

नई दिल्ली:
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले ने देशभर के मंदिरों में दिए जा रहे दान और उनकी व्यवस्था को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है. इस वक्त देशभर में 8-10 लाख मंदिर हैं, जिनमें करीब 4 लाख मंदिर और उनके ट्रस्ट राज्य सरकारों के विशेष धार्मिक कानूनों और भारतीय ट्रस्ट अधिनियम 1882 के अंतर्गत संचालित होते हैं. इन मंदिरों के पास 9 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति है जो श्रीलंका, म्यांमार और उज्बेकिस्तान की अर्थव्यवस्था से कहीं ज़्यादा है. यही वजह है कि जहां संपत्ति है, वहां भ्रष्टाचार की शिकायतें भी आती हैं.
इनमें सबसे ज्यादा रजिस्टर्ड मंदिर तमिलनाडु में हैं. यहां करीब 79,154, महाराष्ट्र में 77,283 और पश्चिम बंगाल में 53,658 मंदिर रजिस्टर्ड हैं. जबकि गैर-सरकारी मंदिर आमतौर पर निजी ट्रस्टों, अखाड़ों या पुजारियों के जरिए संचालित होते हैं और इन्हें भारतीय ट्रस्ट अधिनियम 1882 के तहत पंजीकृत किया जाता है. अगर उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां 37,500 से अधिक पंजीकृत (रजिस्टर्ड) मंष्दिर और धार्मिक ट्रस्ट होने का अनुमान है. राज्य के तीन महत्वपूर्ण मंदिर सरकार के पूरे या फिर आंशिक तौर पर नियंत्रण में काम करते हैं. काशी विश्वनाथ मंदिर, बनारस पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में हैं और यहां वाराणसी के कमिश्नर ही बोर्ड आफ ट्रस्टीज के प्रमुख होते हैं. वहीं अयोध्या के राम मंदिर की बात करें तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने 15 सदस्यीय एक ट्रस्ट बनाया है जो इसकी देखरेख और वित्तीय प्रबंध करती है. इसके अलावा मथुरा के बांके बिहारी मंदिर में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश को निगरानी के लिए नियुक्त कर रखा है. अब सवाल उठता है कि श्रद्धालुओं के करोड़ों रुपए मंदिरों में दान देने के भरोसे को कैसे बहाल रखा जाए.
क्यों आया राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला?
अधिवक्ता विष्णु शर्मा कहते हैं कि “यहीं पर सरकार गलती करती है. सुप्रीम कोर्ट पहले ही कई बार कह चुका है कि सरकार का काम मंदिरों को चलाना नहीं है, फिर क्यों सरकार मंदिरों की व्यवस्थाओं में दखल देती है? राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला इसलिए आया क्योंकि सरकार ने नृत्य गोपाल दास के अलावा सभी बाहरी लोगों की नियुक्ति न्यास में कर दी, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला. क्योंकि इन लोगों को मंदिर की व्यवस्था चलाने और दान के पैसों के रख-रखाव का कोई अनुभव ही नहीं था”.
बांके बिहारी मंदिर के खाते में 250 करोड़ से ज्यादा
वो मथुरा के बांके बिहारी मंदिर का उदाहरण देते हुए बताते हैं कि मंदिर के खाते में करीब 250 करोड़ से ज्यादा पैसा जमा है. लेकिन कभी वहां दान के पैसों को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ. हां करीब 15 मुकदमें सुप्रीम कोर्ट में चल रहे हैं लेकिन सब गोसाईयों के आपस के हैं. बांकेबिहारी मंदिर में दो साल पहले एक रिटायर्ड जज को लगाया है कि आने वाले दान की व्यवस्था की देखरेख करेंगे. लेकिन ये कोई हल नहीं है. मंदिर का प्रबंधन वहां से जुड़े परिवार और वित्तीय लेन-देन के लिए बैंकों को लगाना चाहिए,लेकिन सरकार को पूरी तरह अपने कंट्रोल में नहीं लेना चाहिए.
तिरुपति में सालाना 1880 करोड़ का दान
फिर सवाल उठता है कि इस वक्त देश में सबसे ज्यादा दान मिलने के मामले में तिरुमाला देव स्थानम हैं, जहां सालाना दान 1880 करोड़ रुपए जबकि 1000 करोड़ रुपए ऑनलाइन टिकट और प्रसादम के तौर पर आता है. लेकिन यहां मंदिर का ट्रस्ट कैसे काम करता है. इस सवाल के जवाब के तौर पर मशहूर आध्यात्मिक वक्ता दुष्यंत श्रीधर से NDTV ने बात कि वो कहते हैं कि जहां मंदिरों के व्यवस्था से इंसान जुड़ा है वहां भ्रष्टाचार भी होगा. वो कहते तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ट्रस्ट है जो राज्य सरकार कंट्रोल करती है लेकिन यहां दान के मामले में भ्रष्टाचार न हो इसके लिए UPI से दान देने की व्यवस्था को बनाया गया है. इसे लगातार मजबूत किया जा रहा है. गोल्ड या सिल्वर को प्रशासनिक ऑफिस में जाकर दान देने और रसीद काटने की व्यवस्था है. इन कदमों से बहुत हद तक भ्रष्टाचार को रोका गया है. लेकिन ऐसा नहीं है कि दक्षिण के मंदिर पूरी तरह से भ्रष्टाचार से मुक्त हैं.
