

नवनेथम “नवी” पिल्लै पर 2010 में चीन के दबाव में झुकने का आरोप लगा था (फोटो- AFP)
साल 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार नवनेथम “नवी” पिल्लै को दिया गया है. भारतीय तमिल मूल की दक्षिण अफ्रीकी नागरिक, पिल्लै दक्षिण अफ्रीका के हाई कोर्ट की पहली गैर-श्वेत महिला जज थीं. वह एक कानून विशेषज्ञ हैं जिन्होंने 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के तौर पर काम किया है. साथ ही इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट की जज और रवांडा के लिए इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल की अध्यक्ष भी रही हैं. वैसे नोबेल शांति पुस्कार के साथ उनका 16 साल पुराना एक विवाद भी है जब उनपर चीन के दबाव के कारण झुकने का आरोप लगा था.
2010 के नोबेल शांति पुरस्कार समारोह में ऐसा क्या हुआ था?
दिसंबर 2010 में नोबेल शांति पुरस्कार समारोह में शामिल न होने की बात कहने पर जज नवनेथम “नवी” पिल्लै की आलोचना हुई थी. उस साल यह पुरस्कार चीन के असंतुष्ट नेता लियू शियाओबो को दिया गया था. तब चीन ने देशों और अलग-अलग अंतर-सरकारी संस्थाओं से इस समारोह का बहिष्कार करने को कहा था. पिल्लैं पर भी आरोप लगें कि वह चीन के सामने झुक गईं. लेकिन पिल्लै के ऑफिस ने उन आरोपों को खारिज कर दिया कि वह चीन के दबाव में ऐसा कर रही थीं.
बता दें कि लियू शियाओबो चीन के एक प्रमुख साहित्यिक आलोचक, लेखक, मानवाधिकार कार्यकर्ता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता थे. उन्होंने चीन में राजनीतिक सुधारों, लोकतांत्रिक व्यवस्था और एकदलीय कम्युनिस्ट शासन को समाप्त करने के लिए जीवनभर अहिंसक संघर्ष किया. जब साल 2010 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था तो वह यह सम्मान पाने वाले पहले चीनी नागरिक बने थे. चीन ने उन्हें 2008 में ही गिरफ्तार कर लिया था. जेल में रहने के दौरान ही वह लिवर कैंसर से पीड़ित हो गए. उचित इलाज के अभाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव के बाद उन्हें पैरोल पर हॉस्पिटल में ट्रांसफर किया गया, जहां 13 जुलाई 2017 को हिरासत में ही उनका निधन हो गया.
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