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बिना चोट पैरों पर नीले निशान पड़ने के क्या कारण हैं? किन बीमारियों की ओर करता है इशारा



पैरों पर अचानक बैंगनी या नीले रंग के निशान दिखाई देने पर अक्सर हम इसे सामान्य चोट समझकर इग्नोर कर देते हैं. कई बार हम चोट लगने पर ध्यान देते हैं कि आखिर चोट कहां लगी, लेकिन ध्यान नहीं रहता. अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो शायद हो सकता है कि नीला निशान किसी अन्य कारणों से हो. जी हां, कई बार बिना चोट लगे भी पैरों पर नीले निशान दिखाई देते हैं. 

सीके बिड़ला हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन के कंसल्टेंट डॉ. अमित प्रकाश सिंह का कहना है कि कई बार हल्की टक्कर, दबाव या ऐसी चोट जिसे व्यक्ति महसूस भी नहीं कर पाता, उसके कारण भी पैरों के स्किन के नीचे रक्त जमा हो जाता है और नीले या बैंगनी रंग के निशान दिखाई देने लगते हैं. लेकिन अगर ये समस्या बार-बार हो रही है, तो इसकी वजह पोषण की कमी, खून से जुड़ी बीमारी या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या से भी जुड़ी हो सकती है.

विटामिन की कमी भी हो सकती है वजह

डॉ. सिंह का कहना है कि शरीर में विटामिन C और विटामिन K की कमी होने पर रक्त वाहिकाएं कमजोर हो सकती हैं और खून के थक्के बनने की प्रोसेस प्रभावित हो सकती है. ऐसी स्थिति में मामूली दबाव से भी ब्रूज बनने लगते हैं. बढ़ती उम्र भी एक महत्वपूर्ण कारण है. उम्र के साथ त्वचा पतली होने लगती है और रक्त वाहिकाएं अधिक नाजुक हो जाती हैं, जिससे बिना किसी बड़ी चोट के भी निशान पड़ सकते हैं.

खून और लिवर से जुड़ी समस्याओं का संकेत

डॉक्टर कहते हैं कि कुछ मामलों में बार-बार होने वाले ब्रूज लो प्लेटलेट काउंट या ब्लड क्लॉटिंग से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकते हैं. जब शरीर सामान्य तरीके से खून का बहना रोक नहीं पाता, तब स्किन पर ऐसे निशान बनने लगते हैं. इसके अलावा लिवर से जुड़ी बीमारियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं, क्योंकि लिवर खून जमाने वाले महत्वपूर्ण प्रोटीन बनाने में अहम भूमिका निभाता है.

कुछ दवाएं भी बढ़ाती हैं रिस्क

ब्लड थिनर, एंटीप्लेटलेट दवाएं और लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने वाले लोगों में भी ब्रूज बनने की संभावना अधिक होती है. इसलिए अगर आप ऐसी कोई दवा ले रहे हैं और शरीर पर बार-बार नीले निशान दिख रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

पीले निशान के साथ इन लक्षणों को न करें इग्नोर

अगर ये निशान बार-बार बन रहे हों, आकार में बड़े हों, जल्दी-जल्दी बढ़ रहे हों या लंबे समय तक ठीक न हों, तो मेडिकल जांच करवानी चाहिए. इसके साथ कुछ अन्य लक्षण दिखे, जैसे- बार-बार नाक से खून आना, मसूड़ों से खून निकलना, अत्यधिक थकान, बुखार या त्वचा पर छोटे लाल-बैंगनी धब्बे दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

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