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नाना पाटेकर को याद कर इमोशनल हुए 40 साल पुराने जिगरी दोस्त CID के शिवाजी साटम, कहा- प्रोड्यूसर्स को दो घंटे तक खड़ा रखा, पैसे दिलवाए, पत्नी की बीमारी में दिया साथ  | cid fame Shivaji satam emotional friendship untold stories with nana patekar prayer meet  



नई दिल्ली:

नाना पाटेकर बॉलीवुड के जाने माने एक्टर है, जिन्होंने खलनायक से कॉमेडी तक का सफर तय किया. लेकिन इस सफर में उन्होंने खुद तो संघर्ष किया ही. जबकि अपने दोस्तों के लिए भी एक ढाल बने. इसका किस्सा नाना पाटेकर के 40 साल पुराने दोस्त ने बताया. हम बात कर रहे हैं सीआईडी के एसीपी प्रद्युमन का किरदार निभाने वाले एक्टर शिवाजी साटम की, जिन्होंने नाना पाटेकर को याद किया और इमोशनल हो गए. उन्होंने बताया कि कैसे 40 साल की दोस्ती और करियर बनाने में नाना ने उनकी मदद की. जो लोग नहीं जानते उन्हें बता दें कि नाना पाटेकर का पिछले दिनों कार्डियक अरेस्ट से 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. 

नाना पाटेकर को याद कर इमोशनल हुए शिवाजी साटम

एक्टर शिवाजी साटम हाल ही में नाना पाटेकर के सम्मान में आयोजित  ‘अठवणीतले नाना’ (हमारी यादों में नाना) नाम की शोक सभा में शामिल हुए, जो मुंबई के प्रभादेवी स्थित पी.एल. देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी परिसर में थी. इस दौरान कई एक्टर्स इकट्ठा हुए और नाना पाटेकर को याद किया. उन्होंने कहा, “नाना का निधन इतनी अचानक हो गया. जब मैंने यह खबर सुनी तो सच कहूं तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ. नाना के साथ मेरी अनगिनत यादें जुड़ी हैं. हम लगभग 40 सालों से एक-दूसरे को जानते थे और उन्हीं की वजह से मुझे हिंदी सिनेमा में अपनी जगह बनाने का मौका मिला. वही मुझे हिंदी फिल्मों में लेकर आए थे. उन्होंने ही मुझे समझाया था, ‘तुम्हें यह करना चाहिए. तुम्हें जरूर करना चाहिए.’”

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नाना पाटेकर ने प्रोड्यूसर से दिलवाए पैसे

शिवाजी साटम ने आगे कहा, “मेरी पहली फिल्म यशवंत थी. प्रोड्यूसर ने मुझे फोन किया क्योंकि फिल्म में एक पुलिस ऑफिसर का रोल था. लेकिन मैं उस समय इसके लिए तैयार नहीं था. प्रोड्यूसर ने मुझे बताया कि मेरे दोस्त नाना पाटेकर ने मेरा नाम रिकमेंड किया था. जब मैंने मना कर दिया तो प्रोड्यूसर ने नाना को फोन किया, जिन्होंने फिर मुझसे अपने तरीके से बात की और मुझे मना लिया. आखिरकार, कई बार मना करने के बाद मैं मान गया. शूट खत्म होने के बाद, मैं नाना से फिर मिला. उन्होंने मुझसे पूछा कि मुझे कितने पैसे मिले हैं. जब मैंने उन्हें रकम बताई तो वे बहुत नाराज हो गए. उन्होंने कहा, ‘तुम्हें कम से कम एक बार मुझसे तो पूछ लेना चाहिए था!’ उन्होंने मुझे डांटा और पूछा कि पैसे लेने से पहले मुझसे सलाह क्यों नहीं ली. इसके बाद, उन्होंने खुद प्रोड्यूसर्स को फोन किया.”

पत्नी के कैंसर ट्रीटमेंट में दिया साथ 

आगे उन्होने कहा, “मैंने उनसे खास तौर पर कहा था कि वे प्रोड्यूसर्स से कोई सवाल न पूछें और न ही इस बारे में उनसे कोई बात करें. लेकिन नाना ने एक न सुनी. उन्होंने प्रोड्यूसर्स को दो घंटे तक खड़ा रखा, ठीक वैसे ही जैसे स्कूल में टीचर हमें खड़ा रखा करते थे. बेचारे प्रोड्यूसर बिना कुछ कहे वहीं खड़े रहे.” इसके साथ ही शिवाजी साटम ने वाइफ के कैंसर में साथ देने के बारे में कहा, “मैं नाना से बहुत प्यार करता था क्योंकि उन्होंने मेरे लिए इतना कुछ किया, जितना शायद मेरा अपना सगा भाई भी नहीं कर पाता. जब हम फिल्म ‘गुलाम-ए-मुस्तफा’ की शूटिंग कर रहे थे, तब मेरी पत्नी को कैंसर होने का पता चला. मैंने नाना से कहा कि मैं अब इस फिल्म में काम नहीं कर पाऊंगा, लेकिन उन्होंने मेरी बात मानने से इनकार कर दिया. उन्होंने डायरेक्टर और फिल्म से जुड़े बाकी सभी लोगों से बात की. अगले दिन, हमारे डायरेक्टर पार्थो घोष ने मुझसे कहा, ‘दोपहर 12 बजे आ जाना, और मैं तुम्हें रात 8 बजे तक जाने दूंगा.’ यह सब नाना की वजह से ही मुमकिन हो पाया. उन्होंने मेरा पूरा ख्याल रखा और एक सगे भाई की तरह मेरा साथ दिया. ऐसे न जाने कितने किस्से हैं. वे सच में बहुत प्यारे इंसान थे. कभी-कभी, वे अचानक मुझे फोन करके पूछते, ‘क्या कर रहे हो? तुरंत फार्म पर आ जाओ!’ नाना बस ऐसे ही इंसान थे.”

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