केरल के इन मंदिरों में भी 1000 किलो से ज्यादा सोना
तमिलनाडु और केरल के मंदिर हजारों साल पुराने हैं और इनके पास सैकड़ों एकड़ जमीन होती थी. यहां उन जमीनों को लेकर कई शिकायतें सामने आई हैं. दुष्यंत कहते हैं कि “राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में भी सबलोग नहीं दोषी हैं बल्कि कुछ लोग हो सकते हैं. तिरुपति मंदिर की तरह माता वैष्णों मंदिर पर श्रद्धालुओं की अगाध श्रद्धा है और बड़े पैमाने पर यहां सोने और चांदी का चढ़ावा चढ़ता है.बीते बीस सालों में 1000 किलो से ज्यादा सोने का चढ़ावा यहां चढ़ा है.”
NDTV ने वैष्णों देवी श्राइन बोर्ड से जुड़े एक अधिकारी से बात की. उनके मुताबिक यहां सोना चांदी ही नहीं बल्कि हर साल करीब 250 करोड़ रुपए का चढ़ावा आता है. ये मंदिर एक बोर्ड के जरिए संचालित होता है जिसके मुखिया गवर्नर होते हैं. वो कहते हैं कि यहां जो भी दान आता है वो पैरामिलिट्री फोर्स की कड़ी सुरक्षा के बीच एक खुले हाल में रुपए की गिनती होती है. पैसों की गिनती करने से पहले सभी कर्मचारियों को बिना जेब वाली डोंगरी पहनाई जाती है जैसे एयरफोर्स के लोग पहनते हैं इसमें पॉकेट नहीं होते हैं. यहां पैरामिलिट्री फोर्स से लेकर अत्याधुनिक तरीके के सीसीटीवी से पूरी मॉनिटरिंग होती है. एक कंट्रोल रुम होता है जिसकी मॉनिटरिंग पैरामिलिट्री फोर्स और बोर्ड से जुड़े लोग करते हैं.
माता वैष्णों देवी मंदिर के सोने का क्या होता है?
जबकि सोने और चांदी का चढ़ावा बाकायदा MMTC और बैंक कर्मचारियों की देखरेख में होता है.बाद में इन सोने और चांदी को एमएमटीसी गलाकर माता वैष्णों देवी के सिक्के बनाती है. लेकिन जानकार मानते हैं कि काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर पुरी और मथुरा तक के मंदिर तक कोई भी विवादों से परे नहीं है.और ये भी सही है कि हजार करोड़ दान और अरबों लोगों की आस्था से जुड़े मंदिर में रातों रात व्यवस्था भी बनाई नहीं जा सकती है.
एक नजर देश के बड़े मंदिरों के सालाना दान पर डालें तो तिरुपति मंदिर में करीब 1880 करोड़ रुपए , वैष्णों देवी मंदिर में करीब 250 करोड़, राम मंदिर में 150 करोड़ रुपए, सिद्धविनायक मंदिर में 100 करोड़, काशी विश्वनाथ मंदिर में 80 करोड़ और जगन्नाथ पुरी मंदिर में 18 करोड़ सालाना दान आता है. जबकि ग्लोबल वेल्थ इंडेक्स (Global Wealth Index) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, भारत के टॉप-10 सबसे अमीर मंदिरों की कुल संपत्ति 9 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की आंकी गई है. सोने की कीमतों में आई भारी तेजी और भक्तों के रिकॉर्ड चढ़ावे के कारण पिछले दो वर्षों में इन मंदिरों की संपत्ति में बड़ा इजाफा हुआ है.
तिरुपति मंदिर के पास 10 टन से ज्यादा सोना
अनुमान के मुताबिक, तिरुमाला तिरुपति मंदिर के पास 3 लाख करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है. ये दुनिया का तीसरा सबसे अमीर धार्मिक स्थल है, जिसकी संपत्ति कई छोटे देशों की जीडीपी (GDP) से भी ज्यादा है. बैंक खातों में 10 टन से ज्यादा सोना जमा है. केरला के पद्मनाभ स्वामी मंदिर, तिरुवनंतपुरम में स्थित इस मंदिर को अपने गुप्त ‘तहखानों’ (Vaults) के लिए जाना जाता है, जहां प्राचीन काल के सोने के सिक्के, हीरे, जवाहरात और मूर्तियां के अलावा ट्रस्ट के पास सैकड़ों एकड़ बेशकीमती जमीन है. जगन्नाथ पुरी मंदिर के पास करीब 112 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति है. इसके बाद केरल का ही गुरुवायर मंदिर है, इसके पास 2500 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है. बड़े पैमाने पर ट्रस्ट के पास जमीनें हैं. माता वैष्णों देवी मंदिर के पास करीब 700 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति है. मंदिर में भक्त 1,800 किलो से अधिक सोना और 4,700 किलो चांदी दान की जा चुकी है.





