धर्म

बांके बिहारी की मंगला आरती साल में केवल जन्माष्टमी पर क्यों? रात 2 बजे दर्शन के पीछे छिपी है खास परंपरा


Banke Bihari Mandir: वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव अपने आप में बेहद खास होता है. देशभर के कृष्ण मंदिरों में जन्माष्टमी के बाद मंगला आरती होती है, लेकिन बांके बिहारी मंदिर की परंपरा सबसे अलग है.

यहां मंगला आरती साल में केवल एक बार, जन्माष्टमी की रात के बाद ही होती है. मंदिर की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि में महाभिषेक के बाद करीब 2 बजे से विशेष दर्शन शुरू होते हैं और मंगला आरती लगभग 3:30 बजे की जाती है.

मंगला आरती क्या है, इसका महत्व

सनातन परंपरा में मंगला आरती का अर्थ है भगवान को सुबह प्रेमपूर्वक जगाना और दिन की पहली सेवा करना. आमतौर पर यह सूर्योदय से पहले की जाती है. लेकिन बांके बिहारी मंदिर में ठाकुर जी को बाल स्वरूप में मानकर उनकी सेवा की जाती है इसलिए यहां उनकी दिनचर्या भी एक बालक की तरह मानी जाती है समय पर भोग, विश्राम और सेवा.

जन्माष्टमी के अलावा क्यों नहीं होती मंगला आरती

बांके बिहारी मंदिर की विशिष्ट परंपरा के अनुसार आम दिनों में ठाकुर जी को सुबह बहुत जल्दी जगाकर मंगला आरती नहीं की जाती. ब्रज की लोक आस्था में इसका संबंध निधिवन की रात्रिकालीन रासलीला से भी जोड़ा जाता है. मान्यता है कि ठाकुर जी रात में निधिवन में रास रचाने जाते हैं और देर रात लौटकर विश्राम करते हैं इसलिए सुबह उन्हें जगाना उचित नहीं माना जाता. हालांकि ये धार्मिक मान्यता है.

फिर जन्माष्टमी पर क्यों खुलते हैं रात में पट?

  • जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का उत्सव है. इसलिए इस दिन ठाकुर जी की सेवा पद्धति में विशेष बदलाव होता है.
  • मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक जन्माष्टमी की रात शयन आरती के बाद ठाकुर जी विश्राम करते हैं.
  • मध्यरात्रि में गर्भगृह में महाभिषेक होता है, जिसमें दूध, दही, शहद, घी और जल से अभिषेक किया जाता है.
  • इसके बाद उन्हें विशेष वस्त्र और आभूषण पहनाए जाते हैं. फिर करीब अभिषेक के बाद दर्शन शुरू होते हैं.
  • यही कारण है कि जन्माष्टमी की रात होने वाला दर्शन सामान्य सुबह के दर्शन से बिल्कुल अलग माना जाता है.
  • भक्त अपने आराध्य के जन्मोत्सव के तुरंत बाद बालकृष्ण के रूप में दर्शन करते हैं.

निधिवन और कान्हा का संबंध

निधिवन श्रीकृष्ण और राधा की रासलीला का प्रमुख स्थल रहा है. यहां लगे तुलसी के पौधों को भी भक्त विशेष श्रद्धा से देखते हैं और मान्यता है कि रात में ये गोपियों का स्वरूप धारण करते हैं. निधिवन में स्थित रंग महल को लेकर मान्यता है कि रात्रि में राधा-कृष्ण यहां विश्राम करते हैं. इसी वजह से सूर्यास्त के बाद निधिवन के अंदर किसी के रुकने की परंपरा नहीं है.

FAQs

1. बांके बिहारी मंदिर में मंगला आरती साल में केवल एक बार क्यों होती है?
बाल स्वरूप ठाकुर जी को रात में विश्राम कराने की मान्यता के कारण सामान्य दिनों में उन्हें सुबह जल्दी नहीं जगाया जाता, जबकि जन्माष्टमी पर विशेष मंगला आरती की जाती है.

2. जन्माष्टमी पर बांके बिहारी मंदिर में रात में दर्शन क्यों होते हैं?
जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण का महाभिषेक और विशेष श्रृंगार किया जाता है, जिसके बाद भक्तों के लिए विशेष दर्शन खोले जाते हैं.

3. बांके बिहारी जी की मंगला आरती का क्या महत्व है?
मंगला आरती भगवान को प्रातः जगाने और दिन की पहली सेवा करने की परंपरा है, जन्माष्टमी पर यह श्रीकृष्ण के प्राकट्य के बाद होने वाली विशेष सेवा मानी जाती है.

4. क्या हर भक्त बांके बिहारी जी की मंगला आरती के दर्शन कर सकता है?
मंगला आरती के दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंच सकते हैं, लेकिन प्रवेश और भीड़ की व्यवस्था मंदिर प्रशासन के निर्देशों के अनुसार होती है.

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