
भोपाल:
दिवाली से ठीक पहले मध्य प्रदेश में सफाई व्यवस्था पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है. नियमित नौकरी, बेहतर वेतन और आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करने की मांग को लेकर राज्यभर के दो लाख से अधिक सफाई कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं. राजधानी भोपाल सहित कई नगर निगम क्षेत्रों में घर-घर से कचरा उठाने का काम ठप हो गया है. हड़ताल के दूसरे दिन शहर के अधिकांश वार्डों में कचरे का ढेर नजर आने लगा है. कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा.
नगर निगम मुख्यालय पर बड़ा प्रदर्शन
NDTV की टीम जब भोपाल नगर निगम मुख्यालय पहुंची तो वहां सफाई कर्मचारी घेराव कर जोरदार प्रदर्शन कर रहे थे. बड़ी संख्या में कर्मचारी निगम कार्यालय के बाहर एकत्र हुए और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की. हड़ताल के समर्थन में राजधानी के अलग-अलग क्षेत्रों से कर्मचारी पहुंचे. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्षों से लंबित मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा.

सड़कों पर लगा कचरे का अंबार
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क्या हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें?
सफाई कर्मचारी आउटसोर्सिंग व्यवस्था को समाप्त करने, नियमित नियुक्ति, 25 हजार रुपये मासिक वेतन और अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. मध्य प्रदेश अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस के पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लेती, तब तक हड़ताल खत्म नहीं की जाएगी.
सरकार से वार्ता बेनतीजा
संगठन के अध्यक्ष मगन झांझोट ने बताया कि हड़ताल समाप्त कराने को लेकर शहरी प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे के साथ बुधवार को बातचीत हुई थी, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी. अब कर्मचारी संगठन मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात कर अपनी मांगें रखने की तैयारी कर रहा है.
भोपाल समेत कई शहरों में सफाई प्रभावित
हड़ताल का असर राजधानी भोपाल में साफ दिखाई दे रहा है. शहर के 85 वार्डों में सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है और डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण पूरी तरह बंद है. पिछले दो दिनों में सड़कों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरे के ढेर जमा होने लगे हैं. दिवाली से पहले बाजारों में बढ़ती भीड़ के बीच यह स्थिति प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गई है.
प्रतिदिन 850 टन कचरा निकलता है
भोपाल में रोजाना करीब 850 टन कचरा निकलता है. सामान्य दिनों में 400 से अधिक वाहन घर-घर जाकर कचरा एकत्र करते हैं और उसे शहर के 17 ट्रांसफर स्टेशनों तक पहुंचाते हैं. वहां से कचरे को आदमपुर छावनी स्थित निस्तारण केंद्र भेजा जाता है. हड़ताल के कारण यह पूरी व्यवस्था प्रभावित हो गई है.
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