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जब कोई आपके साथ गलत करे, तब क्या करें? BK Shivani की ये सीख हर किसी को जाननी चाहिए | What to do if someone do wrong with you know tips from bk shivani



कई बार जिंदगी में ऐसा होता है कि कोई अपने ही शब्दों या व्यवहार से हमें दुख पहुंचा देता है, जिसके बाद हमें बहुत ज्यादा निराशा का सामना करना पड़ता है. ऐसे में मन में गुस्सा, शिकायत और बदला लेने की भावना आना बेहद स्वाभाविक है. लेकिन क्या ऐसी स्थिति में हर गलत व्यवहार का जवाब गलत तरीके से देना सही है? बीके शिवानी के अनुसार, जब कोई हमारे साथ गलत करता है, तब सबसे जरूरी यह नहीं होता कि सामने वाले ने क्या किया, बल्कि यह होता है कि हम उस स्थिति पर कैसाा रिएक्ट करते हैं. उनका कहना है कि अगर हम दूसरों की गलतियों की वजह से अपना स्वभाव और शांति खो देंगे, तो नुकसान भी सबसे ज्यादा हमारा ही होता है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं…

हर रिश्ता कुछ सिखाता है

हम अक्सर लोगों को रिश्तों के नजरिए से देखते हैं. यह मेरा बेटा है, मेरी बेटी है, मेरा जीवनसाथी है या मेरा दोस्त है. इन रिश्तों के साथ हम कई उम्मीदें भी जोड़ लेते हैं. जब सामने वाला हमारी उम्मीदों पर खरा नहींं उतरता, तो मन में निराशा हो जाती है. बीके शिवानी ने बताया कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण हमें सिखाता है कि हम सबसे पहले आत्माएं हैं, जो एक लंबी यात्रा का हिस्सा हैं. ऐसे में हर मुलाकात और हर रिश्ता हमें कुछ सिखाने आता है.

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कॉज एंड इफेक्ट

बीके शिवानी के मुताबिक, जीवन में जो भी परिस्थितियां आती हैं, वो ‘कॉज एंड इफेक्ट’ यानी कारण और परिणाम के नियम से जुड़ी होती हैं. हम सभी ने बचपन से सुना है कि, ‘जैसा कर्म वैसा फल’, लेकिन यह नियम सिर्फ बड़े कर्मों पर नहीं, बल्कि हमारे हर विचार, हर शब्द और हर व्यवहार पर भी लागू होता है. ऐसे में जब भी कोई हमारे साथ गलत करे, तो सबसे पहले हमें अपनेे विचारों को भी देखना चाहिए.

कोई गलत करे तो क्या करें?

बीके शिवानी ने बताया कि जब कोई व्यक्ति हमारे साथ बुरा व्यवहार करता है, तो हमें उस घटना को बार-बार मन में दोहराने की जगह खुद से सवाल पूछना चाहिए कि मैं इस स्थिति में कैसी एनर्जी पैदा कर रहा हूं. अगर हम गुस्सा, नफरत या बदले की भावना रखते हैं, तो वही नेगेटिव एनर्जी हमारे अंदर जमा होती रहती है. इससे रिश्ते और भी ज्यादा उलझते हैं और मन की शांति भीी खत्म होने लगती है.

गलत के साथ गलत न करें

बीके शिवानी ने बताया कि ‘गलत के साथ गलत नहीं करना है’. अगर कोई हमारे साथ गलत व्यवहार करे, तो हमें अपनी अच्छाई और अपने संस्कार नहीं छोड़ने चाहिए. किसी के व्यवहार की वजह से अपना स्वभाव बदल लेना समझदारी नहीं है. उन्होंने कहा कि हमें यह सोचना चाहिए कि किसी के व्यवहार की वजह से मैं अपनी ओरिजिनैलिटी क्यों खराब करूं? उन्होंने आगे बताया कि माफी बहुत ज्यादा जरूरी होती है. ऐसे में माफ करना सामने वाले पर एहसान नहीं, बल्कि खुद को मानसिक बोझ से मुक्त करने का तरीका है. जब हम कहते हैं, “मैंने तुम्हें माफ किया, तुम मुझे माफ करो, चलो इस पुराने हिसाब को यहीं खत्म करते हैं,” तब हम अपने मन को हल्का करते हैं और आगे बढ़ने की ताकत पाते हैं.

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