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निशिकांत दुबे ने मांग ली अखिलेश से माफी? दावों पर भाजपा सांसद का जवाब- मर्दानगी से लड़ता हूं | nishikant dubey vs akhilesh yadav on tinnu tipu se baat karta tha



नई दिल्ली:

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने पिछले दिनों राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड के आरोपी टिन्नू यादव और अखिलेश यादव के बीच संपर्क होने का आरोप लगाया था. उनका कहना था कि ‘टिन्नू टीपू से बात करता था’. इस टिप्पणी को लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने ऐतराज जताया था और 10 मिनट में पोस्ट डिलीट करने को कहा था. उनका कहना था कि ऐसा नहीं हुआ तो मानहानि का केस करूंगा. फिर सपा नेता केके पाल की ओर से एक नोटिस भेजा भी गया. अब सपा के नेताओं का दावा है कि निशिकांत दुबे ने अखिलेश यादव से माफी मांग ली है. ऐसे दावों वाले पोस्ट सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं. लेकिन निशिकांत दुबे ने खुद इससे इनकार कर दिया है.

उनका कहना है कि अखिलेश यादव से उन्होंने कोई माफी नहीं मांगी है. इसके साथ ही उन्होंने अपनी ओर से केके पाल को दिए जवाब की कॉपी का एक पेज भी एक्स पर शेयर किया है. इसमें उन्होंने लिखा था कि मैं आपको व्यक्तिगत तौर पर नहीं जानता कि आप कौन हैं. यदि आपको मेरी किसी बात से दुख हुआ हो तो उसके लिए खेद है. इसी को आधार बनाते हुए सपा की ओर से दावे किए गए कि निशिकांत दुबे ने अखिलेश यादव से माफी मांग ली है. लेकिन अब भाजपा ने खुद ही इससे इनकार कर दिया है. बता दें कि केके पाल समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. उनकी ओर से ही मानहानि का नोटिस भेजा गया था.

दुबे ने लिखा- नोटिस तो अखिलेश यादव को देना था?

वहीं निशिकांत दुबे का कहना है कि मैंने केके पाल के नोटिस का जवाब दिया है. अखिलेश यादव से कोई माफी नहीं मांगी है. भाजपा नेता ने लिखा, ‘वकील पाल है कि अखिलेश यादव जी. समाजवादी पार्टी को फिर मेरी सलाह है कि चाटुकारिता वाले को समझाइए. पहले तो नोटिस अखिलेश जी को देना था मानहानि का,बदले में पाल ने दिया. मैंने पूछा पाल आप कौन हो तो पाल ने दूसरे वकील से नोटिस भेजा. अब नई कहानी मैंने अखिलेश यादव जी से कोई माफ़ी नहीं मांगी है.। मैं गंगा किनारे का आदमी हूं,मर्दानगी और मर्यादा में लड़ता हूं. समाजवादी विचारधारा अफ़वाहों के लिए बनी है.’

आपके मुवक्किल को तो जानते ही नहीं? केके पाल के नोटिस पर दिया जवाब

निशिकांत दुबे ने यह लिखते हुए अपने जवाब का एक पेज भी शेयर किया है. इसमें केके पाल के वकील को संबोधित करते हुए लिखा गया है- ‘मेरे मुवक्किल स्पष्ट करते हैं कि उनका आपके मुवक्किल के खिलाफ कोई भी मानहानिकारक बयान देने का न तो कोई इरादा था और न ही कोई इच्छा थी। वास्तव में नोटिस प्राप्त होने से पहले, मेरे मुवक्किल को आपके मुवक्किल के बारे में कोई व्यक्तिगत जानकारी या जान-पहचान बिल्कुल नहीं थी। परिणामस्वरूप यह आरोप कि मेरे मुवक्किल ने जानबूझकर आपके मुवक्किल को निशाना बनाया या उन्हें बदनाम करने की कोशिश की, पूरी तरह से निराधार और तथ्यहीन है।’ यह जवाब निशिकांत के वकील ने भेजा था. 

निशिकांत दुबे ने लिखा- अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचने के लिए…

अंत में यह भी लिखा गया है कि केवल अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचने और सार्वजनिक संवाद की गरिमा बनाए रखने के दृष्टिकोण से, मेरे मुवक्किल गहरा खेद व्यक्त करते हैं. यदि उनके द्वारा दिए गए किसी भी बयान या टिप्पणी को अनजाने में आपके मुवक्किल द्वारा अपमानजनक या आहत करने वाला माना गया है। मेरे मुवक्किल का आपके मुवक्किल की प्रतिष्ठा, गरिमा या व्यावसायिक स्थिति को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था। इसी बात को आधार बनाते हुए सपा के नेताओं ने निशिकांत की ओर से माफी मांगने की बात कही है. लेकिन भाजपा नेता ने इससे इनकार किया है और उनका कहना है कि यह सब अफवाह है.







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