

नई दिल्ली:
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा ने आरोप लगाया है कि दिल्ली में राजस्थान सरकार द्वारा संचालित ‘बीकानेर हाउस’ ने उन्हें अपनी प्रदर्शनी ‘नो आइडिया इज फाइनल’ से ज्यादातर तस्वीरें हटाने के लिए कहा. इस प्रदर्शनी में राष्ट्रीय राजधानी में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों को दिखाया गया था. यह घटना बुधवार शाम प्रदर्शनी शुरू होने से कुछ घंटे पहले हुई. रेहान वाड्रा ने कहा, “ये तस्वीरें दिल्ली में युवाओं के विरोध प्रदर्शनों की थीं.” उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा कि शायद यह ‘आपत्तिजनक’ है. इस बारे में NDTV से बात करते हुए रेहान वाड्रा ने आगे कहा, “मेरा मकसद अपने देश में अपने आस-पास हो रहे आंदोलनों को दस्तावेज के रूप में सहेजना था. कलात्मक नजरिए से, मेरा विचार इन आंदोलनों की उस लय को कैनवास में को कैद करना था, जो तब पैदा होती है, जब लोग एक साथ आते हैं.”
रेहान वाड्रा ने बताया कि उनसे कहा गया था कि वे प्रदर्शनी से 105 में से 75 तस्वीरें हटा दें, वरना प्रदर्शनी रद्द कर दी जाएगी. इनमें दो ऐसी तस्वीरें थीं जिनमें तिरंगा (राष्ट्रीय ध्वज) दिख रहा था. उन्होंने शुरुआत में खासकर उन दो तस्वीरों को हटाने से मना कर दिया था. रेहान वाड्रा ने NDTV को बताया कि जब वे कार्यक्रम स्थल से बाहर गए, तो बीकानेर हाउस के कर्मचारियों ने उन दो तस्वीरों में से एक को हटा दिया. कुल मिलाकर, 74 तस्वीरें हटानी पड़ीं.
एनडीटीवी ने जब इस बारे में बीकानेर हाउस के अधिकारियों से बात करनी चाही, तो उन्होंने सवालों का कोई जवाब नहीं दिया.
पिछले कुछ हफ्तों में मतदाता सूची में कथित धांधली को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं. रेहान की मां यानि लोकसभा सदस्य प्रियंका गांधी, विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में हो रहे इन विरोध प्रदर्शनों का एक प्रमुख चेहरा रही हैं. इसके अलावा, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और अन्य समूहों ने भी प्रदर्शन किए हैं.
किसने और क्यों हटवाईं रेहान वाड्रा की तस्वीरें?
रेहान वाड्रा जब उनसे पूछा गया कि उन्हें तस्वीरें हटाने के लिए किसने और क्यों कहा, तो उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी शुरू होने से कुछ घंटे पहले, दोपहर 3:30 बजे उन्हें तस्वीरें हटाने के लिए एक लिखित अनुरोध मिला. उन्होंने NDTV को बताया, “इस पर डिप्टी रेजिडेंट कमिश्नर मनोज सिंह के साइन थे.” उन्होंने कहा कि इस लिखित अनुरोध में वेन्यू की बुकिंग पॉलिसी का पालन न करने का हवाला दिया गया था. उन्होंने आगे बताया, “इससे पहले, प्रिंसिपल रेजिडेंट कमिश्नर ने मुझसे ये तस्वीरें हटाने के लिए कहा था. उनका कहना था कि इन तस्वीरों को दिखाने की टाइमिंग और कॉन्टेक्स्ट सही नहीं है.”
