

लखनऊ:
क्या यूपी विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन में मौजूद कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट शेयरिंग का विवाद बढ़ रहा है? ये सवाल इसलिए क्योंकि बीते एक हफ़्ते में जो घटनाक्रम घटे हैं, वो इंडिया गठबंधन के लिए शुभ संकेत तो कतई नहीं माने जा सकते. यूपी की 403 सीटों में एसपी खुद 350 सीटों पर लड़ना चाहती है वहीं कांग्रेस 200 का दावा करते करते कुछ कमी भी करती है तो कम से कम 150 सीटों से कम पर मानने पर तैयार नहीं दिखाई दे रही.
अखिलेश का दांव
कांग्रेस ने बीते दो दिनों में एक तरफ इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की घोषणा की. इसके बाद स्वामी प्रसाद मौर्य और अपना दल (कमेरावादी) के नेता पंकज निरंजन से कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मुलाकात. इन घोषणाओं और मुलाकातों के बीच एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव का सोशल मीडिया में पोस्ट कर ये कहना कि “बात सीट की नहीं जीत की है”. इससे पहले 30 सितंबर को इंडिया गठबंधन की बैठक में अखिलेश यादव ना खुद गए, ना अपनी पार्टी के किसी बहुत वरिष्ठ की बैठक का हिस्सा बनाया.
बड़े भाई- छोटे भाई की लड़ाई
दरअसल, इंडिया गठबंधन में मसला कुल मिलाकर सीटों का है. कांग्रेस खुद को बड़ी पार्टी मानकर बड़ा भाई बताती रही है. वहीं एसपी ये जताने में पीछे नहीं हटती कि जब बात यूपी की होगी तो बड़े भाई की भूमिका एसपी की ही है. ये बात आंकड़ों से भी साफ होती है. यूपी से लोकसभा के एसपी के 37 सांसद हैं, वहीं कांग्रेस के कुल छह सांसद. बात विधानसभा की करें तो 2022 में एसपी ने 111 सीटें जीतीं वहीं कांग्रेस को मात्र दो सीटों पर जीत हासिल हुई.
जिताऊ कैंडिडेट की लिस्ट मांग रही एसपी
समाजवादी पार्टी के सूत्र बताते हैं कि एसपी सिर्फ जीत की गारंटी चाहती है. इसीलिए वो कांग्रेस से कह रही है कि अगर 50 से ज्यादा सीटें चाहिए तो उसे जिताऊ प्रत्याशियों की सूची देनी होगी. कांग्रेस का कहना है कि वो सूची क्यों दें. सीट शेयरिंग फाइनल होने के बाद वो तय करेंगे कि कौन किस सीट पर लड़ेगा. इस लड़ाई के बीच बीते एक हफ्ते में जो घटनाक्रम हुए, वो कहीं ना कहीं इंडिया गठबंधन के लिए अच्छे संकेत नहीं माने जा सकते.
बड़े मौकों पर एसपी ने दिखाए तेवर
शुरुआत इंडिया गठबंधन की बैठक से करते हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त के मसले पर बुलाई गई इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होने से अखिलेश यादव ने ये कहते हुए मना कर दिया कि उनका पूर्व निर्धारित कार्यक्रम है. फिर तय हुआ कि प्रोफ़ेसर रामगोपाल यादव बैठक के एसपी का प्रतिनिधित्व करेंगे. इसके बाद उनका राज्यसभा के लिए नामांकन के लिए वही तारीख चुन ली गई, जिस दिन इंडिया गठबंधन को साथ बैठना था. एसपी की तरफ से सांसद हरेंद्र मलिक और मोहिबुल्ला नदवी ने हिस्सा लिया. इसके बाद कांग्रेस ने एक तरह से एसपी को आंख दिखाने का काम किया. सबसे पहले गठबंधन के खिलाफ सबसे ज्यादा बोलने वाले सांसद इमरान मसूद को यूपी कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर सीधा संकेत से दिया कि कांग्रेस कम सीटों से नहीं मानने वाली. इमरान मसूद ने नियुक्ति के बाद भी अपने तेवरों में कोई कमी नहीं की और अपने उसी रुख पर अड़े दिखाई दिए कि कांग्रेस को बराबरी चाहिए.
कांग्रेस अखिलेश को दे रही है संकेत
इसके बाद राहुल गांधी ने एसपी से बाहर हुए स्वामी प्रसाद मौर्य और एसपी के सिंबल पर विधायक बनीं अपना दल (के) की नेता पल्लवी पटेल के पति पंकज निरंजन से मुलाकात कर उन्हें इंडिया गठबंधन का संभावित हिस्सेदार बनाए जाने के संकेत दे दिए. ये संकेत इंडिया गठबंधन के एक्सपेंशन का है या ये संकेत अखिलेश यादव को है कि यूपी में कांग्रेस छोटे दलों के साथ अलग से चुनाव लड़ सकती है, इस सवाल का जवाब मिलना अभी बाकी है. स्वामी प्रसाद मौर्य की सपा से विदाई के बाद वो अखिलेश यादव को भी अपने बयानों में नहीं बख्शते थे. इसी तरह 2022 में एसपी से गठबंधन करने वाली अपना दल (के) की नेता पल्लवी पटेल ने एसपी के संबल पर चुनाव जीता लेकिन जीतने के बाद वो एसपी के साथ कम और कांग्रेस के साथ ज्यादा खड़ी दिखाई दीं. ऐसे में स्वामी प्रसाद और पल्लवी पटेल से मिलने से पहले क्या राहुल गांधी के अखिलेश यादव से संपर्क किया, या ये अखिलेश यादव को राहुल गांधी का मैसेज है, ये देखना दिलचस्प होगा.
अखिलेश की इशारे वाली राजनीति
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का सीटों को लेकर विवाद नया नहीं है. एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव मध्य प्रदेश में हुए तिरस्कार को शायद कभी ना भूल पाएं जब एसपी नेताओं को कमलनाथ ने बेआबरू करके घर से बैरंग लौटा दिया था. इसी तरह महाराष्ट्र से लेकर अन्य कई राज्यों में कांग्रेस जहां बड़े भाई की भूमिका में है, वहां एसपी को कुछ देना नहीं चाहती लेकिन यूपी में एसपी से ज्यादा से ज्यादा लेना चाहती है. कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में भी अंत तक एसपी से जमकर बार्गेनिंग की थी और अंत में कांग्रेस को 17 सीटें ले लीं. एसपी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस को लेकर एसपी प्रमुख अखिलेश यादव सशंकित रहते हैं. इसीलिए वो अपनी तैयारी ज्यादा से ज्यादा सीटों पर कर रहे हैं. क्योंकि अगर सीट विवाद की वजह से गठबंधन पर संकट आया तो जाहिर है अखिलेश यादव को नए सिरे से नए साथी की तलाश करनी होगी. फिलहाल एसपी के पास नए साथी का विकल्प दिखाई नहीं दे रहा है. इसी वजह से अखिलेश यादव ने कल फिर से इशारों इशारों से कांग्रेस से कहा दिया..
“मकसद जब साफ हो तो हाथ-में-हाथ होता है,
निगाह मंजिल पर हो तो सफर आसान होता है!”
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