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‘मस्जिद से एलर्जी है…’ कदीमी मस्जिद को लेकर असदुद्दीन ओवैसी का साधा केंद्र सरकार पर निशाना | Owaisi Slams Centre Over Proposed Removal of Historic Mosque in Krishi Bhawan Complex for Central Vista Project



AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नई दिल्ली में कृषि भवन कंपाउंड में मौजूद सौ साल पुरानी कदीमी मस्जिद को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसे मस्जिद से एलर्जी है.

असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया है कि सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (सीसीएस) के रीडेवलपमेंट के लिए नई दिल्ली में कृषि भवन कंपाउंड में मौजूद 100 वर्ष पुरानी कदीमी मस्जिद को हटाना होगा. सरकार का तर्क है कि मस्जिद ‘नाजायज है और सरकारी प्रॉपर्टी के सेक्युलर नेचर के साथ मेल नहीं खाती’. मोदी सरकार ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का उद्घाटन भूमि पूजा के साथ किया. साफ है, सेक्युलरिज्म को किसी पब्लिक प्रोजेक्ट के लिए एक धर्म के रीति-रिवाजों के इस्तेमाल से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन उसे एक ऐसी मस्जिद से एलर्जी है जो 1912 से भी पहले से, कृषि भवन के बनने से बहुत पहले से वहां मौजूद है.”

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत कृषि भवन परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. अपने हलफनामे में केंद्र ने कहा है कि कृषि भवन में मौजूद मस्जिद सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष चरित्र के खिलाफ है और इसे हटाया जाना चाहिए. बीते दिन केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि कृषि भवन परिसर में स्थित कदीमी मस्जिद को हटाने की जरूरत है, ताकि सेंट्रल विस्टा रिडेवलपमेंट मास्टर प्लान के तहत कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग 4 और 5 का पुनर्विकास हो सके. सरकार का कहना है कि यह निर्माण राष्ट्रीय महत्व की सर्वोपरि जन परियोजना है और प्रोजेक्ट साइट पर फिलहाल मस्जिद मौजूद होने से इसके कार्यान्वयन में बाधा आ रही है.

हलफनामे में केंद्र सरकार ने स्पष्ट तर्क दिया है कि किसी भी केंद्रीय सरकारी कार्यालय परिसर की सीमा के भीतर स्थायी धार्मिक ढांचा स्थापित करना, बनाए रखना या दावा करना अस्वीकार्य है और यह सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के विपरीत है. सरकार ने कहा कि सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव एरिया में स्थित सार्वजनिक भूमि पर कोई स्थायी धार्मिक निर्माण नहीं हो सकता.

केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा कि कृषि भवन और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट कॉम्प्लेक्स धर्मनिरपेक्ष सार्वजनिक परिसर हैं, जो विशेष रूप से सरकारी, प्रशासनिक और जनसेवा कार्यों के लिए समर्पित हैं. ऐसे में परिसर के भीतर धार्मिक ढांचे को बनाए रखना उचित नहीं है. सरकार ने यह भी बताया कि सीसीएस बिल्डिंग 4 और 5 का निर्माण सेंट्रल विस्टा मास्टर प्लान का अहम हिस्सा है. इस परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए प्रोजेक्ट साइट पर मौजूद मस्जिद को हटाना जरूरी है.

केंद्र ने कोर्ट को यह भी जानकारी दी कि कृषि भवन के आसपास दो किलोमीटर के दायरे में शाही मस्जिद जाब्तागंज स्थित है, जो आसपास के किसी भी व्यक्ति को नमाज की पूरी सुविधा प्रदान करने के लिए पूरी तरह सक्षम है. ऐसे में कृषि भवन परिसर के भीतर अलग से मस्जिद की आवश्यकता नहीं है.





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