

दिल्ली यूनिवर्सिटी की एकेडमिक काउंसिल (AC) ने PhD एडमिशन के नियमों में एक अहम बदलाव को मंजूरी दी है. अब चार साल का अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम पूरा करने वाले छात्र सीधे डॉक्टरेट की पढ़ाई के लिए अप्लाई कर सकेंगे. नए नियमों के तहत, चार साल के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम के ग्रेजुएट्स को PhD एडमिशन के लिए योग्य होने से पहले मास्टर डिग्री पूरी करने की जरूरत नहीं होगी. शुक्रवार को काउंसिल की एक बैठक हुई थी. इस बैठक में कई अन्य एकेडमिक और एडमिनिस्ट्रेटिव प्रस्तावों के साथ ये फैसला लिया गया है. यह बदलाव रिसर्च, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल (RIEC) की सिफरिशों के आधार पर किया गया है. ऐसे करने का मकसद यूनिवर्सिटी के एकेडमिक ढांचे को हालिया हायर एजुकेशन रिफ़ॉर्म्स के अनुरूप बनाना है.
दो सदस्यों ने जताई असहमति
हालांकि एकेडमिक काउंसिल की सदस्य माया जॉन और लतिका गुप्ता ने इस फैसले असहमति जताई थी. उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि अंडरग्रेजुएट पढ़ाई के तुरंत बाद PhD प्रोग्राम में दाखिला लेने वाले छात्रों पर आरक्षण नीतियां कैसे लागू होंगी. इसे लेकर कोई साफ गाइडलाइन नहीं है. ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने तर्क दिया कि ये उम्मीदवार एक अलग कैटेगरी में आते हैं और आरक्षण के प्रावधानों को साफ तौर पर तय किए बिना इन्हें मास्टर्स और MPhil ग्रेजुएट के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए.
इसके अलावा बैठक में शामिल हुए इन दोनों सदस्यों ने यूनिवर्सिटी की उस पॉलिसी पर भी सवाल उठाए, जिसके तहत हर डिपार्टमेंट में संस्थान से फंडेड नॉन-JRF फेलोशिप सिर्फ 16+1 स्कॉलर्स तक सीमित रखी गई है. उन्होंने कहा कि इस नियम की वजह से कई फुल-टाइम रिसर्च स्कॉलर्स को आर्थिक मदद नहीं मिल पाती है और यूनिवर्सिटी से अपील की कि वह सभी योग्य नॉन-JRF PhD स्टूडेंट्स को मदद दे.
बदला गया SOL का नाम
एक और अहम फैसला बैठक में लिया गया है. एकेडमिक काउंसिल ने ‘स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग’ (SOL) का नाम बदलकर ‘सेंटर फॉर डिस्टेंस एंड ऑनलाइन एजुकेशन’ (CDOE) करने को मंजूरी दे दी है. अब इस संस्थान के एडमिनिस्ट्रेटिव हेड का पद ‘प्रिंसिपल’ के बजाय ‘डायरेक्टर’ का होगा.
‘स्वर्गीय श्री अरुण जेटली’ स्कॉलरशिप को मंजूरी
काउंसिल ने अंडरग्रेजुएट खिलाड़ियों के लिए ‘स्वर्गीय श्री अरुण जेटली’ स्कॉलरशिप शुरू करने को भी मंजूरी दी है. 10 लाख रुपये के फंड से चलने वाली इस स्कीम के तहत अगले 20 सालों तक हर साल कुल 50,000 रुपये की तीन स्कॉलरशिप दी जाएंगी. जिनमें से कम से कम एक स्कॉलरशिप महिला स्टूडेंट के लिए होगी.





