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लता मंगेशकर का 64 साल पुराना वो गाना जो आज भी उड़ा देता है रातों की नींद, लंबी खामोशी के बाद गाया ‘कहीं दीप जले कहीं दिल’ | Lata Mangeshkar 64 year old song she sang after long silence Bees Saal Baad song kahin deep jale kahin dil won Filmfare Award for her



नई दिल्ली:

लता मंगेशकर की जिंदगी का ये अध्याय शायद ही आप जानते होंगे. ये एक ऐसा समय था जब सुर कोकिला की आवाज गबड़बड़ाने लगी थी. उन्होंने लगभग साल भर तक खुद को गायकी से दूर रखा था. ये बात 1960 के दशक की शुरुआत की है. वोकल कॉर्ड्स की समस्या ने उन्हें गाने से ब्रेक लेने पर मजबूर कर दिया. साल भर की खामोशी के बाद उन्होंने जो गाना गाया, वो आज भी रातों की नींद उड़ा देता है, ‘कहीं दीप जले, कहीं दिल’. यह गाना 1962 की फिल्म ‘बीस साल बाद‘ से है, जिसने लता मंगेशकर को उनका दूसरा फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलाया.

बीस साल बाद फिल्म का गाना

बिरेन नाग निर्देशित ‘बीस साल बाद’ एक सस्पेंस थ्रिलर थी, जिसमें वहीदा रहमान और विश्वजीत लीड रोल में थे. इस गाने का फिल्म में ऐसा इस्तेमाल हुआ था कि जब भी ये चित्रहार में आता था या फिर कहीं भी बजता था, तो सिहरन सी दौड़ जाती थी. इसका म्यूजिक हेमंत कुमार का था जबकि गीत लिखा शकील बदायुनी ने.

अब आते हैं 2010 पर. उनके भाई हृदयनाथ मंगेशकर ने इंदौर में ‘मैं और दीदी’ कार्यक्रम में लता मंगेशकर से जुड़ा एक चौंकाने वाला खुलासा किया था. उन्होंने बताया कि 1960 के दशक के शुरू में लताजी हाई नोट्स गाते समय महसूस करने लगीं कि उनकी आवाज में कोई दिक्कत आ रही है और एकदम सपाट होती जा रही है. ऐसा उनके साथ पहली बार हुआ था. वह परेशान हो गईं. उन्होंने इंदौर के प्रसिद्ध उस्तार अमीर खान से सलाह मांगी. उस्ताद ने कहा कि कुछ दिन के लिए खामोश हो जाओ, यानी मौन व्रत ले लो. जब कुछ महीने तक गाओगी नहीं तो आराम मिलेगा. 

कैसे की वापसी

इस तरह उन्होंने लगभग साल भर तक खुद को आराम दिया और गायकी से एकदम दूर हो गईं. उस समय लता मंगेशकर का करियर शीर्ष पर था. फिर भी उन्होंने पूरी शिद्दत के साथ इस बात को माना. इस ब्रेक के बाद 1962 में उन्होंने फिल्म ‘बीस साल बाद’ से कमबैक किया. इस फिल्म का गाना ‘कहीं दीप जले कहीं दिल’ उनकी पहली रिकॉर्डिंग थी. रिकॉर्डिंग सफल रही और गाने ने इतिहास रच दिया.

लता मंगेशकर को 1963 के फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड मिला. शकील बदायुनी को बेस्ट लिरिसिस्ट का. यह लता जी का दूसरा फिल्मफेयर था (पहला 1959 में मधुमती के ‘आजा रे परदेसी’ के लिए). यह गाना हॉन्टिंग मेलोडिज की लिस्ट में टॉप पर आता है. गायकी को लेकर लता मंगेशकर का कुछ ऐसा प्यार था.

Video: मनोज बाजपेयी इंटरव्यू




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