांधी ने आगे कहा कि सरकार के पास कोई जवाब नहीं है और वे डरे हुए हैं.

दरअसल, विपक्ष चाहता है कि छात्रों के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री अमित शाह सीधे जवाब दे दें. लेकिन दूसरी तरफ विपक्षी सांसदों से गृहमंत्री का कहना है कि आइए सदन में पहले बहस करते हैं, उसके बाद मैं सभी सवालों के जवाब दूंगा. 

इस बीच गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है. गृह मंत्री ने बिरला को लिखे पत्र में कहा है कि संसद के वर्तमान सत्र में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल 2026 पर चर्चा हो चुकी है, जिसमें विपक्ष के किसी भी माननीय सांसद ने नीट परीक्षा के संबंध में सदन में कोई भी विचार व्यक्त नहीं किया. इसके बावजूद सरकार फिर से इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है. 

अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखी चिट्ठी

अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखी चिट्ठी

कांग्रेस नेता राशित अल्वी ने कहा, “सवाल यह है कि जब से सेशन शुरू हुआ है, अमित शाह जी संसद में नहीं आ रहे हैं और वे कह रहे हैं कि जब संसद में शोर हो रहा है, तो मैं कैसे आऊंगा. अमित शाह को जिम्मेदार गृह मंत्री होना चाहिए. अमित शाह जी आएं और विपक्ष जो कह रहा है, उस सवाल का जवाब दें. वे घर बैठकर यह क्यों कह रहे हैं, क्या वो बादशाह हैं. पहले वो संसद आएं, फिर आगे की बात होगी.”

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विपक्ष ऐसा क्यों कह रहा है?

राशिद अल्वी ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, “विपक्ष को लिखकर कुछ नहीं देना होता है कि चर्चा होनी चाहिए या नहीं होनी चाहिए. ये सब एडवाइजरी कमेटी तय करती है और उसमें सभी पार्टी के लोग होते हैं. वे पहले दो बजे आएं, अपना बयान दें. चर्चा बाद की बात है. पहले जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ है, उस पर आकर बयान दें, उसके बाद ही चर्चा होगी. विपक्ष क्यों लिखकर देगा कि हम चर्चा के लिए तैयार हैं. पहले वो बयान दें कि गोली और डंडे किसने चलाए और किसके हुक्म से चलाए गए. अगर कमिश्नर के हुक्म से डंडे चले तो उसको सस्पेंड क्यों नहीं किया गया और अगर आपके आदेश पर हुआ तो आपने इस्तीफा क्यों नहीं दिया.”

राशिद अल्वी ने आगे कहा कि संसद के अंदर चर्चा बयान पर होती है. पहले मंत्री आकर बयान देता है, उसके बाद जरूरी होने पर चर्चा होती है. यह भी तो मुमकिन हो सकता है कि अमित शाह बयान दें और फिर सब सहमत हो जाएं. 

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