
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को ‘स्मार्ट’ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए बड़े-बड़े दावों के साथ शुरू की गई स्मार्ट साइकिल परियोजना (Smart Cycle Project) आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है. जनता की गाढ़ी कमाई के करीब 10 करोड़ रुपये जिस योजना पर खर्च किए गए, उसकी सैकड़ों स्मार्ट साइकिलें आज भोपाल के ISBT परिसर में जंग खाकर कबाड़ बन चुकी हैं. करोड़ों की लागत से बना साइकिल ट्रैक भी गड्ढों में तब्दील हो चुका है.
भोपाल के अंतरराज्यीय बस अड्डे (ISBT) स्थित नगर निगम के गोदाम में जाने पर जो तस्वीरें सामने आती हैं, वे किसी कबाड़खाने से कम नहीं लगतीं. सैकड़ों स्मार्ट साइकिलें और ई-बाइक्स (E-Bikes) यहां धूल और जंग के बीच पड़ी हैं. कई साइकिलों के टायर गायब हो चुके हैं, तो कई के पार्ट्स पूरी तरह टूट चुके हैं. करोड़ों रुपये खर्च कर खरीदी गई ये साइकिलें अब सड़कों पर दौड़ने के बजाय केवल कबाड़ का ढेर बनकर रह गई हैं.
गड्ढों में तब्दील हुआ साइकिल ट्रैक
साल 2017-18 में साइकिल चलाने वालों के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर एक विशेष ट्रैक बनाया गया था. लेकिन आज ग्राउंड रिपोर्ट में इसकी हालत बेहद खस्ताहाल नजर आती है. जहां कभी लोग साइकिल चलाते थे, वहां अब जगह-जगह सिर्फ गड्ढे हैं. ट्रैक की सतह पूरी तरह टूट चुकी है. केवल सड़क पर बनी साइकिल की धुंधली पेंटिंग ही इस योजना की याद दिलाती है.
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कितना हुआ था खर्च?
- कुल खर्च: स्मार्ट साइकिल परियोजना पर करीब 9.5 से ₹10 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे.
- साइकिल ट्रैक: 12 किलोमीटर लंबे साइकिल ट्रैक के निर्माण पर करीब 4.5 करोड़ रुपये खर्च हुए.
- शेयरिंग सिस्टम: 500 जीपीएस युक्त स्मार्ट साइकिलें, 50 डॉकिंग स्टेशन, मोबाइल ऐप और शेयरिंग सिस्टम पर करीब 5 करोड़ रुपये खर्च हुए.
- रखरखाव: साल 2023 में ट्रैक की सफाई और रखरखाव के लिए नगर निगम ने 35 लाख रुपये का एक अलग टेंडर भी जारी किया था. इसके बावजूद आज कोई भी व्यवस्था काम नहीं कर रही है.
महापौर का बयान और कांग्रेस के आरोप
इस बदहाली पर जब भोपाल की महापौर मालती राय (Malti Rai) से सवाल किया गया, तो उन्होंने जिम्मेदारी स्मार्ट सिटी परियोजना पर डाल दी. महापौर मालती राय ने कहा, “यह स्मार्ट सिटी का प्रोजेक्ट है. परियोजना को दोबारा शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द ही इसे फिर से चालू करने की कोशिश की जाएगी.”
वहीं, इस मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार और नगर निगम को घेरते हुए जनता के पैसे की बर्बादी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं. कांग्रेस नेता अभिनव बरोलिया ने कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर केवल जनता के करोड़ों रुपयों को ठिकाने लगाया गया है.
जवाबदेही किसकी?
सवाल सिर्फ साइकिलों के कबाड़ बनने का नहीं है, बल्कि उन करोड़ों रुपयों का है जो जनता के टैक्स से इस परियोजना में लगाए गए थे. अगर इस योजना को सही से चलाना ही नहीं था, तो इतने बड़े निवेश का क्या औचित्य था? फिलहाल, भोपाल की स्मार्ट साइकिल परियोजना सरकारी योजनाओं की विफलता और बदहाल हकीकत बयां कर रही है.
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