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रेलवे TTE अब कैमरे के साथ चेक करेंगे टिकट, पैसेंजर के साथ बातचीत-बहस सब रिकॉर्ड होगी! इन 2 ट्रेनों से शुरूआत | Train Ticket Checking by TTT with Special Camera Indian Railways New System Pilot Project in these Trains Prayagraj Mandal NC Railway



ट्रेनों में अब आपके टिकट की जांच कैमरे की निगरानी में होगी. TTE के यूनिफॉर्म में एक कैमरा लगा होगा, जिसमें टीटीई और यात्री के बीच की बातचीत की वीडियो रिकॉर्ड होगी. बहस या विवाद होने की स्थिति में इसकी जांच हो सकेगी कि गलती किसकी है और फिर उसी आधार पर फैसला लिया जाएगा. पायलट प्रोजेक्‍ट के तौर पर इसकी शुरुआत हो चुकी है और इसे चरणबद्ध तरीके से देशभर में लागू किया जा सकता है. उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO, NCR) डॉ शिवम शर्मा ने NDTV को ये जानकारी दी है.

उन्‍होंने बताया कि भारतीय रेलवे ने अपने टिकट चेकिंग स्टॉफ (TTE) को बॉडी वॉर्न कैमरा देने का फैसला किया है. अब से ड्यूटी के दौरान रेल कर्मी इस कैमरे को यूनिफॉर्म के साथ पहनेंगे, जिसमें टिकट जांच के दौरान होने वाली पूरी बातचीत और गतिविधियां, वीडियो-ऑडियो फॉर्मेट में रिकॉर्ड होंगी.

कहां शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट?

रेलवे ने हाल ही इस व्यवस्था को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उत्तर मध्य रेलवे (NCR) के प्रयागराज मंडल में शुरू किया है. अधिकारियों के अनुसार, महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के विशेष निर्देशों पर अभी दो ट्रेनों में इसकी शुरुआत की गई है. इसमें 12417/12418 प्रयागराज एक्सप्रेस (प्रयागराज-नई दिल्ली-प्रयागराज) और  12451/12452 श्रम शक्ति एक्सप्रेस (कानपुर-नई दिल्ली-कानपुर) शामिल है.  

पहले चरण में कैमरे इन ट्रेनों के टिकट चेकिंग स्टाफ को दिए जाएंगे. अगर ये पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो इसे प्रयागराज मंडल की अन्य ट्रेनों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. फिलहाल अभी 30 कैमरे स्टाफ को दिए गए हैं  जिसके लिए दोनों ट्रेनों के स्टाफ को ट्रेनिंग दी जा रही है.

क्यों खास है बॉडी वॉर्न कैमरे?

यह एक छोटा कैमरा होता है, जिसे कर्मचारी अपनी यूनिफॉर्म पर पहनते हैं. टिकट जांच के दौरान यह कैमरा पूरी प्रक्रिया की वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग करता है. इस बॉडी वॉर्न कैमरे की कई प्रमुख विशेषताएं है. ये हाई डेफिनिशन वीडियो रिकॉर्डिंग कैमरा है, जिसमें ऑडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा, रात में भी रिकॉर्डिंग के लिए नाइट विजन के साथ लंबी दूरी की यात्राओं के लिए लंबा बैटरी बैकअप भी उपलब्ध है. इसमें टैम्पर-प्रूफ रिकॉर्डिंग सिस्टम है, जिससे रिकॉर्ड किए गए वीडियो में बदलाव नहीं किया जा सके.

उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO, NCR) डॉ शिवम शर्मा ने कहा, ‘यह नई पहल यात्रियों को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी यात्रा का अनुभव देगी. साथ ही टिकट जांच व्यवस्था को अधिक आधुनिक, प्रभावी और विश्वसनीय बनाएगी.’ अधिकारी के अनुसार, अगर यह पायलट परियोजना सफल रहती है, तो इसे चरणबद्ध तरीके से उत्तर मध्य रेलवे की अन्य ट्रेनों में भी लागू किया जाएगा.

बॉडी वॉर्न कैमरे से क्या बदलेगा?

दरअसल, कई बार ऐसे मामले सामने आए जब टिकट जांच के दौरान यात्रियों और टिकट चेकिंग स्टाफ के बीच विवाद हुआ. ऐसे मामलों में अक्सर यह तय करना मुश्किल होता है कि सही कौन है. इंडियन रेलवे टिकट चेकिंग स्टाफ आर्गेनाईजेशन (IRTCSO) ने भी इसको लेकर चिंता जताते हुए तत्काल कैमरे की मांग की थी.

रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि काफी वक्त से इस प्रकार की कैमरे की मांग की जा रही थी.ऐसे में इसे पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर मध्य रेलवे (CR) और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) जोन के कुछ मंडलों में लागू किया गया था. यह परियोजना उन जगहों पर सफल साबित हुई जिसके बाद अब से उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज मंडल में लागू किया गया है. फिलहाल हम देश भर के विभिन्न मंडलों में चरणबद्ध तरीके से कुछ-कुछ ट्रेनों में धीरे-धीरे लागू कर रहे हैं. अगर इसके नतीजे सही आए तो फिर से देश भर के रेलवे नेटवर्क में लागू किया जाएगा.





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