

दिल्ली के दिलशाद गार्डन इलाके में कार चोरी के एक बेहद अनोखे मामले का खुलासा हुआ है. जिस कार को चोरी बताया गया था, उसे किसी बाहरी गिरोह ने नहीं बल्कि उसके पूर्व मालिक ने ही अपने दोस्त के साथ मिलकर गायब किया था. पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर चोरी की कार और नकदी बरामद कर ली है. पुलिस के मुताबिक शिकायतकर्ता ने 8 अक्टूबर को अपनी सेडान कार दिलशाद गार्डन इलाके में खड़ी की थी. हैरानी की बात यह रही कि कार पार्क करने के महज चार मिनट बाद ही गायब हो गई. वाहन के अंदर करीब दो लाख रुपये नकद भी रखे हुए थे. घटना की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की.
100 से ज्यादा CCTV और FASTag से मिला सुराग
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने इलाके और आसपास के 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. साथ ही वाहन के FASTag रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया. जांच के दौरान कार की लोकेशन हरियाणा के सोनीपत में मिलने की जानकारी सामने आई. यहीं से पुलिस का शक कार के पुराने मालिक योगेश दहिया पर गया.
GPS और तीसरी चाबी से रची पूरी साजिश
जांच में पता चला कि योगेश दहिया ने कार बेचने से पहले उसमें लगा जीपीएस सिस्टम सक्रिय रखा था. उसके पास वाहन की तीसरी चाबी भी मौजूद थी. जीपीएस के जरिए उसने कार की लोकेशन ट्रैक की और अपने दोस्त साहिल रोहिल्ला के साथ पहुंचकर पुरानी चाबी से कार खोल ली. इसके बाद दोनों कार लेकर फरार हो गए.
बचने के लिए दोस्त के पास छिपाई कार
पुलिस के अनुसार चोरी के बाद कार को सीधे साहिल रोहिल्ला के पास छिपाकर रखा गया ताकि किसी को शक न हो. पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. पुलिस ने योगेश के घर से 39,500 रुपये और साहिल के पास से 50,000 रुपये बरामद किए. साहिल ने बताया कि वह चोरी की रकम में से 25,000 रुपये खर्च भी कर चुका था.
दोनों आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर चोरी की कार बरामद कर ली है. मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपियों ने पहले भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम दिया है या नहीं. यह मामला दिखाता है कि तकनीक का गलत इस्तेमाल किस तरह अपराध को अंजाम देने के लिए किया जा सकता है.
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