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नए वीजा नियम लागू होने से एक दिन पहले ट्रंप प्रशासन को झटका; कोर्ट ने लगाई रोक, विदेशी छात्रों को राहत | us court judge postpones new visa rules for foreign students journalists trump administration visa policy stayed by us federal court


वाशिंगटन:

अमेरिका में पढ़ाई और काम करने की योजना बना रहे विदेशी छात्रों और पत्रकारों को बड़ी राहत मिली है. अमेरिकी संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन की उस नई वीजा नीति के अमल पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिसमें विदेशी छात्रों के अमेरिका में रहने की अवधि सीमित करने और पत्रकारों के वीजा नियमों को सख्त बनाने का प्रावधान था. यह फैसला ऐसे समय आया है जब नए नियम अगले ही दिन लागू होने वाले थे. अदालत ने मामले की अंतिम सुनवाई से पहले फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है और इस नीति की आवश्यकता तथा प्रभाव को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं.

नए नियम लागू होने से एक दिन पहले अदालत ने लगाया ब्रेक

न्यूज एजेंसी एपी के अनुसार अमेरिका के डिस्ट्रिक्ट जज डेनिस सायलर ने सोमवार को प्रारंभिक निषेधाज्ञा (प्रिलिमिनरी इंजंक्शन) जारी कर ट्रंप प्रशासन की नई वीजा नीति पर अस्थायी रोक लगा दी. यह आदेश ऐसे समय आया जब गृह सुरक्षा विभाग (DHS) के नए नियम अगले दिन से लागू होने वाले थे. अदालत ने मामले के गुण-दोष पर अंतिम फैसला दिए बिना फिलहाल नियमों के अमल को रोक दिया है और अगली सुनवाई 2 अक्टूबर के लिए निर्धारित की है.

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Photo Credit: Freepik

क्या थे नए वीजा नियम?

ट्रंप प्रशासन की प्रस्तावित नीति के अनुसार छात्र वीजा पर अमेरिका आने वाले विदेशी नागरिकों को अधिकतम चार वर्ष तक रहने की अनुमति मिलती. इसके बाद उन्हें वीजा विस्तार के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता. पहले अंतरराष्ट्रीय छात्रों को उनकी पढ़ाई पूरी होने तक अमेरिका में रहने की अनुमति मिलती थी.

इसी तरह विदेशी पत्रकारों के अमेरिका में रहने की अवधि घटाकर 240 दिन यानी करीब आठ महीने किए जाने का प्रस्ताव था. हालांकि वे समान अवधि के लिए विस्तार का आवेदन कर सकते थे. अब तक पत्रकारों को पांच साल तक रहने की अनुमति मिलती थी.

चीनी पत्रकारों के लिए नियम और भी सख्त प्रस्तावित थे. उन्हें केवल 90 दिन की अनुमति मिलती और विस्तार भी सिर्फ 90 दिन का ही होता.

संगठनों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया

विश्वविद्यालयों, शिक्षकों और पत्रकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई संगठनों और यूनियनों ने इस नीति के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की थी. याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि नए नियम शिक्षा, शोध और स्वतंत्र पत्रकारिता पर नकारात्मक असर डालेंगे तथा विदेशी छात्रों और मीडिया पेशेवरों के लिए अनिश्चितता पैदा करेंगे.

जज ने उठाए गंभीर सवाल

न्यायाधीश सायलर ने अपने आदेश के साथ जारी टिप्पणी में कहा कि वर्तमान व्यवस्था के तहत करोड़ों विदेशी छात्र अमेरिका आए हैं, जिससे विज्ञान, चिकित्सा और तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध हुए हैं और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिला है. उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को बेहतर बनाने के बजाय डीएचएस ऐसा नया कार्यक्रम लागू करना चाहता है, जिससे विदेशी छात्रों, शोधकर्ताओं, प्रोफेसरों और पत्रकारों की संख्या में भारी कमी आ सकती है.

वीजा विस्तार पर जताई चिंता

न्यायाधीश ने कहा कि प्रस्तावित नियमों के तहत वीजा विस्तार को मंजूरी देना या नहीं देना पूरी तरह डीएचएस अधिकारियों के विवेक पर निर्भर होगा और उसके खिलाफ किसी प्रकार की अपील का भी प्रावधान नहीं होगा.

उन्होंने कहा कि किसी भी गैर-अमेरिकी नागरिक की पढ़ाई, शोध या अध्यापन गतिविधियों को सीमित आधारों पर और बिना अपील के अधिकार के समाप्त किया जा सकता है.

विदेशी पत्रकारों के मामले में भी उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि यदि वीजा विस्तार से इनकार कर दिया जाए तो उनके पास कोई प्रभावी कानूनी विकल्प नहीं बचेगा.

राष्ट्रीय सुरक्षा तर्क पर भी सवाल

जज ने कहा कि इस नीति के दुरुपयोग की आशंका बनी रहती है. उन्होंने विशेष रूप से यह चिंता जताई कि सरकार या गृह सुरक्षा विभाग की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग करने वाले विदेशी पत्रकारों के वीजा का नवीनीकरण प्रभावित हो सकता है. जब डीएचएस ने इन नियमों का प्रस्ताव रखा था, तब राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया गया था. हालांकि जज ने इस तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह दावा कुछ चुनिंदा उदाहरणों पर आधारित प्रतीत होता है. उन्होंने संकेत दिया कि इतने बड़े बदलाव के लिए अधिक ठोस आधार होना चाहिए.

व्यापक इमीग्रेशन नीति का हिस्सा

विदेशी छात्रों और पत्रकारों पर प्रस्तावित ये प्रतिबंध ट्रंप प्रशासन की व्यापक इमीग्रेशन नीति का हिस्सा माने जा रहे हैं. इसमें बड़े शहरों में सख्त प्रवर्तन कार्रवाई और नागरिकता के कानूनी रास्तों को सीमित करने जैसे कदम भी शामिल हैं.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2023-24 में अमेरिका में 11 लाख से अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने अध्ययन किया था, जो दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे अधिक संख्या है.

फिलहाल अदालत के आदेश के बाद विदेशी छात्रों, शोधार्थियों और पत्रकारों को राहत मिली है, जबकि अब इस मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 2 अक्टूबर को होगी.

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