

पटना:
बिहार की राजधानी पटना के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव के लिए वोटिंग समाप्त हो गई. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 34. 30% वोटिंग हुई. आज तीन सीटों पर हो रहे उपचुनाव में सबसे कम वोटिंग बांकीपुर में ही हुई. पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले यह 6% कम है. इस कम वोटिंग ने सभी विश्लेषकों को चौंका दिया है, क्योंकि यह उम्मीद की जा रही थी कि भाजपा, जनसुराज दोनों ने जिस तरह की ताकत झोंकी है, इससे दोनों खेमे बड़ी संख्या में वोटर को निकाल कर लाएंगे और वोटिंग बढ़ेगी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. RJD कहीं भी मुकाबले में नहीं दिखी, न ही मतदाताओं में RJD को लेकर उत्साह नजर आया. आखिर कम वोटिंग से किसको नफा, किसे नुकसान होगा? यह जानने के लिए हमने भाजपा, जनसुराज के नेताओं से राजनीतिक विश्लेषकों से बातचीत की.
कम वोटिंग से भाजपा पर क्या असर होगा? यह सवाल हमने भाजपा नेता, पूर्व मंत्री आलोक रंजन से पूछा. आलोक रंजन शक्ति केंद्र के जरिए कई बूथों पर नजर बनाए हुए थे. उन्होंने कहा, “इस बात वोटिंग कम हुई है. लेकिन हमारे प्रभाव वाले बूथों पर वोटिंग में ज्यादा गिरावट नहीं है. हमारे प्रभाव वाले बूथ पर औसतन 20-25 वोटर कम आये हैं जो लगभग 2 से ढाई फीसदी है. लेकिन दूसरे बूथों पर गिरावट ज्यादा है. यानी हमारे वोटर निकल कर आए हैं.”
नाम न उजागर करने की शर्त पर भाजपा के प्रदेश स्तर के एक पदाधिकारी कम वोटिंग को नुकसान मानते हैं. वे कहते हैं, “आमतौर पर कम वोटिंग सत्ता पक्ष को फायदा पहुंचाती है. लेकिन आज स्थिति उलट है. हमारे मतदाताओं में वह उत्साह नहीं था. मुझे लग रहा है कि हमारे वोटर कम निकले.”
जनसुराज को बेहतर परिणाम की उम्मीद
जनसुराज कैंप आज हुई वोटिंग से काफी उत्साहित नजर आ रहा है. बांकीपुर विधानसभा के प्रभारी रामबली चंद्रवंशी कहते हैं, “हमें सभी वर्ग का समर्थन मिला है. आप किसी भी बूथ पर देख लीजिए. हमारा वोटर आपको नजर आयेगा जो बदलाव की बात कर रहा है.”
पार्टी के वरिष्ठ नेता किशोर कुमार मुन्ना प्रशासन पर भाजपा को मदद पहुंचाने का आरोप लगाते हैं. वे कहते हैं, “प्रशासन ने एकतरफा कार्रवाई की है. कई बूथ पर हमारे कार्यकर्ताओं को हटाया गया. अगर भाजपा जीत रही थी तो उसे प्रशासन की मिलीभगत से यह सब करने की जरूरत नहीं थी. यह साफ बता रहा है कि वे कितने निराश हैं.”
सबसे कम मार्जिन से तय होगी जीत – हार?
राजनीतिक विश्लेषक वर्वी उपाध्याय कहते हैं भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनाव सबसे ज्यादा मुश्किल भरा रहा है. प्रत्याशी के चयन से लेकर वोटिंग के दिन तक जन सुराज हावी दिखा है. प्रशांत किशोर दोनों पक्षों का वोट अपने पाले में लाने में सफल रहे हैं. भाजपा ने संगठन की ताकत से इस चुनाव में वापसी जरूर की है. लेकिन क्या यह वापसी उन्हें जीत दिला पाएगी, यह सवाल बना हुआ है.
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में आमतौर पर वोटिंग कम होती है. लेकिन SIR के बाद इतनी कम पोलिंग की संभावना नहीं थी. यहां 3 लाख 79 हजार मतदाता हैं. आंकड़ों के मुताबिक करीब 1 लाख 30 हजार मतदाताओं ने वोट डाले हैं. पिछले चुनाव में 1 लाख 56 हजार मतदाताओं ने वोट डाले थे. इस आंकड़े ने सभी कैंप को कंफ्यूज कर दिया है. भले ही सभी कैंप अपने जीत के दावे करें लेकिन मतदाताओं की बेरुखी ने कैंप का टास्क बढ़ा दिया है.
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