
बचपन से ही दुनिया की आवाजें उनके लिए खामोश थीं. लोग क्या कह रहे हैं, यह समझने के लिए उन्हें हर वक्त होंठों की हरकतों को पढ़ना पड़ता था. लेकिन आज 22 वर्षीय टीना गर्ग न सिर्फ सुन पा रही हैं, बल्कि देश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में जगह बनाकर लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई हैं. दिल्ली की रहने वाली टीना का जन्म दोनों कानों में बाइलेटरल प्रोफाउंड हियरिंग लॉस के साथ हुआ. बाइलेटरल यानी दोनों कानों में यह एक गंभीर प्रकार का बहरापन है. इससे प्रभावित शख्स को किसी भी तरह की सामान्य बातचीत भी सुनाई नहीं देती है.
टीना गर्ग के मामले में इसकी जानकारी जब वो बेहद छोटी थीं तब ही मिल गई थी तो परिवार ने उनकी बेहतर देखभाल और विशेष शिक्षा के लिए चेन्नई का रुख किया, जहां उन्हें श्रवण बाधित बच्चों के लिए विशेष स्कूल बालविद्यालय में दाखिला दिलाया गया.
जब वह छह साल की थी तब उनका दाखिला मेनस्ट्रीम स्कूल में कराया गया. स्कूल के नए वातावरण में वो पढ़ाई कर सकें ये सबसे बड़ी चुनौती थी. लेकिन परिवार, दोस्तों और स्कूल की मदद से वो न केवल आगे बढ़ती रहीं बल्कि इस बाधा को उन्होंने अपनी पढ़ाई के बीच नहीं आने दिया और स्कूल के परिणाम बेहतर से बेहतर होते चले गए.
जब वो चेन्नई से पुणे और बेंगलुरु के दिल्ली पब्लिक स्कूल में पहुंचीं तो अव्वल दर्जे का नतीजा आने लगा लेकिन सामने वाले के होठों की हरकतों को पढ़ने के लिए बेहद एकाग्रता और धैर्य चाहिए लिहाजा टीना को रोज ही इस चुनौती का सामना करना पड़ता था.

टीना गर्ग
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होनहार टीना पहुंची IIT बॉम्बे
हालांकि बचपन से ही टीना ने लिप-रीडिंग यानी लोगों के होंठों की गतिविधियों को पढ़कर संवाद करना सीख लिया था और ये कौशल उनकी पढ़ाई और सामाजिक जीवन का सबसे बड़ा सहारा बना. सुनने में असमर्थता के बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों को सीमित नहीं होने दिया.
लगातार मेहनत और परिवार, शिक्षकों तथा दोस्तों के सहयोग से टीना ने देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान आईआईटी बॉम्बे में दाखिला हासिल किया. हालांकि, रोजमर्रा की बातचीत उनके लिए अब भी चुनौती बनी हुई थी. किसी भी संवाद को समझने के लिए उन्हें लगातार सामने वाले के चेहरे और होंठों पर ध्यान केंद्रित करना पड़ता था.
पर जब वो आईआईटी पहुंचीं तो यह चुनौती और भी बड़ी हो गई क्योंकि वहां लेक्चर में 100 स्टूडेंट्स से भी ज्यादा हुआ करते थे और नई तकनीकों के माध्यम से पढ़ाई कराई जाती थी तो लिप रीडिंग करना नामुमकिन हो चला. साथ ही जब ग्रुप डिस्कशन जैसी एक्टिविटी होती तब एक से अधिक लोगों के जल्दी जल्दी संवाद करने की वजह से उसे भी लिप रीडिंग के माध्यम से पकड़ना नामुमकिन हो चला.
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सर्जरी की प्रतीकात्मक तस्वीर
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IIM कोलकाता नहीं जा सकीं टीना
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से टीना ने खुद कहा कि जब वो दो से अधिक लोगों के साथ ग्रुप डिस्कशन कर रही होती थीं तब तेजी से अपने सिर को बोलने वाले की तरफ इतनी तेजी से नहीं घुमा पाती थीं, जिसकी वजह से उन्हें लिप रीडिंग में मुश्किलों का सामना करना पड़ा.
इसी दौरान इलाज के विकल्प तलाशते हुए टीना को द्वारका स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में ईएनटी एवं कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. सुमित मृग के बारे में जानकारी मिली. परिजनों की सलाह पर उन्होंने डॉक्टर से संपर्क किया और दोनों कानों में कॉक्लियर इम्प्लांट कराने का फैसला किया. हालांकि उस दौरान उन्हें IIM कोलकाता में एडमिशन का मौका मिला लेकिन सर्जरी की वजह से उन्होंने उसे छोड़ दिया.

कॉक्लियर इम्प्लांट
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क्या होता है कॉक्लियर इम्प्लांट?
कॉक्लियर इम्प्लांट एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है, जो सीधे श्रवण तंत्रिका को उत्तेजित कर व्यक्ति को ध्वनि का अनुभव कराता है. सफल सर्जरी के बाद टीना ने छह महीने का विशेष ऑडिटरी रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम पूरा किया, जिसके जरिए उन्होंने नई आवाजों को पहचानना और समझना सीखा.
डॉ. सुमित मृग के अनुसार, गहरी श्रवण अक्षमता केवल सुनने की समस्या नहीं होती, बल्कि यह व्यक्ति के आत्मविश्वास, शिक्षा, सामाजिक जीवन और संचार क्षमता को भी प्रभावित करती है. उनका कहना है कि सही समय पर कॉक्लियर इम्प्लांट और व्यवस्थित पुनर्वास से व्यक्ति की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है.

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IIT के बाद IIM बेंगलुरु भी पहुंची टीना
तब टीना केवल 20 साल की थीं, छह महीने के रिहैबिलिटेशन के बाद टीना की संवाद क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ. अब उन्हें पहले की तरह हर समय लिप-रीडिंग पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और शैक्षणिक तथा सामाजिक जीवन में भागीदारी आसान हो गई.
टीना की सफलता की कहानी यहीं नहीं रुकी. IIT बॉम्बे के बाद उन्होंने देश के शीर्ष प्रबंधन संस्थानों में से एक IIM बेंगलुरु में भी प्रवेश हासिल कर लिया. यह उपलब्धि बताती है कि शारीरिक चुनौतियां किसी व्यक्ति की क्षमता और सपनों की राह में स्थायी बाधा नहीं बन सकतीं.
इस साल टीना ने एक बार फिर CAT परीक्षा पास की और देश के सभी टॉप-लेवल बिजनेस स्कूलों IIM अहमदाबाद, कलकत्ता, लखनऊ और बेंगलुरु में एडमिशन हासिल करने की योग्यता हासिल की. अब टीना ने IIM बेंगलुरु में एडमिशन ले लिया है.
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अभिजीत श्रीवास्तव
Assistant Editor, Digital Content
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