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झारखंड में भीषण बारिश के बीच रेलवे स्टेशन बना ‘पावर हाउस’! बिजली गुल होने के बाद फोन चार्ज करने पहुंचे लोग | jharkhand Railway station power house for locals crowds charging phones power cut rain cyclone arnab


रांची:

झारखंड में लगातार हो रही बारिश के बीच शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बिजली आपूर्ति प्रभावित बुरी तरह हुई है. कई गांवों में लंबे वक्त तक बिजली नहीं रहने की वजह से लोगों को मोबाइल चार्ज करने के लिए रेलवे स्टेशनों का सहारा लेना पड़ रहा है. ये तस्वीर रांची के ग्रामीण इलाके जोन्हा की है, जहां बड़ी तादाद में गांव के लोग स्टेशन पहुंचकर अपने मोबाइल फोन चार्ज कर रहे हैं. बिजली गुल रहने से मोबाइल बंद होने की चिंता के बीच रेलवे स्टेशन लोगों के लिए फिलहाल चार्जिंग का आसान ठिकाना बन गए हैं. स्टेशन पर मोबाइल चार्ज करने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ गई. लोग इलेक्ट्रिक एक्सटेंशन बोर्ड और चार्जर लेकर फोन चार्ज करने लिए स्टेशन पहुंच गए.

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गुरुवार रात से ही रांची में बिजली सप्लाई बुरी तरह बाधित थी, क्योंकि उखड़े हुए पेड़ों की वजह से हाई-टेंशन तार टूट गए थे और बिजली का इंफ्रास्ट्रक्चर क्षतिग्रस्त हो गया था. सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में नामकुम शामिल था, जहां चार मुख्य फीडर लाली, सिदराउल, रामपुर और पालंडू लगातार तीसरे दिन भी बंद रहे.

अचानक क्यों बदल गया मौसम?

बंगाल की खाड़ी में डीप लो प्रेशर का क्षेत्र बनने से झारखंड में पिछले कई घंटों से रुक-रुक कर बारिश हो रही है. इससे नागरिकों की रोजमर्रा जिंदगी पर खास असर पड़ा है. कई इलाकों में पेड़ और खंभे गिरने से बिजली आपूर्ति व्यवस्था बुरा तरह प्रभावित हुई. रांची सहित कई जिलों में शनिवार को स्कूल बंद रखा गया. यह हालात अर्नब चक्रवात की वजह से बने.

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गुरुवार सुबह आंध्र प्रदेश में दाखिल हुआ बंगाल की खाड़ी के चक्रवाती सिस्टम का असर झारखंड पर खासतौर से पड़ा. बारिश की वजह से पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा है और ट्रांसपोर्ट पर भी असर पड़ा है. शुक्रवार सुबह 5:30 बजे, भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि यह सिस्टम दक्षिण ओडिशा के अंदरूनी इलाकों और उससे सटे छत्तीसगढ़ के नुआपाडा के पास केंद्रित था. यह टिटलागढ़ से करीब 90 किलोमीटर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम, भवानीपटना से 100 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम, कांकेर से 110 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व और रायपुर से 120 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित था.

इस मौसम सिस्टम की वजह से कुछ इलाकों में भूस्खलन, जलभराव और बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई, जिससे अधिकारियों को जोखिम वाले इलाकों से हज़ारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा. 




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