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तूफान से ज्यादा उसके अलर्ट ने डराया…देर रात मोबाइल घनघनाया तो लोगों ने इमरजेंसी सायरन पर सवाल उठाया | India Cell Broadcast System Late-Night Emergency Alert Sparks Debate



गुरुवार रात ठीक 10:57 बजे गाजियाबाद में सैकड़ों मोबाइल फोन पर अचानक एक इमरजेंसी अलर्ट मैसेज आया. इसमें लिखा था – “Extremely Severe Alert- अगले 3 घंटों में आपके जिले में कुछ जगहों पर ते आंधी, तूफान हवा की रफ्तार 70-100 किमी/घंटे के साथ बिजली कड़कने के साथ भारी बारिश और ओले गिरने की बहुत ज्यादा संभावना है.’  ये आपातकालीन संदेश मोबाइल फोन पर एक खास और काफी तेज चेतावनी टोन के साथ भेजा गया था, जिस दौरान मोबाइल फोन तेजी से vibrate करने लगे और उसके सभी ऑपरेशन्स ब्लॉक हो गए थे.

भारत के नए वॉर्निंग सिस्टम से भेजा गया अलर्ट

ये मैसेज भारत के नए टेलीकॉम-आधारित पब्लिक वॉर्निंग सिस्टम ‘सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम’ के तहत भेजा गया था. इसके तहत एक तय इलाके में मौजूद मोबाइल डिवाइस पर एक साथ और खास जगह (geo-targeted) के हिसाब से इमरजेंसी अलर्ट भेजा जाता है, जिससे किसी बड़े खतरे या आपात घटना के बारे में एक साथ लाखों लोगों को एक साथ अलर्ट किया जा सके.

आधी रात ऐसे अलर्ट को लेकर उठ रहे सवाल

लेकिन देर रात करीब 11 बजे किसी इलाके में भारी बारिश या तूफानी हवा चलने के पूर्वानुमान को लेकर “Extremely Severe Alert” मैसेज भेजना क्या उचित है?  जिस परिस्थिति में “Extremely Severe Alert” मैसेज भेजे गए उसको लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. सबसे अहम सवाल ये उठा रहा है क्या इस तरह के इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम को एक्टिवेट करने के लिए भारत सरकार को एक Standard Operating Procedure (SOP) तय करना चाहिए? 

ये महत्वपूर्ण है कि भारत मौसम विभाग ने रात करीब 11 बजे गाजियाबाद शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर मोदीनगर के लिए एक “Moderate rainfall accompanied with moderate thunderstorm and lightning (50-90 Km/h gusty winds)” का पूर्वानुमान जारी किया था.  ऐसे में क्या किसी इलाके में “Moderate rainfall” या “moderate thunderstorm” के फॉरकास्ट के बाद “Extremely Severe Alert” मैसेज भेजा जाना चाहिए? 

देर रात भेजे गए इमरजेंसी अलर्ट मैसेज मिलने के बाद कई लोगों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपनी नारागी जताई है और कहा है कि इससे उनमें डर और खौफ पैदा हुआ. 

क्या कह रहे एक्सपर्ट्स?

नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट ऑथोरिटी के वाईस चेयरमैन रहे डॉ. वी शशिधर रेड्डी ने एनडीटीवी से कहा, “देश में जो नया इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम लागू किया गया है उसे रियल टाइम इवेंट्स के साथ कैलिब्रेट करना बेहद जरूरी हो गया है. इमरजेंसी अलर्ट सिस्ट को finetune करना होगा क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में कुछ खामियां हैं. कल रात को जो इमरजेंसी अलर्ट मैसेज भेजा गया उसमें ये नहीं बताया गया कि जिले के किस इलाके में कितनी बारिश की संभावना है या किस स्पेसिफिक इलाके में तेज हवाएं चल सकती हैं .”

डॉ. वी शशिधर रेड्डी NDMA के पहले वाईस चेयरमैन रहे हैं. उनका मानना है कि इसपर और रिसर्च करने की जरुरत है जिससे मौजूदा व्यवस्था को नए सिरे से और कारगर बनाया जा सके.