रेहान वाड्रा ने 15 अक्टूबर को भेजा था तस्वीरों का लेआउट
प्रिंसिपल रेजिडेंट कमिश्नर रोहित कुमार ने सवालों का कोई जवाब नहीं दिया, और न ही बीकानेर हाउस की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया. हालांकि, सूत्रों ने NDTV को बताया कि रेहान वाड्रा से कुछ ऐसी तस्वीरें हटाने के लिए कहा गया था, जिनसे ‘राजनीतिक विवाद खड़ा हो सकता था.’ रेहान वाड्रा ने बताया, “बीकानेर हाउस की पॉलिसी के मुताबिकर, मुझे तस्वीरें मंजूरी के लिए भेजने की जरूरत नहीं थी. मैंने 15 अक्टूबर को उन्हें एक लेआउट भेजा था, जिसे लेकर आज उन्होंने पहली बार कहा कि वे उसे देख ही नहीं पाए. उस लेआउट में वे तस्वीरें शामिल थीं जिन्हें मैं प्रदर्शित करना चाहता था. मैंने उन्हें बताया था कि मैं बाद में उनके साथ एक कैटलॉग शेयर करूंगा. उस समय उन्होंने कोई आपत्ति नहीं जताई, और न ही यह स्पष्ट किया कि कैटलॉग शेयर करने का मतलब तस्वीरों को मंजूरी देना या न देना होगा.” उन्होंने आगे बताया कि प्रबंधन ने लेआउट पर केवल “नोटेड” (ध्यान दिया गया) लिखकर जवाब दिया था.”
किसी भी कलाकार के काम को सीमित न किया जाए
क्या रेहान वाड्रा की तस्वीरों को इसलिए हटवाया गया, क्योंकि वह एक पॉलिटिकल बैकग्राउं वाली फैमिली से आते हैं? इस पर रेहान वाड्रा ने NDTV से कहा, “संभव है, लेकिन मेरा कहना बस इतना है- चाहे मैं होऊं या कोई अन्य कलाकार, और चाहे उनकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो, किसी के भी काम को सीमित नहीं किया जाना चाहिए. सार्वजनिक स्थानों की यह जिम्मेदारी है कि वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को रोके बिना कला को प्रदर्शित करें.”
कांग्रेस का वार- तिरंगा भी सेंसर की कैंची से नहीं…
कांग्रेस ने इसके लिए केंद्र और राज्य की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया है. पार्टी के सांसद और प्रवक्ता पवन खेड़ा ने ‘एक्स’ पर लिखा, “जब तिरंगा भी सेंसर की कैंची से नहीं बच पा रहा है, तो शायद समस्या कला में नहीं, बल्कि सत्ता में है.” खेड़ा ने आगे कहा, “इन तस्वीरों में केवल विरोध-प्रदर्शनों को दिखाया गया था, और इनमें से कोई भी तस्वीर अपमानजनक या भड़काऊ नहीं थी. तो फिर गलती क्या थी? रेहान को जिन कामों को शामिल रखने के लिए ‘संघर्ष’ करना पड़ा, उनमें से एक भारतीय तिरंगे की तस्वीर थी. जब इन तस्वीरों को हटाया गया, तो कला के लिए बनी दीवारों पर सिर्फ लोहे की कीलें ही बची थीं, जो स्पॉटलाइट की रोशनी में चमक रही थीं…!”
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रेहान वाड्रा प्रदर्शित न हो सकी 74 तस्वीरों का क्या करेंगे?
इस मुद्दे पर बीजेपी की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. आगे की योजना के बारे में पूछे जाने पर रेहान वाड्रा ने कहा, “मेरी योजना इन तस्वीरों को कहीं और प्रदर्शित करने की है. मैंने इनमें से काफी तस्वीरें पहले ही अपने इंस्टाग्राम पर शेयर कर दी हैं. इन्हें कहां और कब प्रदर्शित करना है, इस पर मैं अभी विचार कर रहा हूं.” यह प्रदर्शनी बीकानेर हाउस स्थित ‘सेंटर फॉर कंटेंपरेरी आर्ट’ में 25 अक्टूबर तक चलेगी, जिसे सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे के बीच देखा जा सकता है.
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