जाहिर है, हर बार ‘तूफान’ का पूर्वानुमान जारी होने के बाद इमरजेंसी अलार्म सिस्टम को एक्टिवेट करने से इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम कम प्रभावी हो सकता है, आम लोगों में इस पब्लिक वार्निंग सिस्टम को लेकर गंभीरता कम हो सकती है.

साथ ही, देर रात किसी ‘Moderate rainfall’ या ‘moderate thunderstorm’ के फॉरकास्ट के बाद अगर इस तरह के “Extremely Severe Alert” मैसेज रेगुलर बेसिस पर भेजे जाने लगे, तो इससे आम लोगों की जिंदगी प्रभावित हो सकती है.  

दुनियाभर में इसके लिए है SOP?

इंटरनेशनल टेलेकम्युनिक्शन यूनियन ने दुनियाभर में कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल व्यवस्था सेटअप करने के लिए ग्लोबल स्टैंडर्ड्स तय किये हैं. भारत में नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसी (NDMA) ने सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स (C-DOT) द्वारा तैयार एकीकृत अलर्ट सिस्टम (SACHET) को इंटरनेशनल टेलेकम्युनिक्शन यूनियन द्वारा तय कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (सीएपी) के आधार पर लागू किया है.

दुनिया की सबसे बड़ी डिजास्टर मैनेजमेंट संस्था अमेरिका की फेडरल डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसी (FEMA) के गाइडलाइन्स के मुताबिक, इमरजेंसी मैनेजमेंट से जुड़े अधिकारियों को घटना-विशिष्ट दिशानिर्देशों, प्रभावित होने वाले स्थानों, तय समय, मौजूदा हालात, फील्ड संसाधनों की उपलब्धता और इंसिडेंट कमांड के साथ तालमेल के आधार पर चेतावनी और सूचना देने की सही रणनीति बनानी चाहिए.

क्या है ये नया अलर्ट सिस्टम?

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ‘सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम’ को 02 मई, 2026 को लॉन्च किया था. यह तकनीक ‘सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स’ (C-DOT) ने विकसित की है, जो दूरसंचार विभाग (DoT) के तहत काम करता है. इसे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और गृह मंत्रालय (MHA) के सहयोग से तैयार किया गया है.

संचार मंत्रालय के मुताबिक, “CBS सटीक जियो-टारगेटिंग क्षमताएं प्रदान करता है, जिससे अलर्ट को अलग-अलग सेल टावरों या समूहों के स्तर पर भेजा जा सकता है, या फिर जरूरत पड़ने पर बड़े क्षेत्रों तक बढ़ाया जा सकता है. ये संदेश बिना किसी वेटिंग या कतार के कुछ ही सेकंड में सीधे यूजर्स तक पहुंच जाते हैं. उच्च विश्वसनीयता के लिए डिजाइन किया गया यह सिस्टम नेटवर्क जाम होने पर भी अप्रभावित रहता है, जिससे संकट के समय निर्बाध संचार बना रहता है. यह लक्षित क्षेत्र के सभी मोबाइल यूजर्स तक पहुंचता है, जिसमें रोमिंग वाले यूजर्स भी शामिल हैं. खास बात यह है कि यूजर्स इन अलर्ट्स को बंद नहीं कर सकते. इसके अलावा, ये अलर्ट प्रायोरिटी नोटिफिकेशन के रूप में एक पॉप-अप मैसेज और तेज आवाज के साथ आते हैं और कई फोन में इन संदेशों को बोलकर सुनाने की सुविधा भी दी गई है.’

यह पहल भारत के आपातकालीन संचार सिस्टम को मजबूत करने और सार्वजनिक सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए लॉन्च की गई है. लेकिन इसका कारगर इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए ये बेहद जरूरी है कि भारत सरकार इस हाई-टेक व्यवस्था को लागू करने के लिए नए गाइडलाइन्स तैयार करे.

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